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डिग्री देने के संस्थान न बनें निजी विवि : मनोहर
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चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने तक के संस्थान न बनें। प्लेसमेंट तक विद्यार्थियों की चिंता करें। गुणवत्तापरक के साथ-साथ विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त शिक्षा दें ताकि विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना प्रगाढ़ हो। मुख्यमंत्री ने यह बात वीरवार को यहां राजभवन में आयोजित निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं कुलसचिवों की एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कही।
कार्यशाला की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने की। शिक्षा मंत्री कंवरपाल और हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद के चेयरमैन प्रो. बीके कुठियाला ने भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुपर 100 कार्यक्रम से गरीब परिवारों के 72 विद्यार्थियों का मेडिकल व 23 विद्यार्थियों का आईआईटी में दाखिला हुआ है। अब दो की जगह 4 स्थानों पर सुपर 100 कार्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है। शिक्षा के क्षेत्र में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हमारा उद्देश्य हर जिले में विश्वविद्यालय स्थापित करना है। केजी-टू-पीजी प्रोग्राम को और विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर दें। ऐसा करने से अपराध व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। विद्यार्थियों की एलूमिनी मीट पर जोर दिया जाए। पौधरोपण को विद्यार्थियों की इंटरनल एसेसमेंट से जोड़ना चाहिए।
नो ड्रॉप आउट का लक्ष्य
मनोहर लाल ने परिवार पहचान-पत्र योजना को सिरे चढ़ाने के लिए कुलपतियों से सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह डाटा प्रत्येक बच्चे को ट्रैक करने में सहयोगी सिद्ध होगा। इससे जीरो ड्रॉप आउट के लक्ष्य को 2024 तक पूर्ण कर लेंगे। इसके तहत 3 वर्ष से 18 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को ट्रैक कर उसे स्कूल तक लाने का काम किया जाएगा।
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शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए काम करें शिक्षाविद : बंडारू
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि शिक्षाविद शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए काम करें। शिक्षा ही सर्वांगीण विकास का माध्यम है। सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए बेहतरीन कार्य कर रही है। शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। शिक्षा से ही गरीबी मिटाई जा सकती है। अभी वंचित वर्गों के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। निजी विश्वविद्यालों को न केवल ऐसे गरीब छात्रों को दाखिला देना चाहिए बल्कि उनके समग्र विकास के लिए भी प्रयास करना चाहिए। निजी संस्थान नई शिक्षा नीति को अच्छे तरीके से लागू करें।
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कार्यशाला की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने की। शिक्षा मंत्री कंवरपाल और हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद के चेयरमैन प्रो. बीके कुठियाला ने भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुपर 100 कार्यक्रम से गरीब परिवारों के 72 विद्यार्थियों का मेडिकल व 23 विद्यार्थियों का आईआईटी में दाखिला हुआ है। अब दो की जगह 4 स्थानों पर सुपर 100 कार्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है। शिक्षा के क्षेत्र में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हमारा उद्देश्य हर जिले में विश्वविद्यालय स्थापित करना है। केजी-टू-पीजी प्रोग्राम को और विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षाविदों से आह्वान किया कि वे संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर दें। ऐसा करने से अपराध व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। विद्यार्थियों की एलूमिनी मीट पर जोर दिया जाए। पौधरोपण को विद्यार्थियों की इंटरनल एसेसमेंट से जोड़ना चाहिए।
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नो ड्रॉप आउट का लक्ष्य
मनोहर लाल ने परिवार पहचान-पत्र योजना को सिरे चढ़ाने के लिए कुलपतियों से सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह डाटा प्रत्येक बच्चे को ट्रैक करने में सहयोगी सिद्ध होगा। इससे जीरो ड्रॉप आउट के लक्ष्य को 2024 तक पूर्ण कर लेंगे। इसके तहत 3 वर्ष से 18 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को ट्रैक कर उसे स्कूल तक लाने का काम किया जाएगा।
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शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए काम करें शिक्षाविद : बंडारू
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि शिक्षाविद शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए काम करें। शिक्षा ही सर्वांगीण विकास का माध्यम है। सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए बेहतरीन कार्य कर रही है। शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। शिक्षा से ही गरीबी मिटाई जा सकती है। अभी वंचित वर्गों के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। निजी विश्वविद्यालों को न केवल ऐसे गरीब छात्रों को दाखिला देना चाहिए बल्कि उनके समग्र विकास के लिए भी प्रयास करना चाहिए। निजी संस्थान नई शिक्षा नीति को अच्छे तरीके से लागू करें।