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सभी नशा मुक्ति केंद्रों पर नियमित मनोचिकित्सकों की नियुक्ति हो : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। नशे के आदी लोगों की भलाई और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब व हरियाणा के मुख्य सचिवों तथा चंडीगढ़ में प्रशासक के सलाहकार को सभी नशा मुक्ति केंद्रों पर नियमित आधार पर मनोचिकित्सकों की नियुक्ति का सुझाव दिया है। साथ ही प्रशासन को जेलों में ड्रग डिटेक्शन किट तैनात कर नशा तस्करी रोकने का सुझाव दिया गया है। नशा तस्करी रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ से तलब की थी। मामले की सुनवाई के दौरान तीनों ने अपने-अपने हलफनामे कोर्ट में सौंपकर उठाए कदमों की जानकारी दी। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि नशे के आदी लोगों को मनोरोग चिकित्सा उपलब्ध कराने से अंततः मांग में कमी आएगी, जिसका परिणाम यह होगा कि आपूर्ति में कमी आएगी। इससे नशीले पदार्थों की तस्करी में कमी आएगी।
हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर न्यायालय की सहायता के लिए हिमाचल प्रदेश की डीआईजी सौम्या सांबशिवन से इनपुट मांगे थे। डीआईजी ने कहा कि ऐसे कई अध्ययन हैं जो दर्शाते हैं कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच मजबूत संबंध है। अन्यथा भी नशा मुक्ति उपचार दोहरे दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, यानी नशा मुक्ति के दृष्टिकोण से और मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से। नशा मुक्ति बीमारी से ज्यादा मानसिक क्षमताओं पर जीत हासिल करने के बारे में है।
सुझाव पर विचार करते हुए, न्यायालय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2017 की धारा 2 के अनुसार मनोचिकित्सक को प्रमुख महत्व दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि नशीली दवाओं की लत से उत्पन्न मानसिक स्वास्थ्य बीमारी के लिए मनोचिकित्सा दवा की आवश्यकता होती है, लेकिन पेशेवर क्षमता से संपन्न मनोचिकित्सक द्वारा ही। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को जेलों में ड्रग डिटेक्शन किट तैनात करनी चाहिए, जिससे जेलों में ड्रग तस्करी पर लगाम लगेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि पूरा देश नशीली दवाओं की तस्करी से उत्पन्न होने वाले बड़े पैमाने पर अनियंत्रित उपभोग से सामाजिक व आर्थिक ताने-बाने के बिगड़ने का सामना कर रहा है।
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हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर न्यायालय की सहायता के लिए हिमाचल प्रदेश की डीआईजी सौम्या सांबशिवन से इनपुट मांगे थे। डीआईजी ने कहा कि ऐसे कई अध्ययन हैं जो दर्शाते हैं कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच मजबूत संबंध है। अन्यथा भी नशा मुक्ति उपचार दोहरे दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, यानी नशा मुक्ति के दृष्टिकोण से और मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से। नशा मुक्ति बीमारी से ज्यादा मानसिक क्षमताओं पर जीत हासिल करने के बारे में है।
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सुझाव पर विचार करते हुए, न्यायालय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2017 की धारा 2 के अनुसार मनोचिकित्सक को प्रमुख महत्व दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि नशीली दवाओं की लत से उत्पन्न मानसिक स्वास्थ्य बीमारी के लिए मनोचिकित्सा दवा की आवश्यकता होती है, लेकिन पेशेवर क्षमता से संपन्न मनोचिकित्सक द्वारा ही। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को जेलों में ड्रग डिटेक्शन किट तैनात करनी चाहिए, जिससे जेलों में ड्रग तस्करी पर लगाम लगेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि पूरा देश नशीली दवाओं की तस्करी से उत्पन्न होने वाले बड़े पैमाने पर अनियंत्रित उपभोग से सामाजिक व आर्थिक ताने-बाने के बिगड़ने का सामना कर रहा है।
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