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मारपीट मामले में पांच पीयू नेता बरी
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:04 AM IST
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पीयू में मारपीट : तत्कालीन कैंपस और सोई प्रधान समेत पांच बरी
सबहेड
बरी होने वालों में पुसू प्रेसिडेंट समेत अन्य छात्र नेता, इलेक्शन के दौरान हुई थी मारपीट
विवि के तत्कालीन चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर को भी लगी थी चोट, आरोप साबित नहीं कर सकी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में 2014 में इलेक्शन के दौरान बनी हेल्प डेस्क पर सोई और पुसू के छात्र नेताओं के बीच मारपीट के मामले में जिला अदालत ने पांच छात्र नेताओं को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में सोई के छात्र नेता व तत्कालीन कैंपस प्रेसिडेंट मनप्रीत सिंह उर्फ मीत जटाना (25) निवासी फिरोजपुर, तत्कालीन सोई प्रेसिडेंट रशपाल सिंह (27) निवासी मुक्तसर, तत्कालीन पुसू प्रेसिडेंट सतविंदर उर्फ नवल (24) निवासी पटियाला, पुसू नेता सहजपाल सिंह (25) निवासी मानसा और पुसू नेता हर्षदीप सिंह (24) निवासी मोहाली शामिल हैं। उक्त पांचों को सेक्टर-11 थाना पुलिस ने तत्कालीन चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर जतिंदर ग्रोवर की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। मारपीट के दौरान ग्रोवर भी जख्मी हुए थे। पुलिस ने मामले में जुलाई 2014 को आईपीसी की धारा 147, 149, 332, 353 और 506 के तहत केस दर्ज किया था।
एक जुलाई 2014 को पीयू में बतौर चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर तैनात जतिंदर ग्रोवर ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि उन्हें दोपहर 3 बजे के करीब सिक्योरिटी ऑफिसर शिव लाल यादव ने सूचना दी थी कि पोस्ट ऑफिस के पास बनी हेल्प डेस्क में दो छात्र गुटों में झगड़ा हो रहा है। इसके बाद वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि पुसू और सोई के छात्र नेताओं के बीच मारपीट हो रही है। उन्होंने सिक्योरिटी की मदद से छात्र नेताओं को शांत कराने का प्रयास किया।
इस दौरान दोनों गुटों ने एक दूसरे पर कुर्सियां फेंकना शुरू कर दिया। बीच-बचाव में एक कुर्सी आकर उनकी आंख पर लगी, जिससे वह भी जख्मी हो गए। वहीं अन्य सिक्योरिटी स्टाफ भी जख्मी हुआ। इस पर उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने से पहले सभी छात्र उन्हें व स्टाफ को जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बाद में उक्त पांचों छात्र नेताओं के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
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बाक्स
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष की ओर से पेश हुए एडवोकेट सज्जल शर्मा और अमरजीत सिंह ने बताया कि मामले में शिकायतकर्ता और चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ग्रोवर ने अदालत में क्रास एग्जामिनेशन के दौरान कहा था कि घटना के वक्त वहां बहुत अधिक भीड़ थी। उसे नहीं पता उस पर कुर्सी किसने फेंककर मारी थी। वहीं बचाव पक्ष के अनुसार ग्रोवर ने पुलिस को दी शिकायत में किसी का नाम नहीं लिया था। यह बात उन्होंने क्रास एग्जामिनेशन में कबूली थी। इसके अलावा पुलिस ने मामले में कोई और आई विटनेस भी पेश नहीं किया था।
वीडियो सीडी का प्रमाण नहीं दे सकी पुलिस
एडवोकेट सज्जल शर्मा के अनुसार पुलिस ने मामले में घटना के वक्त की एक वीडियो सीडी पेश की थी, लेकिन पुलिस न तो वीडियो बनाने वाले को अदालत में पेश कर सकी और न ही इंडियन एविडेंस एक्ट 65बी के तहत वीडियो का कोई सर्टिफिकेट पेश किया। इससे सीडी कोर्ट में मान्य साबित नहीं हुई।
