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छात्रों के काम नहीं आ रही भारतीय दूतावास की अस्पष्ट सलाह : मान

Thu, 03 Mar 2022 01:53 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 01:53 AM IST
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Indian Embassy's vague advice not working for students: Mann
चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और सांसद भगवंत मान ने खारकीव में भारतीय छात्र नवीन शेखरप्पा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि युद्ध ग्रस्त यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए भारतीय दूतावास की अस्पष्ट सलाह किसी काम की नहीं है।
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उन्होंने कहा कि दूतावास की अस्पष्ट सलाह और मोदी सरकार का ढुलमुल रवैया वहां फंसे छात्रों को महंगा पड़ रहा है। यह समय वाहवाही और राजनीति करने का नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों को जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करना चाहिए और फंसे छात्रों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों की सीमाओं तक पहुंचने के लिए स्पष्ट सुझाव और साधन उपलब्ध कराने चाहिए। यूक्रेन के पूर्वी हिस्सों में फंसे छात्रों के लिए पश्चिमी सीमाओं तक पहुंचना असंभव है। खारकीव और सूमी जैसे शहर रूसी सीमा के पास हैं, इसलिए भारत सरकार रूस से आग्रह करके छात्रों को निकालने के लिए ठोस रास्ता निकाले। मान ने कहा कि फंसे छात्रों को बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें भूखे रहना पड़ रहा है। छात्रों को रोमानिया, पोलैंड, हंगरी और स्लोवाकिया की सीमाओं तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है।
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मान ने कहा कि ऐसे विकट संकट के समय प्रधानमंत्री मोदी को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रचार छोड़कर अपना पूरा ध्यान यूक्रेन में फंसे छात्रों को वापस लाने पर लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी युद्ध शुरू होने और रूसी आक्रमण के पहले से ही केंद्र सरकार से भारतीय छात्रों को मुफ्त और सुरक्षित निकालने की अपील करती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के सभी बड़े नेता इस मुद्दे का हल करने के बजाय यूपी विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं। भाजपा नेताओं ने 20,000 छात्रों के जीवन को दांव पर लगाकर चुनाव को प्राथमिकता दी। आप नेता ने कहा कि भारतीय छात्रों के लिए यूक्रेन छोड़ने की पहली एडवाइजरी भी बहुत देर से आई। फिर निजी विमानन कंपनियों ने किराया 3 गुना बढ़ा दिया, लेकिन मोदी सरकार आंख मूंदे रही। जब मामला हाथ से बाहर हो गया तो वाहवाही बटोरने के लिए मोदी सरकार निकासी मुहिम को ‘मिशन गंगा’ नाम देकर इसका राजनीतिक फायदा उठाने में लग गई।
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