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नई खोजः एक साथ कई मरीजों की जिंदगी संभालेगा 'वेंटिलेटर', संपर्क में आए बिना ले सकेंगे सैंपल
Fri, 17 Apr 2020 10:34 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2020 10:34 AM IST
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कोरोना के इस दौर में सरकार ने कई अस्पतालों को कोविड-हॉस्पिटल में कन्वर्ट किया हुआ है। ऐसे अस्पतालों में संक्रमित और संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है। इस स्थिति में इन मरीजों के साथ-साथ अन्य मरीजों के लिए भी वेंटिलेटर की भी खासी जरूरत महसूस हो रही है। कई अस्पताल ऐसे हैं जहां वेंटिलेटर की कमी बनी हुई है। खासकर सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर सुविधा की ज्यादा कमी है।
अस्पतालों में वेंटिलेटर सुविधा के मौजूदा हालातों को ही देखते हुए रक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) एक खास तरह का स्वदेशी मल्टी पेशेंट वेंटिलेटर तैयार करने में जुटा हुआ है। इस वेंटीलेटर की खास बात यह है कि एक बार में यह मशीन कई मरीजों की जिंदगी को संभालने में सक्षम होगी और यह एक ही वेंटीलेटर एक बार में कई मरीजों को सपोर्ट कर सकेगा।
डीआरडीओ जल्द से जल्द इस वेंटीलेटर को तैयार कर इसे लांच करेगा। प्रदेश के अधिकतर प्राइवेट अस्पतालों में भी यह सुविधा बहुत कम है। एक सीनियर सरकारी डॉक्टर ने बताया कि वेंटिलेटर न होने की वजह से कई बार क्रिटिकल मरीज को पीजीआई भेजना पड़ता है। मगर यदि कई मरीजों को एक बार में संभालने वाला कोई वेंटिलेटर बनता है तो निसंदेह यह उपकरण क्रिटिकल मरीजों के लिए एक वरदान से कम साबित नहीं होगा।
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अस्पतालों में वेंटिलेटर सुविधा के मौजूदा हालातों को ही देखते हुए रक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) एक खास तरह का स्वदेशी मल्टी पेशेंट वेंटिलेटर तैयार करने में जुटा हुआ है। इस वेंटीलेटर की खास बात यह है कि एक बार में यह मशीन कई मरीजों की जिंदगी को संभालने में सक्षम होगी और यह एक ही वेंटीलेटर एक बार में कई मरीजों को सपोर्ट कर सकेगा।
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डीआरडीओ जल्द से जल्द इस वेंटीलेटर को तैयार कर इसे लांच करेगा। प्रदेश के अधिकतर प्राइवेट अस्पतालों में भी यह सुविधा बहुत कम है। एक सीनियर सरकारी डॉक्टर ने बताया कि वेंटिलेटर न होने की वजह से कई बार क्रिटिकल मरीज को पीजीआई भेजना पड़ता है। मगर यदि कई मरीजों को एक बार में संभालने वाला कोई वेंटिलेटर बनता है तो निसंदेह यह उपकरण क्रिटिकल मरीजों के लिए एक वरदान से कम साबित नहीं होगा।
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सिर्फ चार लाख में तैयार होगा पूरा सिस्टम
डीआरडीओ सोसायटी फॉर बायोमेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोग्राम के तहत इस पर काम कर रहा है डिफेंस बायोइंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रो मेडिकल लैबोरेट्री (डीआरडीओ के अधीनस्थ लैब) के सहयोग से इस योजना पर काम चल रहा है। अमूमन एक वेंटिलेटर की कीमत 5 से 15 लाख के बीच होती है।
