{"_id":"6389126962d2e203e457b913","slug":"fsl-report-is-the-basis-of-prosecution-in-ndps-cases-high-court-panchkula-news-pkl470064354","type":"story","status":"publish","title_hn":"Highcourt News: एनडीपीएस के आरोपी को जमानत, हाईकोर्ट ने कहा-FSL की रिपोर्ट अभियोजन का आधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Highcourt News: एनडीपीएस के आरोपी को जमानत, हाईकोर्ट ने कहा-FSL की रिपोर्ट अभियोजन का आधार
Fri, 02 Dec 2022 09:00 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2022 09:00 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस का मामला अन्य अपराधों से अलग होता है क्योंकि इसमे जब्त की गई सामग्री असल में नशा है भी या नहीं यह जानना बेहद जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना चालान अधूरा होता है।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
विस्तार
एनडीपीएस मामले में आरोपी को डिफाल्ट जमानत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि एफएसएल(फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) की रिपोर्ट अभियोजन का आधार होती है। इसके अभाव में अभियोजन का केस धराशायी हो जाता है क्योंकि एफएसएल के अभाव में चार्जशीट को पूरा नहीं माना जा सकता।
फतेहाबाद के रतिया निवासी मुकेश पाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उसके खिलाफ 9 फरवरी 2022 को एनडीपीएस केस में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप के अनुसार उससे 15 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट को तो दाखिल कर दी लेकिन एफएसएल की रिपोर्ट साथ नहीं लगाई। नियम के अनुसार 60 दिन के भीतर चालान दाखिल करना जरूरी होता है।
याची ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट के अभाव में अभियोजन कैसे कह सकता है कि बरामद सामग्री नशा है। याची ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने बिना एफएसएल रिपोर्ट के चालान को स्वीकार कर लिया जो गलत है। कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस का मामला अन्य अपराधों से अलग होता है क्योंकि इसमे जब्त की गई सामग्री असल में नशा है भी या नहीं यह जानना बेहद जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना चालान अधूरा होता है। याची के मामले में पुलिस ने एफएसएल की रिपोर्ट चालान के साथ पेश नहीं की और ऐसे में याची जमानत का हकदार है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची को नियमित जमानत दे दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहाबाद के रतिया निवासी मुकेश पाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उसके खिलाफ 9 फरवरी 2022 को एनडीपीएस केस में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप के अनुसार उससे 15 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट को तो दाखिल कर दी लेकिन एफएसएल की रिपोर्ट साथ नहीं लगाई। नियम के अनुसार 60 दिन के भीतर चालान दाखिल करना जरूरी होता है।
विज्ञापन
याची ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट के अभाव में अभियोजन कैसे कह सकता है कि बरामद सामग्री नशा है। याची ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने बिना एफएसएल रिपोर्ट के चालान को स्वीकार कर लिया जो गलत है। कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस का मामला अन्य अपराधों से अलग होता है क्योंकि इसमे जब्त की गई सामग्री असल में नशा है भी या नहीं यह जानना बेहद जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना चालान अधूरा होता है। याची के मामले में पुलिस ने एफएसएल की रिपोर्ट चालान के साथ पेश नहीं की और ऐसे में याची जमानत का हकदार है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याची को नियमित जमानत दे दी है।
विज्ञापन