{"_id":"608445018ebc3ea1d86734fd","slug":"police-watches-over-oxygen-plants-in-punjab-bureau-news-pkl4113947118","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सांसों पर पहरा: पंजाब में पुलिस की निगरानी में ऑक्सीजन प्लांट, आवाजाही पर भी रखी जा रही नजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांसों पर पहरा: पंजाब में पुलिस की निगरानी में ऑक्सीजन प्लांट, आवाजाही पर भी रखी जा रही नजर
Sat, 24 Apr 2021 09:49 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 09:49 PM IST
सार
पंजाब पुलिस ने ऑक्सीजन प्लांटों के अलावा सिलिंडरों की ढुलाई के समय वाहनों के साथ पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है। यानी ऑक्सीजन सिलिंडरों की आवाजाही भी पुलिस की देखरेख में हो रही है।
विज्ञापन
फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज में लगा ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऑक्सीजन की कमी और कालाबाजारी की आशंका के मद्देनजर पंजाब में स्थापित ऑक्सीजन प्लांटों पर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। राज्य सरकार के निर्देशों के बाद पंजाब पुलिस ने ऑक्सीजन प्लांटों के अलावा सिलिंडरों की ढुलाई के समय वाहनों के साथ पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है। यानी ऑक्सीजन सिलिंडरों की आवाजाही भी पुलिस की देखरेख में हो रही है।
कोविड के लगातार बढ़ते संकट के बीच मरीजों के लिए राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी का संकट है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ऑक्सीजन की कमी की ओर ध्यान दिलाया था। उसके बाद केंद्र सरकार ने पंजाब का ऑक्सीजन कोटा तो बढ़ाया, लेकिन चंडीगढ़ को भी इसी कोटे से जोड़ दिया, जिसके चलते कोटा बढ़ने के बावजूद पंजाब को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
कोविड के लगातार बढ़ते संकट के बीच मरीजों के लिए राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी का संकट है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ऑक्सीजन की कमी की ओर ध्यान दिलाया था। उसके बाद केंद्र सरकार ने पंजाब का ऑक्सीजन कोटा तो बढ़ाया, लेकिन चंडीगढ़ को भी इसी कोटे से जोड़ दिया, जिसके चलते कोटा बढ़ने के बावजूद पंजाब को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ का कोटा साथ जोड़ने से बढ़ा संकट
केंद्र सरकार की तरफ से पंजाब को 136 एमटी ऑक्सीजन अलॉट की गई है, जिसमें राज्य में बनने वाली 32 एमटी ऑक्सीजन भी शामिल है। वहीं, चंडीगढ़ के कोटे की 35 एसटी ऑक्सीजन भी इसी में जोड़ी गई है। इस तरह पंजाब इस समय ऑक्सीजन के भारी संकट में घिर गया है। शनिवार को राज्य की मुख्य सचिव विनी महाजन ने मुख्यमंत्री को बैठक के दौरान जानकारी दी कि राज्य में इस समय कोविड संकट से निपटने के लिए 250 एमटी ऑक्सीजन की जरूरत है और अगले कुछ दिन में यह मांग 300 एमटी तक पहुंच सकती है।
राज्य के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने अपने विभाग को निर्देश जारी किए हैं कि सूबे में ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जाए और ऑक्सीजन प्लांटों से निकलने वाले सिलिंडरों से लदे वाहनों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पुलिस कर्मचारी तैनात किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने सेहत विभाग और पंजाब हेल्थ कारपोरेशन को निजी व सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडरों के इस्तेमाल और उनकी रिफिलिंग का पूरा हिसाब रखने के निर्देश दिए हैं। उद्योग विभाग की तरफ से रिफिलिंग यूनिटों में सप्लाई और मांग पर सातों दिन 24 घंटे नजर रखने के लिए टीमों का गठन किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऑक्सीजन प्लांटों के भेजे जा रहे सिलिंडरों का गैर-कोविड कार्यों में इस्तेमाल न हो।
राज्य के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने अपने विभाग को निर्देश जारी किए हैं कि सूबे में ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जाए और ऑक्सीजन प्लांटों से निकलने वाले सिलिंडरों से लदे वाहनों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पुलिस कर्मचारी तैनात किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने सेहत विभाग और पंजाब हेल्थ कारपोरेशन को निजी व सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडरों के इस्तेमाल और उनकी रिफिलिंग का पूरा हिसाब रखने के निर्देश दिए हैं। उद्योग विभाग की तरफ से रिफिलिंग यूनिटों में सप्लाई और मांग पर सातों दिन 24 घंटे नजर रखने के लिए टीमों का गठन किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऑक्सीजन प्लांटों के भेजे जा रहे सिलिंडरों का गैर-कोविड कार्यों में इस्तेमाल न हो।
पंजाब में ऑक्सीजन उत्पादन और रिफिलिंग की क्षमता
पंजाब में आम दिनों में चिकित्सा क्षेत्र के लिए 110-120 एमटी ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वैसे राज्य के पास ऑक्सीजन के 300 एमटी भंडारण की क्षमता है, लेकिन कोविड संकट के चलते राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग 250 एमटी तक पहुंच चुकी है। पंजाब के ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लांट, जिनकी क्षमता 41 एमटी प्रतिदिन है, केंद्रीय कोटे के साथ मिलकर भी राज्य की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे, क्योंकि बुधवार को हिमाचल के बद्दी और हरियाणा के पानीपत से पंजाब को होने वाली ऑक्सीजन आपूर्ति रुक गई है।
ऑक्सीजन रिफिलिंग के अलावा, पंजाब में एयर सेपरेशन यूनिट (एएसयू) के जरिये भी ऑक्सीजन का निर्माण होता है, जो प्रतिदिन 80 एमटी है। वहीं, पंजाब के कुछ निजी अस्पतालों के अपने ऑनसाइट मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट हैं, इसलिए उन्हें सिलिंडर की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन पंजाब के किसी भी सरकारी अस्पताल के पास लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) का कोई प्लांट नहीं है। दूसरी ओर, पंजाब में कुल 29 औद्योगिक इकाइयां हैं, जो 14 दैनिक आधार पर 80 एमटी ऑक्सीजन बनाती हैं। बाकी 15 इकाइयां औद्योगिक और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए 41.6 एमटी ऑक्सीजन मुहैया कराती हैं।
ऑक्सीजन रिफिलिंग के अलावा, पंजाब में एयर सेपरेशन यूनिट (एएसयू) के जरिये भी ऑक्सीजन का निर्माण होता है, जो प्रतिदिन 80 एमटी है। वहीं, पंजाब के कुछ निजी अस्पतालों के अपने ऑनसाइट मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट हैं, इसलिए उन्हें सिलिंडर की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन पंजाब के किसी भी सरकारी अस्पताल के पास लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) का कोई प्लांट नहीं है। दूसरी ओर, पंजाब में कुल 29 औद्योगिक इकाइयां हैं, जो 14 दैनिक आधार पर 80 एमटी ऑक्सीजन बनाती हैं। बाकी 15 इकाइयां औद्योगिक और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए 41.6 एमटी ऑक्सीजन मुहैया कराती हैं।