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Panchkula News: बुजुर्ग पिता की देखभाल न करने पर बेटे के नाम संपत्ति हस्तांतरण रद्द, हाईकोर्ट का फैसला

Fri, 18 Sep 2026 08:52 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 08:52 PM IST
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High Court rules to cancel property transfer to son for failing to care for elderly father.
अदालत ने कहा- संपत्ति देते समय देखभाल की शर्त केवल दस्तावेज के शब्दों से नहीं, पूरे मामले की परिस्थितियों से तय होगी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुजुर्ग पिता द्वारा बेटे के नाम की गई संपत्ति का हस्तांतरण रद्द करने का आदेश बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि माता-पिता की देखभाल की शर्त केवल दस्तावेज के शब्दों तक सीमित नहीं है। इसके लिए पूरे मामले की परिस्थितियों और पक्षकारों की दलीलों को देखा जा सकता है।
यह मामला जालंधर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक कारखाना शेड से जुड़ा है। पिता ने यह संपत्ति वर्ष 2008 में हासिल की थी। जुलाई 2017 में उन्होंने पंजीकृत दस्तावेज के जरिये इसे अपने बेटे के नाम कर दिया। पिता का आरोप था कि बेटे ने देखभाल का भरोसा दिलाया था। संपत्ति हस्तांतरण के बाद बेटे ने माता-पिता की देखभाल नहीं की।
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पिता के आरोप :
पिता ने दावा किया कि बेटे ने संपत्ति उसके नाम करने के बाद देखभाल का वादा किया था। हालांकि, बेटे ने माता-पिता की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी नहीं कीं। संपत्ति हस्तांतरण के बाद उसका व्यवहार बदल गया। पिता को सितंबर 2020 में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, पर बेटे ने देखभाल नहीं की। अंततः पिता को वृद्धाश्रम में रहना पड़ा।
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हाईकोर्ट का फैसला :
बेटे ने संपत्ति हस्तांतरण रद्द करने के उपमंडल अधिकारी और उपायुक्त के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि दस्तावेज में देखभाल की कोई स्पष्ट शर्त नहीं थी। न्यायमूर्ति कीर्ति सिंह ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 का उद्देश्य बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि पूरे लेनदेन और परिस्थितियों को देखना जरूरी है, केवल दस्तावेज के शब्दों को नहीं। इसके बाद अदालत ने बेटे की याचिका खारिज कर दी।
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