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Panchkula News: 14 साल पुराने ठगी मामले में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर समेत चार बरी
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पुलिस नौकरी और जमीन विवाद सुलझाने के नाम पर ठगी का था आरोप
गवाहों के मुकरने से अभियोजन पक्ष नहीं साबित कर सका मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पुलिस में नौकरी लगवाने और जमीन विवाद सुलझाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी के 14 साल पुराने मामले में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर समेत चार आरोपियों को अदालत से राहत मिली है। पंचकूला अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर तरसेम सिंह राणा सहित चारों आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
बरी किए गए आरोपियों में तरसेम सिंह राणा के अलावा नरेश कुमार, रविंदर कुमार और स्वर्ण सिंह शामिल हैं। यह मामला वर्ष 2012 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें ठगी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, प्रतिरूपण और आर्म्स एक्ट सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
2018 के फैसले के खिलाफ दायर की थी अपील
ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2018 में मामले में आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद आरोपियों ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले के प्रमुख गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए, जिससे अभियोजन पक्ष का पक्ष कमजोर हो गया। अदालत ने पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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ऐसे सामने आया था मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2012 में सीआईए पंचकूला को सूचना मिली थी कि अमन कुमार नामक व्यक्ति खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर रहा है। पुलिस ने रामगढ़ चौक पर कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ा था। पुलिस के अनुसार, मौके से पुलिस की वर्दी, हथियार, फर्जी पहचान पत्र, लाल बत्ती और झंडा समेत अन्य सामान बरामद किया गया था। आरोप था कि स्वर्ण सिंह कार चला रहा था, जबकि रविंदर कुमार पुलिस की वर्दी पहनकर सुरक्षा गार्ड की भूमिका में था और नरेश कुमार भी कार में मौजूद था। हालांकि, अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका और चारों आरोपियों को राहत मिल गई।
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गवाहों के मुकरने से अभियोजन पक्ष नहीं साबित कर सका मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पुलिस में नौकरी लगवाने और जमीन विवाद सुलझाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी के 14 साल पुराने मामले में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर समेत चार आरोपियों को अदालत से राहत मिली है। पंचकूला अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर तरसेम सिंह राणा सहित चारों आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।
बरी किए गए आरोपियों में तरसेम सिंह राणा के अलावा नरेश कुमार, रविंदर कुमार और स्वर्ण सिंह शामिल हैं। यह मामला वर्ष 2012 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें ठगी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, प्रतिरूपण और आर्म्स एक्ट सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
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2018 के फैसले के खिलाफ दायर की थी अपील
ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2018 में मामले में आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद आरोपियों ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले के प्रमुख गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए, जिससे अभियोजन पक्ष का पक्ष कमजोर हो गया। अदालत ने पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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ऐसे सामने आया था मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2012 में सीआईए पंचकूला को सूचना मिली थी कि अमन कुमार नामक व्यक्ति खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर रहा है। पुलिस ने रामगढ़ चौक पर कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ा था। पुलिस के अनुसार, मौके से पुलिस की वर्दी, हथियार, फर्जी पहचान पत्र, लाल बत्ती और झंडा समेत अन्य सामान बरामद किया गया था। आरोप था कि स्वर्ण सिंह कार चला रहा था, जबकि रविंदर कुमार पुलिस की वर्दी पहनकर सुरक्षा गार्ड की भूमिका में था और नरेश कुमार भी कार में मौजूद था। हालांकि, अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका और चारों आरोपियों को राहत मिल गई।