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वन विभाग के सहायक कर्मचारी के खिलाफ चालान दायर
Updated Sun, 16 Dec 2018 01:27 AM IST
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वन विभाग जूनियर सहायक के खिलाफ चालान दायर
खुड्डा अली शेर निवासी को केस दर्ज करने की धमकी देकर मांगे थे एक लाख रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विजिलेंस ने साढे़ तीन साल बाद वन विभाग के जूनियर सहायक के खिलाफ चालान दायर किया है। चालान में 7 गवाह और करीब 250 पेज शामिल हैं। इस मामले में विजिलेंस ने जूनियर सहायक के खिलाफ आईपीसी की धारा-7, 13(1)डी व 2 पीसी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
दायर चालान के अनुसार 29 जून, 2015 को खुड्डा अली शेर निवासी कल्याण सिंह ने विजिलेंस को वन विभाग के जूनियर सहायक अमृतपाल सिंह की ओर से रिश्वत मांगने की शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि पढ़ा-लिखा नहीं है। वह लकड़ी की टाल का काम करता था। वह सेक्टर-51 निवासी एक महिला से पेड़ लगे हुए प्लाट को किराए पर लिया हुआ था। 28 जून को वह कटे हुए पेड़ ले जा रहा था। इस दौरान एक काली गाड़ी में एक व्यक्ति आया, उसने खुद को अपना नाम अमृत पाल बताते हुए वन विभाग में कार्यरत बताया। उसने कहा कि उन्होंने जंगलों से पेड़ काटे हैं, इसकी शिकायत करेगा। शिकायत के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज होगा और कम से कम सात वर्ष की सजा होगी। अगर बचना चाहते हो तो उन्हें एक लाख रुपये देने होंगे। इसके बाद अमृतपाल उसका नंबर नोट कर वहां से चला गया। कुछ समय बाद अमृतपाल का फोन आया। उसने कहा कि वह एक लाख रुपये लेकर आ जाए। इतने पैसे न होने की बात कही तो 90 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। इशके साथ ही कहा कि अगर शाम तक रुपये लेकर नहीं आया तो वह उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा देगा। अमृतपाल शाम को उसके टाल में आया और पांच हजार रुपये लेकर चला गया। इसके बाद मामले की शिकायत विजिलेंस को दी गई। टीम ने 29 जून को टाल में ट्रैप लगाकर वन विभाग के जूनियर सहायक अमृतपाल को दस हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ काबू किया।
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खुड्डा अली शेर निवासी को केस दर्ज करने की धमकी देकर मांगे थे एक लाख रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विजिलेंस ने साढे़ तीन साल बाद वन विभाग के जूनियर सहायक के खिलाफ चालान दायर किया है। चालान में 7 गवाह और करीब 250 पेज शामिल हैं। इस मामले में विजिलेंस ने जूनियर सहायक के खिलाफ आईपीसी की धारा-7, 13(1)डी व 2 पीसी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
दायर चालान के अनुसार 29 जून, 2015 को खुड्डा अली शेर निवासी कल्याण सिंह ने विजिलेंस को वन विभाग के जूनियर सहायक अमृतपाल सिंह की ओर से रिश्वत मांगने की शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि पढ़ा-लिखा नहीं है। वह लकड़ी की टाल का काम करता था। वह सेक्टर-51 निवासी एक महिला से पेड़ लगे हुए प्लाट को किराए पर लिया हुआ था। 28 जून को वह कटे हुए पेड़ ले जा रहा था। इस दौरान एक काली गाड़ी में एक व्यक्ति आया, उसने खुद को अपना नाम अमृत पाल बताते हुए वन विभाग में कार्यरत बताया। उसने कहा कि उन्होंने जंगलों से पेड़ काटे हैं, इसकी शिकायत करेगा। शिकायत के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज होगा और कम से कम सात वर्ष की सजा होगी। अगर बचना चाहते हो तो उन्हें एक लाख रुपये देने होंगे। इसके बाद अमृतपाल उसका नंबर नोट कर वहां से चला गया। कुछ समय बाद अमृतपाल का फोन आया। उसने कहा कि वह एक लाख रुपये लेकर आ जाए। इतने पैसे न होने की बात कही तो 90 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। इशके साथ ही कहा कि अगर शाम तक रुपये लेकर नहीं आया तो वह उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा देगा। अमृतपाल शाम को उसके टाल में आया और पांच हजार रुपये लेकर चला गया। इसके बाद मामले की शिकायत विजिलेंस को दी गई। टीम ने 29 जून को टाल में ट्रैप लगाकर वन विभाग के जूनियर सहायक अमृतपाल को दस हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ काबू किया।
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