पीजीआई का कमालः देश के सबसे कम उम्र के नवजात ने किया अंगदान, व्यस्क को मिली किडनियां
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बिना पंख के जैसे फरिश्ते... हां ऐसे ही थे कुछ रिश्ते... एक तीन दिन के नवजात ने दुनिया से जाते हुए किसी अजनबी को नया जीवन देकर इन चंद लाइनों को चरितार्थ कर दिखाया है। पीजीआई ने 68.3 घंटे के नवजात का अंगदान कराकर देश में सबसे कम उम्र के अंगदाता का अंगदान कराने का रिकार्ड अपने नाम कर लिया है।
पटियाला निवासी एक दंपती ने अपने कलेजे के टुकड़े के दुनिया से जाने के बाद भी उसे दुनिया में जिंदा रखने के लिए पीजीआई रोटो के स्टाफ से खुद जाकर अंगदान कराने के लिए पहल की। इसके बाद उस नवजात का पीजीआई में बुधवार की रात अंगदान कराया गया। उस नवजात के अंगदान से मिली दोनों किडनी को एक 21 वर्षीय महिला में प्रत्यारोपित किया गया है।
पीजीआई में 1996 से शुरू हुए अंगदान के इतिहास में ये नवजात सबसे कम उम्र का अंगदाता बन गया है। नवजात की किडनी को वयस्क को प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया बेहद जटिल थी। पीजीआई डायरेक्टर डॉ. जगतराम का कहना है कि उस नन्हे फरिश्ते ने दुनिया में चंद घंटों के जीवन के दौरान ही अपने जन्म की सार्थकता सिद्ध कर दी।
पीजीआई को उस फरिश्ते के माता-पिता पर बेहद गर्व है जिन्होंने अपने दु:ख को दरकिनार कर दूसरे के जीवन में खुशियां फैलाने का निर्णय लिया। इस कार्य में पीजीआई के डॉक्टरों के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ का कार्य भी तारीफ के काबिल है। उन्होंने एक जटिल प्रक्रिया को करने की हामी भरी और उसे सफलतापूर्वक करके दिखाया है।
पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी डॉ. विपिन कौशल ने बताया कि पटियाला के एक निजी अस्पताल में इस बच्चे का जन्म रविवार को हुआ था। रविवार को ही दंपती अपने बेटे को लेकर पीजीआई ट्रामा सेंटर पहुंचे। नवजात का ब्रेन ठीक तरीके से विकसित नहीं हो पाया था। बुधवार की सुबह डॉक्टरों ने उन्हें बता दिया कि बच्चे को बचाना मुश्किल है।
बुधवार को ही उस नवजात को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसकी जानकारी होने पर उस दंपती ने ट्रामा सेंटर में ड्यूटी कर रहे रोटो के कर्मचारियों से संपर्ककिया और अपने बच्चे के अंगदान कराने की इच्छा जताई। उनका कहना था कि वे इस सूचना को गुप्त रखना चाहते हैं। उनके निर्देशानुसार उनके बच्चे का अंगदान कराया गया।
इससे पहले 11 माह के बच्चे का हुआ था अंगदान
तीन दिन के नवजात से पहले पीजीआई में 11 माह के नवजात का अंगदान कराए जाने का रिकार्ड था। वह बच्चा भी लड़का था। 2017 जुलाई में चंडीगढ़ के 11 माह के प्रीतम का पीजीआई में अंगदान कराया गया था। उसकी भी दोनों किडनी एक वयस्क को प्रत्यारोपित की गई थी।
आंखों में थे आंसू और नमन में झुके थे सिर
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस नवजात की बॉडी को परिजनों को सौंप दिया गया। वापस लौटते वक्त एंबुलेंस के बाहर पीजीआई रोटो के साथ ही ऑर्गन ट्रांसप्लांट की टीम उस नन्हे फरिश्ते को नमन कर रही थी। उनकी आंखों में आंसू और उस नन्हे फरिश्ते के परिजनों को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना साफ झलक रही थी।
ट्रांसप्लांट के लिए बच्चों के अंगों को पुनर्प्राप्त करना दुर्लभ है। ऐसे में अगर नवजात जन्मजात विसंगतियों वाला हो तो मामला और गंभीर होता है। ऐसे केस में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण दोनों ही प्रक्रियाएं बेहद जटिल होती हैं, लेकिन पीजीआई के विशेषज्ञों की टीम ने पैरामेडिकल के साथ मिलकर इस चुनौती को स्वीकार किया और सफलता प्राप्त की।
- डॉ. आशीष शर्मा, एचओडी, रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी, पीजीआई