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शंभू व खनौरी बॉर्डर के नुकसान का मुआवजा देने से सरकार का इन्कार : पंधेर
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने बुधवार को किसानों की मांग को लेकर किसान मजदूर मोर्चा के साथ बैठक करनी थी लेकिन मोर्चे का आरोप है कि बैठक में सरकार की तरफ से कोई नहीं पहुंचा जिस कारण बैठक नहीं हो पाई। अब मोर्चे ने अपनी बैठक करके आगे बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है जिसका एलान वीरवार को किया जाएगा।
मोर्चे के नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि पहले 30 दिसंबर और फिर 7 जनवरी के लिए उनको सरकार की तरफ से बैठक का न्योता आया था। बुधवार को जब वह बैठक के लिए पंजाब भवन पहुंचे तो वहां पर सरकार की तरफ से कोई मौजूद नहीं था। इस तरह बिना सूचना बैठक को रद्द करना गलत है। जब उन्होंने इसे लेकर राज्य सरकार के अधिकारियों से संपर्क किया तो इसके बाद ही मौके पर अधिकारी पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने शंभू व खनौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान की भरपाई की उनकी मांग को पूरा करने से सिरे से नकार दिया है।
पंधेर ने कहा कि हालांकि बिजली संशोधन बिल पर राज्य सरकार के विरोध, बाढ़ से हुए नुकसान और शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा देने पर कहा है कि सरकार किसानों के साथ है। पंधेर ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान और शहीद किसानों को मुआवजा देने के संबंध में सरकार ने फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। साथ ही बिजली संशोधन बिल के विरोध में सूबा सरकार की तरफ से केंद्र को लिखा गया पत्र भी उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। यही कारण है कि मोर्चे ने आगे आंदोलन करने का फैसला लिया है।
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इससे पहले मोर्चे ने रेल रोको आंदोलन शुरू करने का एलान लिया था लेकिन सरकार के आश्वासन के बाद ही इसे स्थगित कर दिया गया था। मोर्चे का दावा है कि शंभू व खनौरी दोनों बॉर्डर पर पूरा गांव बसाया गया था और सरकार के मोर्चे को हटाने के दौरान उनका भारी नुकसान हुआ था। सिर्फ शंभू बॉर्डर पर ही करीब 3.77 करोड़ रुपये का उनका नुकसान हुआ हैं। साथ ही मोर्चा बिजली, बीज बिल को भी विधानसभा में प्रस्ताव लाकर रद्द करने की मांग कर रहा है।
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मोर्चे के नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि पहले 30 दिसंबर और फिर 7 जनवरी के लिए उनको सरकार की तरफ से बैठक का न्योता आया था। बुधवार को जब वह बैठक के लिए पंजाब भवन पहुंचे तो वहां पर सरकार की तरफ से कोई मौजूद नहीं था। इस तरह बिना सूचना बैठक को रद्द करना गलत है। जब उन्होंने इसे लेकर राज्य सरकार के अधिकारियों से संपर्क किया तो इसके बाद ही मौके पर अधिकारी पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने शंभू व खनौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान की भरपाई की उनकी मांग को पूरा करने से सिरे से नकार दिया है।
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पंधेर ने कहा कि हालांकि बिजली संशोधन बिल पर राज्य सरकार के विरोध, बाढ़ से हुए नुकसान और शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा देने पर कहा है कि सरकार किसानों के साथ है। पंधेर ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान और शहीद किसानों को मुआवजा देने के संबंध में सरकार ने फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। साथ ही बिजली संशोधन बिल के विरोध में सूबा सरकार की तरफ से केंद्र को लिखा गया पत्र भी उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। यही कारण है कि मोर्चे ने आगे आंदोलन करने का फैसला लिया है।
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इससे पहले मोर्चे ने रेल रोको आंदोलन शुरू करने का एलान लिया था लेकिन सरकार के आश्वासन के बाद ही इसे स्थगित कर दिया गया था। मोर्चे का दावा है कि शंभू व खनौरी दोनों बॉर्डर पर पूरा गांव बसाया गया था और सरकार के मोर्चे को हटाने के दौरान उनका भारी नुकसान हुआ था। सिर्फ शंभू बॉर्डर पर ही करीब 3.77 करोड़ रुपये का उनका नुकसान हुआ हैं। साथ ही मोर्चा बिजली, बीज बिल को भी विधानसभा में प्रस्ताव लाकर रद्द करने की मांग कर रहा है।