यह वेंटीलेटर एक बार में एक ही मरीज पर काम करता है। मगर एक साथ कई मरीजों पर काम करने वाले इस मल्टी पेशेंट वेंटीलेटर का पूरा सिस्टम सिर्फ 4 लाख में तैयार किया जाएगा और यही इसकी लागत भी होगी। इसकी एक और खास बात यह है कि इस वेंटीलेटर के तमाम कल-पुर्जे भी स्वदेशी होंगे और इसे पूरी तरह यही तैयार किया जाएगा।
बिना मरीज के संपर्क में आए लिए जा सकेंगे सैंपल
डीआरडीओ के अधीनस्थ अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) हैदराबाद के सहयोग से एक ऐसा कैबिन तैयार किया गया है। जिसके जरिये किसी भी डॉक्टर को संदिग्ध या संक्रमित मरीज के संपर्क में आए बिना ही उसके सैंपल लिए जा सकते हैं। इसे कोविड नमूना संग्रह कियोस्क का नाम दिया गया है।
इसमें मरीज को इस कियोस्कनुमा केबिन में भेजा जाता है और डॉक्टर स्वास्थ्यकर्मी कोविड जांच के लिए कियोस्क के अंदर आने वाले व्यक्ति का बाहर से ही दस्ताने के माध्यम से एक फोहे में नाक या मुंह से सैंपल या स्वेब ले सकता है। इस कियोस्क को तैयार कर डीआरडीओ ने गत दिवस लांच कर दिया है।
लगभग एक लाख में तैयार खास तरह का यह केबिन कोविड अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ को संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रखने में कारगर साबित होगा। कैबिन में चार नोजल स्प्रेयर लगाए गए हैं। जो 70 सेकंड तक धुआं छोड़ेंगे। उसके बाद केबिन में पानी की बौछार होगी।
कुल मिलाकर 2 मिनट में यह केबिन अगले मरीज के लिए पूरी तरह कीटाणुरहित बन जाएगा। इसमें कीटाणु शोधन के लिए यह उपकरण लगाए गए। सैन्य अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ के लिए भी यह खास तरह का कियोस्क लाभकारी साबित होगा।
यह वेंटीलेटर एक बार में एक ही मरीज पर काम करता है। मगर एक साथ कई मरीजों पर काम करने वाले इस मल्टी पेशेंट वेंटीलेटर का पूरा सिस्टम सिर्फ 4 लाख में तैयार किया जाएगा और यही इसकी लागत भी होगी। इसकी एक और खास बात यह है कि इस वेंटीलेटर के तमाम कल-पुर्जे भी स्वदेशी होंगे और इसे पूरी तरह यही तैयार किया जाएगा।
बिना मरीज के संपर्क में आए लिए जा सकेंगे सैंपल
डीआरडीओ के अधीनस्थ अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) हैदराबाद के सहयोग से एक ऐसा कैबिन तैयार किया गया है। जिसके जरिये किसी भी डॉक्टर को संदिग्ध या संक्रमित मरीज के संपर्क में आए बिना ही उसके सैंपल लिए जा सकते हैं। इसे कोविड नमूना संग्रह कियोस्क का नाम दिया गया है।
इसमें मरीज को इस कियोस्कनुमा केबिन में भेजा जाता है और डॉक्टर स्वास्थ्यकर्मी कोविड जांच के लिए कियोस्क के अंदर आने वाले व्यक्ति का बाहर से ही दस्ताने के माध्यम से एक फोहे में नाक या मुंह से सैंपल या स्वेब ले सकता है। इस कियोस्क को तैयार कर डीआरडीओ ने गत दिवस लांच कर दिया है।
लगभग एक लाख में तैयार खास तरह का यह केबिन कोविड अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ को संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रखने में कारगर साबित होगा। कैबिन में चार नोजल स्प्रेयर लगाए गए हैं। जो 70 सेकंड तक धुआं छोड़ेंगे। उसके बाद केबिन में पानी की बौछार होगी।
कुल मिलाकर 2 मिनट में यह केबिन अगले मरीज के लिए पूरी तरह कीटाणुरहित बन जाएगा। इसमें कीटाणु शोधन के लिए यह उपकरण लगाए गए। सैन्य अस्पतालों के डॉक्टर और स्टाफ के लिए भी यह खास तरह का कियोस्क लाभकारी साबित होगा।