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Panchkula News: मनोचिकित्सकीय दवाओं का हिसाब नहीं दे सके तो मेडिकल स्टोर का लाइसेंस होगा रद्द

Wed, 02 Sep 2026 11:31 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:31 PM IST
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Medical store license to be cancelled if unable to account for psychiatric medicines.
पंजाब सरकार की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई मुहर
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बिक्री नहीं की थी, केवल स्टॉक में रखने की दलील भी नहीं आई काम
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मेडिकल स्टोर संचालक को राहत देने से इन्कार किया है। यह मामला बिना हिसाब-किताब रखी गई मनोचिकित्सीय दवाओं से संबंधित था। अदालत ने मेडिकल स्टोर के दोनों खुदरा दवा लाइसेंस रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा।
जस्टिस कुलदीप तिवारी ने संगरूर के मेसर्स हरमन मेडिकल स्टोर के मालिक अंगरेज सिंह की याचिका खारिज की। अदालत ने स्पष्ट किया कि लाइसेंसधारी दवा विक्रेता परिसर में ऐसी दवाएं नहीं रख सकता। इन दवाओं का वैध खरीद रिकॉर्ड या रजिस्टर में विवरण उपलब्ध होना चाहिए। केवल यह कहना कि दवाएं बेची नहीं गई थीं जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं बन सकता।
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दवा विक्रेता के लिए बिक्री रिकॉर्ड के साथ स्टॉक का पूरा हिसाब रखना भी अनिवार्य है। याचिकाकर्ता को अक्तूबर 2024 में दो खुदरा दवा लाइसेंस जारी किए गए थे। करीब आठ महीने बाद दवा निरीक्षण में कई गंभीर कमियां सामने आईं।
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निरीक्षण में मिलीं कमियां :

निरीक्षण के दौरान ऐसी चिकित्सकीय नमूना दवाएं मिलीं जिन पर बिक्री के लिए नहीं लिखा था। इन्हें मादक पदार्थ एवं मनोचिकित्सीय पदार्थ कानून के तहत मनोचिकित्सीय पदार्थ माना जाता है। इन कमियों को देखते हुए लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर दोनों लाइसेंस रद्द कर दिए गए। संचालक की वैधानिक अपील भी खारिज हो गई थी। अदालत ने कहा कि पर्चे वाली दवाओं का स्टॉक व्यवस्थित तरीके से दर्ज होना चाहिए। उनके साथ खरीद संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध होने चाहिए।




याचिकाकर्ता का पिछला रिकॉर्ड :

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि को सजा की कठोरता के सवाल पर महत्वपूर्ण माना। अदालत ने पाया कि लाइसेंस मिलने के करीब आठ महीने बाद ही निरीक्षण हुआ था। अंगरेज सिंह पहले भी मादक पदार्थ एवं मनोचिकित्सीय पदार्थ कानून के तहत दो मामलों में दोषी ठहराए जा चुके थे। दोनों मामलों में औषधीय दवाओं की बरामदगी शामिल थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने लाइसेंस रद्द करने के आदेश में कोई कानूनी कमी नहीं पाई।
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