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आए थे नौकरी करने, बन गए संन्यासी
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चंडीगढ़। कभी नौकरी की तलाश में उत्तराखंड के देहरादून से आए एक युवा संन्यासी बन गए। संन्यासी के रूप में उनकी कर्मभूमि चंडीगढ़ रही। अब वे श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के अखिल भारतीय अध्यक्ष बन गए हैं। बात कर रहे हैं विष्णु महाराज की। अध्यक्ष बनने के बाद वे कोलकाता से पहली बार आठ सितंबर को चंडीगढ़ आ रहे हैं।
बात वर्ष 1982 की है। उत्तराखंड के देहरादून निवासी चंद्रशेखर नेगी (विष्णु महाराज) नौकरी की तलाश में अन्य युवाओं की तरह चंडीगढ़ में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए आए थे। वे सेक्टर-20 के श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में ठहरे। मठ में रह रहे संन्यासियों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
मठ के तत्कालीन इंचार्ज निष्किंचन महाराज रात ढाई बजे ही जगकर गाय की सेवा में जुट जाते थे। उस वक्त उनकी उम्र 60 वर्ष थी। दिन-रात उनकी मेहनत देखकर विष्णु महाराज का मन बदला और वे अपने घर नहीं लौटे। वे मठ की सेवा में लगे रहे। अध्यात्म में इतना रस आने लगा कि उन्होंने अपने पढ़ाई के सभी प्रमाणपत्रों को अग्नि के हवाले कर दिया था, ताकि फिर कभी नौकरी का मन में ख्याल न आए। उसके बाद वे संन्यासी बन गए। श्री चैतन्य गौड़ीय मठ सेक्टर-20 का इंचार्ज बनने के बाद अब वे अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के अध्यक्ष बन गए हैं।
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पुष्प वर्षा और शंख ध्वनि से होगा अभिनंदन
मठ के प्रवक्ता जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि 15 सितंबर को नामदान करेंगे और 17 सितंबर को 17 भक्तों को दीक्षा देंगे। 48 लोेगों ने हरिनाम दान के लिए नाम दर्ज कराया है। उनके स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। मठ में उनके स्वागत के लिए गेट बनाया गया है। उनका चंडीगढ़ पहुंचने पर पुष्प वर्षा और 21 शंखों की ध्वनि से भव्य अभिनंदन होगा। देशभर के विभिन्न प्रांतों में 26 मठ हैं। इसके अलावा अमेरिका, न्यूजीलैंड, जर्मनी और रूस व यूक्रेन सहित 12 देशों में शाखाएं हैं।
कोट...
बुधवार को चंडीगढ़ मठ में आगमन हो रहा है। नामदान के अलावा 17 भक्तों को दीक्षा दी जाएगी। 14 सितंबर को श्री राधा अष्टमी के कार्यक्रम में मठ में शामिल होंगे। खुशी है कि चंडीगढ़ आने का अवसर मिल रहा है।
-विष्णु महाराज, अध्यक्ष, अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ
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बात वर्ष 1982 की है। उत्तराखंड के देहरादून निवासी चंद्रशेखर नेगी (विष्णु महाराज) नौकरी की तलाश में अन्य युवाओं की तरह चंडीगढ़ में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए आए थे। वे सेक्टर-20 के श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में ठहरे। मठ में रह रहे संन्यासियों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
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मठ के तत्कालीन इंचार्ज निष्किंचन महाराज रात ढाई बजे ही जगकर गाय की सेवा में जुट जाते थे। उस वक्त उनकी उम्र 60 वर्ष थी। दिन-रात उनकी मेहनत देखकर विष्णु महाराज का मन बदला और वे अपने घर नहीं लौटे। वे मठ की सेवा में लगे रहे। अध्यात्म में इतना रस आने लगा कि उन्होंने अपने पढ़ाई के सभी प्रमाणपत्रों को अग्नि के हवाले कर दिया था, ताकि फिर कभी नौकरी का मन में ख्याल न आए। उसके बाद वे संन्यासी बन गए। श्री चैतन्य गौड़ीय मठ सेक्टर-20 का इंचार्ज बनने के बाद अब वे अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के अध्यक्ष बन गए हैं।
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पुष्प वर्षा और शंख ध्वनि से होगा अभिनंदन
मठ के प्रवक्ता जय प्रकाश गुप्ता ने बताया कि 15 सितंबर को नामदान करेंगे और 17 सितंबर को 17 भक्तों को दीक्षा देंगे। 48 लोेगों ने हरिनाम दान के लिए नाम दर्ज कराया है। उनके स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। मठ में उनके स्वागत के लिए गेट बनाया गया है। उनका चंडीगढ़ पहुंचने पर पुष्प वर्षा और 21 शंखों की ध्वनि से भव्य अभिनंदन होगा। देशभर के विभिन्न प्रांतों में 26 मठ हैं। इसके अलावा अमेरिका, न्यूजीलैंड, जर्मनी और रूस व यूक्रेन सहित 12 देशों में शाखाएं हैं।
कोट...
बुधवार को चंडीगढ़ मठ में आगमन हो रहा है। नामदान के अलावा 17 भक्तों को दीक्षा दी जाएगी। 14 सितंबर को श्री राधा अष्टमी के कार्यक्रम में मठ में शामिल होंगे। खुशी है कि चंडीगढ़ आने का अवसर मिल रहा है।
-विष्णु महाराज, अध्यक्ष, अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