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Panchkula News: 57 लाख की साइबर ठगी मामले में आरोपी को जमानत
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पंचकूला। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की अदालत ने 57 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में आरोपी अफताव (20) की नियमित जमानत याचिका स्वीकार की है। अदालत ने आरोपी को शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
दायर मामले के अनुसार सेक्टर-16 निवासी शिकायतकर्ता सतीश कुमार तनेजा को 23 जून 2025 में ठगों ने पुलिस अफसर और सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर झांसे में लिया। वीडियो कॉल और फर्जी कोर्ट आदेश दिखाकर उनसे डर के माहौल में 57 लाख रुपये तीन किस्तों में ठगे थे। रकम पहले बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खातों में गई और बाद में अन्य खातों में ट्रांसफर की गई।
शिकायतकर्ता की ओर से दी गई जानकारी पर साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने बैंक खाते सह-आरोपी को उपलब्ध कराए थे। हालांकि जांच में यह भी साफ हुआ कि सीधे तौर पर शिकायतकर्ता से रकम ट्रांसफर कराने में आरोपी की भूमिका नहीं थी।
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अदालत का फैसला
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी 29 जून 2025 से जेल में बंद है, जांच पूरी हो चुकी है और चालान दाखिल हो चुका है। ऐसे में लंबी सुनवाई तक आरोपी को जेल में रखना उचित नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सतेंद्र कुमार अंतिल मामले का हवाला देते हुए कहा कि जेलों में अधिकतर कैदी विचाराधीन हैं और जमानत न देने का औचित्य तभी बनता है जब आरोपी से समाज को खतरा हो।
बॉक्स
जमानत की शर्तें
आरोपी हर सुनवाई पर मौजूद रहेगा।
अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा और पासपोर्ट जमा करेगा।
गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
अदालत में 1 लाख रुपये का एफडीआर जमा करना होगा।
शर्तों के उल्लंघन पर ज़मानत रद्द की जा सकती है।
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दायर मामले के अनुसार सेक्टर-16 निवासी शिकायतकर्ता सतीश कुमार तनेजा को 23 जून 2025 में ठगों ने पुलिस अफसर और सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर झांसे में लिया। वीडियो कॉल और फर्जी कोर्ट आदेश दिखाकर उनसे डर के माहौल में 57 लाख रुपये तीन किस्तों में ठगे थे। रकम पहले बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खातों में गई और बाद में अन्य खातों में ट्रांसफर की गई।
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शिकायतकर्ता की ओर से दी गई जानकारी पर साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने बैंक खाते सह-आरोपी को उपलब्ध कराए थे। हालांकि जांच में यह भी साफ हुआ कि सीधे तौर पर शिकायतकर्ता से रकम ट्रांसफर कराने में आरोपी की भूमिका नहीं थी।
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अदालत का फैसला
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी 29 जून 2025 से जेल में बंद है, जांच पूरी हो चुकी है और चालान दाखिल हो चुका है। ऐसे में लंबी सुनवाई तक आरोपी को जेल में रखना उचित नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सतेंद्र कुमार अंतिल मामले का हवाला देते हुए कहा कि जेलों में अधिकतर कैदी विचाराधीन हैं और जमानत न देने का औचित्य तभी बनता है जब आरोपी से समाज को खतरा हो।
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जमानत की शर्तें
आरोपी हर सुनवाई पर मौजूद रहेगा।
अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा और पासपोर्ट जमा करेगा।
गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
अदालत में 1 लाख रुपये का एफडीआर जमा करना होगा।
शर्तों के उल्लंघन पर ज़मानत रद्द की जा सकती है।