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जहरीली गैस का असर : कैंसर, अस्थमा और चर्म रोग से ग्रस्त हो रहे किसान

Sat, 30 Oct 2021 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 30 Oct 2021 01:33 AM IST
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Effect of poisonous gas: Farmers suffering from cancer, asthma and skin diseases
पंचकूला। जहरीली गैस और केमिकल युक्त धुएं से बरवाला ब्लॉक के 25 गांवों में रहने वाले किसान और अन्य लोग कैंसर, अस्थमा और चर्म रोग जैसी बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं यह गैस और धुआं गांव के दुधारू पशुओं की सेहत पर भी बुरा प्रभाव डाल रही है। किसानों का कहना है कि गांव के पशुओं ने चारा खाना कम कर दिया है। इससे जो पशु पहले पांच से दस लीटर दूध देते थे, वह अब तीन से चार लीटर देने लगे हैं। इस तरह की बीमारी से सबसे ज्यादा पीड़ित गांव कामी और सुंदरपुर के लोग हैं।
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बरवाला ब्लॉक के गांव कामी के सरपंच विजेंद्र शर्मा का कहना है कि पंजाब की सीमा में सैकड़ों केमिकल की फैक्टरियां हैं। यह सप्ताह में दो बार ऐसी गैस छोड़ती हैं जो फसल को नष्ट करने के साथ लोगों की सेहत पर भी बुरा असर डाल रही हैं। पंजाब की सीमा से लगे पांच किलोमीटर के 25 गांवों के लोग काफी परेशान हैं। आज से एक साल पहले इस तरह की बीमारी से किसी भी गांव का व्यक्ति पीड़ित नहीं था। लेकिन, अब यह बीमारी धीरे-धीरे आम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि यही कारण है कि पंजाब के डेराबस्सी क्षेत्र के साथ लगते गांव के लोग भी लगातार केमिकल फैक्ट्रियों का विरोध कर रहे हैं। लेकिन, जैसे ही पंजाब के किसी गांव का कोई किसान आवाज उठाता है, फैक्टरी संचालक उसे मोटी रकम देकर चुप करवा देते हैं। जब विरोध का सिलसिला लगातार जारी रहा तो पंजाब प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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केमिकल से क्षेत्र का भूजल हो रहा दूषित
किसानों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में स्थापित होने वाली केमिकल फैक्ट्रियों के चलते भूजल भी दूषित हो रहा है। यही कारण है कि गांव के लोग तरह-तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। किसान बचन सिंह, सरदारा सिंह, लाभ सिंह ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले फैक्टरी के कर्मचारी केमिकल को टैंकर से रात में खेतों में गिराते थे, जिससे भूमि की उर्वरा क्षमता नष्ट हो गई। इसे रोकने के लिए उन्होंने कुछ दिन तक ठीकरी पहरा भी लगाया। इसके बाद फैक्टरी के कर्मचारियों ने पंजाब सीमा के जंगल में जेसीबी के सहारे गड्ढा खोदकर केमिकल उसमें दबाना शुरू कर दिया। इसके चलते कई गांव में भूजल का स्तर गिरने के साथ दू्िषत भी हो गया। किसानों ने मृदा और भूजल जांच की भी मांग की है। किसानों का कहना है कि पंजाब में स्थित फैक्ट्रियों की लापरवाही का खामियाजा हरियाणा के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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जहरीली गैस को लेकर किसानों ने किया मंथन
जहरीली गैस से प्रभावित पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्र के साथ लगते गांव कामी, सुंदर पुर, सुल्तानपुर, बरवाला, नग्गल, जलौली, बतौड़, रिहौड़, भगवानपुर, भरैली, बीड़ फिरौड़ी, मौजा, बीड़ बाबूपुर, सगराना, मट्टावाली के किसान शुक्रवार को गांव कामी में एकत्रित हुए। उन्होंने मंथन किया कि आगामी फसल को कैसे बचाया जा सकता है। इतना ही नहीं गांव के लोगों और पशुओं को कैसे निजात दिला सकते हैं। क्योंकि, जहरीली गैस से पांच किलोमीटर के अंदर स्थित 25 गांवों के किसानों की हजारों एकड़ में लगी फसल नष्ट हो गई है। गांव कामी में किसान बचन सिंह, सरदारा सिंह, लाभ सिंह, श्यामलाल, रजिंदर कुमार, सरपंच विजेंद्र शर्मा, योगेश्वर शर्मा, सियाराम, ठाकुरदास, भूषण शर्मा, बॉबी, प्रीतम सिंह, गुरनाम सिंह, धर्मवीर, कुलदीप, सुंदर सिंह, हरप्रीत सिंह विचार-विमर्श करने के लिए पहुंचे।
बीमारी से ग्रसित किसान
- जहरीली गैस के प्रभाव से अस्थमा से पीड़ित हैं। सांस लेने में बहुत ही परेशानी होती है। प्रशासन को इस तरफ विशेष ध्यान देने की जरूरत है। - भूपेंद्र सिंह, निवासी, गांव सुंदरपुर
- पंजाब सीमा में स्थापित फैक्ट्रियों द्वारा छोड़ी जा रही जहरीली गैस से उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। सप्ताह दो से तीन बार जहरीली गैस छोड़ी जाती है। जिससे उनको काफी परेशानी होती है। - मोहन लाल, गांव कामी निवासी
-जब रात के समय केमिकल फैक्ट्रियों द्वारा जहरीली गैस छोड़ी जाती है तो गांव का वातावरण दूषित हो जाता है। उन्हें परेशानी होती है। गैस से छोटे-छोटे बच्चे भी परेशान हो जाते हैं। - बुजुर्ग महिला निर्मला, गांव कामी निवासी

- जहरीली गैस से फसलें तो खराब हो रही हैं। उन्हें चर्म रोग की भी समस्या हो रही है। चेहरे और शरीर पर एलर्जी हो रही है। हालांकि वह डॉक्टरों के संपर्क में है, और इलाज करवा रहे हैं। - किसान सुभाष
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