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हरियाणा : सीएम विंडो और ट्वीटर पर आ रही पुलिस की अधिक शिकायतें
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चंडीगढ़। सीएम विंडो और सीएम के ट्वीटर हैंडल पर पुलिस से संबंधित अधिक शिकायतें आ रही हैं। इनको गंभीरता से लेते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि रैंडम पद्धति अपनाकर सप्ताह में कम से कम 100 शिकायतों का समाधान कर कर मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित करें।
मुख्यमंत्री के ओएसडी व निगरानी अधिकारी भूपेश्वर दयाल ने बताया कि पुलिस विभाग से संबंधित कई तरह की शिकायतों की अधिकता को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इनका रास्ता निकालने की पहल की है। हालांकि, डीएसपी व एसपी स्तर पर ऐसी शिकायतों का समाधान किया जाता है। कई मामलों में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी की गई है। यहां तक कि महेन्द्रगढ़ में गलत गाड़ी नंबर का चालान भेजने को ठीक किया गया और गुरुग्राम में गलत पार्किंग की गई कार पर पुलिस विभाग चिन्ह अंकित होने की शिकायत पर गाड़ी की आरसी से उसके घर का पता लगाकर चालान किया गया।
ओएसडी के अनुसार शिकायत की प्रकृति के अनुसार लाल, संतरी और हरी तीन श्रेणियों की रेटिंग की जाती है। ज्यादा गंभीर शिकायतों को लाल श्रेणी में रखा जाता है। साथ ही इन शिकायतों पर तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कड़ा संज्ञान रहता है और समय-समय पर समीक्षा कर इन शिकायतों का फीडबैक लेते हैं।
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एडीसी से मांगा स्पष्टीकरण
ओएसडी ने बताया कि सफीदों, जींद के एक मामले में तो मुख्यमंत्री ने स्वयं अतिरिक्त उपायुक्त से स्पष्टीकरण भी मांगा है और इसी मामले में सीएम विंडो पर कार्य कर रहे एक कर्मचारी की भूमिका संदेहास्पद के चलते उसको तुरंत कार्यभार मुक्त किया गया है।
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मुख्यमंत्री के ओएसडी व निगरानी अधिकारी भूपेश्वर दयाल ने बताया कि पुलिस विभाग से संबंधित कई तरह की शिकायतों की अधिकता को देखते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इनका रास्ता निकालने की पहल की है। हालांकि, डीएसपी व एसपी स्तर पर ऐसी शिकायतों का समाधान किया जाता है। कई मामलों में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी की गई है। यहां तक कि महेन्द्रगढ़ में गलत गाड़ी नंबर का चालान भेजने को ठीक किया गया और गुरुग्राम में गलत पार्किंग की गई कार पर पुलिस विभाग चिन्ह अंकित होने की शिकायत पर गाड़ी की आरसी से उसके घर का पता लगाकर चालान किया गया।
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ओएसडी के अनुसार शिकायत की प्रकृति के अनुसार लाल, संतरी और हरी तीन श्रेणियों की रेटिंग की जाती है। ज्यादा गंभीर शिकायतों को लाल श्रेणी में रखा जाता है। साथ ही इन शिकायतों पर तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कड़ा संज्ञान रहता है और समय-समय पर समीक्षा कर इन शिकायतों का फीडबैक लेते हैं।
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एडीसी से मांगा स्पष्टीकरण
ओएसडी ने बताया कि सफीदों, जींद के एक मामले में तो मुख्यमंत्री ने स्वयं अतिरिक्त उपायुक्त से स्पष्टीकरण भी मांगा है और इसी मामले में सीएम विंडो पर कार्य कर रहे एक कर्मचारी की भूमिका संदेहास्पद के चलते उसको तुरंत कार्यभार मुक्त किया गया है।