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बरी होने वालों में पुसू प्रेसिडेंट समेत अन्य छात्र नेता, इलेक्शन के दौरान हुई थी मारपीट
विवि के तत्कालीन चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर को भी लगी थी चोट, आरोप साबित नहीं कर सकी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में 2014 में इलेक्शन के दौरान बनी हेल्प डेस्क पर सोई और पुसू के छात्र नेताओं के बीच मारपीट के मामले में जिला अदालत ने पांच छात्र नेताओं को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में सोई के छात्र नेता व तत्कालीन कैंपस प्रेसिडेंट मनप्रीत सिंह उर्फ मीत जटाना (25) निवासी फिरोजपुर, तत्कालीन सोई प्रेसिडेंट रशपाल सिंह (27) निवासी मुक्तसर, तत्कालीन पुसू प्रेसिडेंट सतविंदर उर्फ नवल (24) निवासी पटियाला, पुसू नेता सहजपाल सिंह (25) निवासी मानसा और पुसू नेता हर्षदीप सिंह (24) निवासी मोहाली शामिल हैं। उक्त पांचों को सेक्टर-11 थाना पुलिस ने तत्कालीन चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर जतिंदर ग्रोवर की शिकायत पर गिरफ्तार किया था। मारपीट के दौरान ग्रोवर भी जख्मी हुए थे। पुलिस ने मामले में जुलाई 2014 को आईपीसी की धारा 147, 149, 332, 353 और 506 के तहत केस दर्ज किया था।
एक जुलाई 2014 को पीयू में बतौर चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर तैनात जतिंदर ग्रोवर ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि उन्हें दोपहर 3 बजे के करीब सिक्योरिटी ऑफिसर शिव लाल यादव ने सूचना दी थी कि पोस्ट ऑफिस के पास बनी हेल्प डेस्क में दो छात्र गुटों में झगड़ा हो रहा है। इसके बाद वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि पुसू और सोई के छात्र नेताओं के बीच मारपीट हो रही है। उन्होंने सिक्योरिटी की मदद से छात्र नेताओं को शांत कराने का प्रयास किया।
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इस दौरान दोनों गुटों ने एक दूसरे पर कुर्सियां फेंकना शुरू कर दिया। बीच-बचाव में एक कुर्सी आकर उनकी आंख पर लगी, जिससे वह भी जख्मी हो गए। वहीं अन्य सिक्योरिटी स्टाफ भी जख्मी हुआ। इस पर उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने से पहले सभी छात्र उन्हें व स्टाफ को जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बाद में उक्त पांचों छात्र नेताओं के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
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बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष की ओर से पेश हुए एडवोकेट सज्जल शर्मा और अमरजीत सिंह ने बताया कि मामले में शिकायतकर्ता और चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ग्रोवर ने अदालत में क्रास एग्जामिनेशन के दौरान कहा था कि घटना के वक्त वहां बहुत अधिक भीड़ थी। उसे नहीं पता उस पर कुर्सी किसने फेंककर मारी थी। वहीं बचाव पक्ष के अनुसार ग्रोवर ने पुलिस को दी शिकायत में किसी का नाम नहीं लिया था। यह बात उन्होंने क्रास एग्जामिनेशन में कबूली थी। इसके अलावा पुलिस ने मामले में कोई और आई विटनेस भी पेश नहीं किया था।
वीडियो सीडी का प्रमाण नहीं दे सकी पुलिस
एडवोकेट सज्जल शर्मा के अनुसार पुलिस ने मामले में घटना के वक्त की एक वीडियो सीडी पेश की थी, लेकिन पुलिस न तो वीडियो बनाने वाले को अदालत में पेश कर सकी और न ही इंडियन एविडेंस एक्ट 65बी के तहत वीडियो का कोई सर्टिफिकेट पेश किया। इससे सीडी कोर्ट में मान्य साबित नहीं हुई।