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अलॉटी मनमानें तरीके से नहीं लगा सकेंगे पेड़
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के शहर में करीब 62 हजार अलॉटी हैं। ये अलॉटी अपने मकानों के आसपास पेड़ लगा लेते हैं, जिसकी वजह से बोर्ड को प्रतिमाह लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि हाउसिंग बोर्ड ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए अलॉटियों को पेड़ नहीं लगाने की हिदायत दी है। यदि कोई अलॉटी पेड़ लगाना चाहता है तो उसे बोर्ड से परमिशन लेनी होगी, उसके बाद ही अलॉटी पेड़ लगा सकता है।
सीएचबी के अफसरों का मानना है कि अलॉटी जहां चाहते हैं, वहीं पेड़ लगा देते हैं। ये पेड़ जब बड़े होने लगते हैं तो इनकी जड़े फैलने लगती हैं, जिससे पेड़ों के आसपास निकलने वाली पाइप लाइन या फिर सीवर की पाइप लाइनें फट जाती हैं। वहीं पेड़ों के साथ लगने वाले मकानों की दीवारें भी दरक जाती हैं। इसके बाद जहां अलॉटियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं बोर्ड को इनकी मरम्मत समय से पहले करानी पड़ती है।
बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने मकानों की हिफाजत को देखते हुए परमिशन पर ही पेड़ लगवाने का निर्णय लिया है। इससे लोगों को कई समस्याओं से राहत मिलेगी।
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बोर्ड की टीम देगी अनुमति
सीएचबी की ओर से साफ कहा गया है कि यदि किसी अलॉटी को मकान के आसपास पेड़ लगवाने हैं तो उसे चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को लेटर देना होगा। लेटर के आधार पर ही बोर्ड की एक टीम पहले मकान की जगह को देखेगी, उसके बाद बोर्ड यह तय करेगा कि यहां पर पेड़ लगाया जा सकता है या नहीं। टीम से रिपोर्ट मिलने के बाद ही पेड़ लगाने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
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सीएचबी के अफसरों का मानना है कि अलॉटी जहां चाहते हैं, वहीं पेड़ लगा देते हैं। ये पेड़ जब बड़े होने लगते हैं तो इनकी जड़े फैलने लगती हैं, जिससे पेड़ों के आसपास निकलने वाली पाइप लाइन या फिर सीवर की पाइप लाइनें फट जाती हैं। वहीं पेड़ों के साथ लगने वाले मकानों की दीवारें भी दरक जाती हैं। इसके बाद जहां अलॉटियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं बोर्ड को इनकी मरम्मत समय से पहले करानी पड़ती है।
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बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने मकानों की हिफाजत को देखते हुए परमिशन पर ही पेड़ लगवाने का निर्णय लिया है। इससे लोगों को कई समस्याओं से राहत मिलेगी।
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बोर्ड की टीम देगी अनुमति
सीएचबी की ओर से साफ कहा गया है कि यदि किसी अलॉटी को मकान के आसपास पेड़ लगवाने हैं तो उसे चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को लेटर देना होगा। लेटर के आधार पर ही बोर्ड की एक टीम पहले मकान की जगह को देखेगी, उसके बाद बोर्ड यह तय करेगा कि यहां पर पेड़ लगाया जा सकता है या नहीं। टीम से रिपोर्ट मिलने के बाद ही पेड़ लगाने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।