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प्रवासी भारतीयों के खिलाफ बढ़ रहे आपराधिक मामले, इन्हें तुरंत रोकना जरूरी: हाईकोर्ट

Fri, 02 Feb 2024 03:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Feb 2024 03:33 AM IST
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Criminal cases against NRIs are increasing, it is necessary to stop them immediately: High Court
चंडीगढ़। धोखाधड़ी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए प्रवासी भारतीयों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि एनआरआई के खिलाफ तेजी से बढ़ते आपराधिक मामलों पर तुरंत लगाम लगाना जरूरी है।
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हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी शिव कुमार व सर्बजीत कौर ने 21 नवंबर, 2023 को आईपीसी की विभिन्न धाराओं में अग्रिम जमानत देने की अपील की थी। याचिका दाखिल करते हुए उन्होंने बताया कि जिस संपत्ति को लेकर विवाद है उसके सौदे के लिए उन्होंने 7 लाख रुपये का भुगतान एनआरआई प्यारा सिंह के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक बिक्रम सिंह किया था। इसके साथ ही यदि यह मान भी लिया जाए कि यह भुगतान नहीं किया गया तो भी यह सिविल विवाद है और एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
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शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि शिव कुमार व सर्बजीत कौर सहमति संबंध में प्यारा सिंह के मकान में 2011 से रह रहे थे। इसके लिए 2 हजार रुपये किराया तय हुआ था जिसका उन्होंने भुगतान नहीं किया। इसके बाद उन्हें मकान से निकालने के लिए 2016 से शिकायतकर्ता अदालतों के चक्कर लगा रहा था और अंतत: 2023 को मकान का कब्जा प्यारा सिंह के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के रूप में उसे सौंपा गया था। इसके बाद जून 2023 में फर्जी कागजों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने जबरन घर पर कब्जा कर लिया। एग्रीमेंट टू सेल पर शिकायतकर्ता के फर्जी हस्ताक्षर हैं और उसने याचिकाकर्ताओं से कोई पैसा नहीं लिया।
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सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिस किराएदार से लंबी कानूनी लड़ाई लड़ कर मकान खाली करवाया गया हो उसके तुरंत बाद उन्हें मकान बेचने के लिए एग्रीमेंट समझ के बाहर है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर से साफ इन्कार कर रहा है। भले ही याचिकाकर्ताओं से हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं हो तो भी यह अग्रिम जमानत का आधार नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि लगातार एनआरआई के खिलाफ अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है जो चिंता का विषय है और इसे तुरंत रोकना जरूरी है।
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