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Panchkula News: पंजाब में 22 सितंबर से बसों के चक्का जाम का एलान
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पनबस और पीरआरटीसी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने 22 सितंबर से राज्य भर में बसों का चक्का जाम करने का एलान किया है। यूनियन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया।
यूनियन का आरोप है कि सरकार ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और कर्मचारियों को पक्का करने में लगातार टाल-मटोल कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि सरकार के साढ़े चार साल से अधिक कार्यकाल में 60 से 65 बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। सब-कमेटी और कमेटियां बनाकर कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा है।
गिल ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदारों ने कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई अंशदान में करोड़ों का गबन किया है। प्रांतीय महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों और वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की ने विभाग पर निजी बसों को तरजीह देने का आरोप लगाया। नई बसें शामिल करने के बजाय किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को प्राथमिकता दी जा रही है। लगभग 800 सरकारी बसों को कंडम घोषित कर दिया गया है जिससे सरकारी बस सेवा की स्थिति खराब हुई है। इससे निजी ऑपरेटरों की मनमानी बढ़ रही है और युवाओं के रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं।
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यूनियन की मुख्य मांगें :
यूनियन के पदाधिकारियों ने अपनी अधूरी मांगों के बारे में बताया। बलजीत सिंह, जगजीत सिंह लिबरा और जतिंदर सिंह दीदारगढ़ ने बताया कि उनकी मांगों में कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को रद्द करना शामिल है। आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंध पर लाना भी एक प्रमुख मांग है।
यूनियन ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि 22 सितंबर तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो पूरे राज्य में बसों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने 22 सितंबर से राज्य भर में बसों का चक्का जाम करने का एलान किया है। यूनियन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया।
यूनियन का आरोप है कि सरकार ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और कर्मचारियों को पक्का करने में लगातार टाल-मटोल कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि सरकार के साढ़े चार साल से अधिक कार्यकाल में 60 से 65 बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। सब-कमेटी और कमेटियां बनाकर कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा है।
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गिल ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदारों ने कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई अंशदान में करोड़ों का गबन किया है। प्रांतीय महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों और वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की ने विभाग पर निजी बसों को तरजीह देने का आरोप लगाया। नई बसें शामिल करने के बजाय किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को प्राथमिकता दी जा रही है। लगभग 800 सरकारी बसों को कंडम घोषित कर दिया गया है जिससे सरकारी बस सेवा की स्थिति खराब हुई है। इससे निजी ऑपरेटरों की मनमानी बढ़ रही है और युवाओं के रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं।
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यूनियन की मुख्य मांगें :
यूनियन के पदाधिकारियों ने अपनी अधूरी मांगों के बारे में बताया। बलजीत सिंह, जगजीत सिंह लिबरा और जतिंदर सिंह दीदारगढ़ ने बताया कि उनकी मांगों में कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को रद्द करना शामिल है। आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंध पर लाना भी एक प्रमुख मांग है।
यूनियन ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि 22 सितंबर तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो पूरे राज्य में बसों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा।