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Highcourt News: हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट-परिवार से मिलना जीवन के अधिकार का हिस्सा, NDPS Act के दोषी को पैरोल

Fri, 11 Nov 2022 08:00 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 11 Nov 2022 08:00 AM IST
सार

बरनाला निवासी बब्बू सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने परिवार से मिलने और उनकी देखभाल के लिए हाईकोर्ट से पैरोल की मांग की थी। याची ने बताया कि उसे एनडीपीएस मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई थी। याची अपनी सजा में से 1 साल 10 माह की कैद काट चुका है।

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Part of right to life to meet family, can be denied parole only in special circumstances
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के मामले में 10 साल की सजा काट रहे कैदी को 8 सप्ताह की पैरोल देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि परिवार से मिलना और उनका ख्याल रखना जीवन के अधिकार का हिस्सा है जो हर भारतीय को संविधान देता है। विशेष परिस्थितियों में ही कैदी को पैरोल से इनकार किया जा सकता है।
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बरनाला निवासी बब्बू सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने परिवार से मिलने और उनकी देखभाल के लिए हाईकोर्ट से पैरोल की मांग की थी। याची ने बताया कि उसे एनडीपीएस मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई थी। याची अपनी सजा में से 1 साल 10 माह की कैद काट चुका है। अभी वह जेल में है और अपने परिवार से मिलने के लिए उसने जेल प्रशासन से पैरोल की मांग की थी। जेल प्रशासन ने उसकी मांग को खारिज कर दिया जिसके चलते उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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याचिका का विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि यदि याची को पैरोल दी गई तो वह नशा तस्करी के व्यापार में दोबारा उतर सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन ने पैरोल की मांग खारिज करते हुए ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं दिया है जिसके आधार पर आदेश को सही माना जा सके। कोर्ट ने कहा कि सजा के दौरान जेल में कैदी को रख कर उसे सुधारा जाता है और ऐसा करते हुए इस सुधार में परिवार से मिलना अहम भूमिका अदा करता है। ऐसे में याची को पैरोल का लाभ दिया जाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने अब याची को परिवार से मिलने के लिए 8 सप्ताह की पैरोल देने का आदेश दिया है।
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