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मानवाधिकार आयोग को आदेश का नहीं केवल सिफारिश का अधिकार: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग की ओर से जालंधर के चार पुलिस अधिकारियों और एक अन्य याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि मानवाधिकार आयोग की भूमिका केवल सिफारिशें करने तक सीमित है जबकि आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्यकारी अधिकारियों को सीधे आदेश जारी कर दिए।
चार पुलिसकर्मी समेत एक अन्य याचिकाकर्ता ने मानवाधिकार आयोग के 13 अक्तूबर को जारी आदेश को चुनौती दी थी। आयोग ने अपने आदेश में कहा था कि जालंधर पुलिस कमिश्नर इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह सेखों (पूर्व एचएचओ, थाना डिविजन नंबर-3), एएसआई सतनाम सिंह, एएसआई मक्खन सिंह, कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह व हरसिमरनजीत सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करें और अगली सुनवाई से एक सप्ताह पूर्व एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा कराएं।
हाईकोर्ट ने कहा कि आयोग केवल जांच कर राज्य सरकार को सुझाव दे सकता है और निर्णय लेना सरकार का अधिकार है। सरकार के निर्णय से असहमति होने पर आयोग हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट आ सकता है और सीधे आदेश थोपना कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने ऐसे में आयोग के आदेश पर रोक लगाते हुए इस याचिका पर पंजाब सरकार को अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है।
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चार पुलिसकर्मी समेत एक अन्य याचिकाकर्ता ने मानवाधिकार आयोग के 13 अक्तूबर को जारी आदेश को चुनौती दी थी। आयोग ने अपने आदेश में कहा था कि जालंधर पुलिस कमिश्नर इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह सेखों (पूर्व एचएचओ, थाना डिविजन नंबर-3), एएसआई सतनाम सिंह, एएसआई मक्खन सिंह, कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह व हरसिमरनजीत सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करें और अगली सुनवाई से एक सप्ताह पूर्व एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा कराएं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि आयोग केवल जांच कर राज्य सरकार को सुझाव दे सकता है और निर्णय लेना सरकार का अधिकार है। सरकार के निर्णय से असहमति होने पर आयोग हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट आ सकता है और सीधे आदेश थोपना कानून के खिलाफ है। कोर्ट ने ऐसे में आयोग के आदेश पर रोक लगाते हुए इस याचिका पर पंजाब सरकार को अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है।
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