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बुलंद इरादे: हर कठिनाई को पीछे छोड़ निषाद ने पैरालंपिक में जीता रजत, पंचकूला में ली ट्रेनिंग आई काम

Mon, 30 Aug 2021 02:23 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 30 Aug 2021 02:23 AM IST
सार

निषाद कुमार आठ साल के थे, जब चारा काटते समय मशीन में उनका हाथ कट गया। हाथ कटने के बाद भी वह निराश नहीं हुए। उन्होंने कड़ी मेहनत की। ऊंची कूद का शौक उन्हें बचपन से था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।

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Nishad Kumar won silver medal in high jump at Tokyo Paralympics  
कोच नसीम के साथ निषाद कुमार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इरादे बुलंद हों और मार्गदर्शन करने वाला कुशल तो सफलता कदम चूमती ही है। पंचकूला के खिलाड़ी निषाद कुमार ने रविवार को टोक्यो पैरालंपिक में टी-47 कैटेगरी में ऊंची कूद में 2.06 मीटर के साथ न केवल रजत पदक जीता बल्कि एशियन रिकॉर्ड भी बना दिया। मूल रूप से ऊना (हिमाचल प्रदेश) के गांव बदायूं निवासी निषाद को ताऊ देवीलाल स्टेडियम में वरिष्ठ एथलेटिक्स कोच नसीम अहमद ने प्रशिक्षण देकर निखारा है।

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निषाद की सफलता से कोच नसीम बेहद खुश हैं। उन्होंने बीते दिनों को याद करते हुए बताया कि 2017 में निषाद प्रशिक्षण के लिए ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आया था। उस समय पंचकूला की खेल नर्सरी बंद थी, लेकिन निषाद की लगन को देखते हुए उसे एथलेटिक्स में ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। निषाद की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। उन्होंने खुद और अपने दोस्तों से उसके लिए हर महीने दस हजार रुपये का इंतजाम किया ताकि उसकी खुराक और तैयारी में कोई कमी न रह जाए।

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एक साल के अभ्यास में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गाड़े झंडे

नसीम ने बताया कि 2018 पंचकूला में ही आयोजित पैरालंपिक नेशनल चैंपियनशिप में निषाद ने दूसरा स्थान हासिल किया। वह महज एक साल में 1.40 मीटर से 1.86 मीटर तक पहुंच गया। इसके बाद क्लासिफिकेशन के लिए उसे 2018 में ही दुबई में आयोजित एक विश्व स्तरीय गेम्स में हिस्सा लेने भेजा, लेकिन आर्थिक तंगी बाधा बन गई। कुल खर्चा 40 हजार रुपये था जबकि उसे घर से मात्र 10 हजार रुपये ही मिल पाए।

उसकी प्रतिभा को देखते हुए कोच नसीम ने ही अपने दोस्तों की मदद से बाकी रकम का इंतजाम किया और निषाद को दुबई भेज दिया। यहां उसे क्लासिफिकेशन में टी-47 कैटेगरी मिली और आठ से दस लाख रुपये की इनामी राशि भी। इसके बाद 2019 में दुबई में पैरा वर्ल्ड ग्रैंड सिक्स प्रतियोगिता, जिसमें 152 देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया था, में निषाद ने कांस्य जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इसी प्रदर्शन के आधार पर उसने वर्ष 2020 पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया। 2019 में ही निषाद का भारतीय शिविर में चयन हो गया था। बंगलूरू में कोच सत्यनारायण की देखरेख में उसने कोचिंग ली।

चारा काटते समय मशीन में कट गया था हाथ

निषाद कुमार आठ साल के थे, जब चारा काटते समय मशीन में उनका हाथ कट गया। हाथ कटने के बाद भी वह निराश नहीं हुए। उन्होंने कड़ी मेहनत की। ऊंची कूद का शौक उन्हें बचपन से था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पिता रछपाल सिंह किसान हैं, जबकि माता पुष्पा देवी गृहिणी हैं। वह 2500 रुपये घर से लेकर आए थे। कई तरह की परेशानियां झेलीं। कोच नसीम अहमद और विक्रम चौधरी ने उनकी मदद की। रहने और खाने की व्यवस्था के बाद स्टेडियम में दिन रात जी तोड़ मेहनत की। इसी का नतीजा है कि आज निषाद ने कीर्तिमान रच दिया है।

टीवी पर पिता ने देखा होनहार बेटे का कमाल
गांव बदायूं में निषाद के पिता रछपाल सिंह, माता पुष्पा देवी और बहन रमा देवी सहित अन्य शुभचिंतक डीडी स्पोर्ट्स पर नजरें लगाए बैठे थे। जैसे ही निषाद ने 2.06 मीटर की ऊंची कूद के साथ सिल्वर मेडल पक्का कर लिया, पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।

पीएम मोदी ने दी बधाई
निषाद के रजत पदक जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह एक असाधारण एथलीट हैं, मैं इससे बहुत खुश हूं।
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