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फर्जी डिग्री बनाने के आरोप बरी
Updated Sat, 14 Apr 2018 01:28 AM IST
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50 हजार रुपये में ग्रेजुएशन की डिग्री देने के दोनों आरोपी बरी
- 50-50 हजार रुपये देकर बनाते थे ग्रेजुएशन की मार्कशीट
- अभियोजन पक्ष अदालत में नहीं साबित कर सकी सर्टिफिकेट नकली थे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
50-50 हजार रुपये में ग्रेजुएशन की फर्जी डिग्री बनाकर बेचने के आरोपियों को जिला अदालत ने सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में हल्लोमाजरा निवासी नरेंद्र शर्मा और जीरकपुर निवासी नवीन कुमार शामिल हैं। अभियोजन पक्ष अदालत में दोनों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका, जिसका लाभ आरोपियों को मिला। आरोपियों के पास से पुलिस को अलग-अलग यूनिवर्सिटी के 100 के करीब फर्जी सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। इसके अलावा कई विश्वविद्यालयों के आई कार्ड बरामद हुए थे। इसका खुलासा ऑपरेशन सेल ने किया था। दोनों के खिलाफ सेक्टर-31 थाना पुलिस ने 2014 में आईपीसी की धारा 420, 467, 471, 468 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था।
बचाव पक्ष के वकील दिनेश गोयल के अनुसार, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका था कि सर्टिफिकेट नकली थे। अभियोजन पक्ष ऐसा कोई गवाह पेश नहीं कर सका, जो सर्टिफिकेट को नकली साबित कर सके। वहीं, यूनिवर्सिटी की ओर से पेश हुए कर्मियों ने अदालत को बताया था कि सभी दस्तावेज असली हैं।
यह है मामला
जुलाई 2014 में ऑपरेशन सेल ने गांव रायपुर खुर्द निवासी बलजीत सिंह की शिकायत पर हल्लोमाजरा में रहने वाले नरेंदर शर्मा को गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 12वीं तक पढ़ाई की है और वह एक निजी कंपनी में मार्केटिंग का काम करता है। इस दौरान वह काम के सिलसिले में एक दिन हल्लोमाजरा में नरेंदर की दुकान पर गया। वहां नरेंदर ने उसे बताया कि वह जॉब प्लेसमेंट के साथ ही डिस्टेंस एजुकेशन का काम करता है। इस पर बलजीत ने उसे ग्रेजुएशन करने की बात कही। इस पर नरेंदर ने कहा कि वह उसे मोनाढ़ विश्वविद्यालय यूपी से ग्रेजुएशन करवा देगा। इसके लिए उसे हर साल 20-20 हजार रुपये के हिसाब से तीन साल के 60 हजार रुपये देने होंगे। हालांकि, बाद में बात 50 हजार रुपये में तय हुई। शिकायतकर्ता ने उसे 50 हजार रुपये दे दिए। उसे बताया गया कि 20 दिन बाद उसका रोल नंबर आ जाएगा। इस दौरान आरोपी ने उससे न तो कोई फार्म भरवाया और न ही उसे कोई रसीद दी। एक महीने बाद नरेंदर ने उसे तीन साल की मार्कशीट ही दे दी। इसके लिए न तो उसने पेपर दिए न ही उससे फार्म भरवाया गया। शक होने पर उसने इसकी शिकायत पुलिस को दी। यहां तक कि आरोपी ने उसे कहा कि वह अगर उसे 10 हजार रुपये और दे देगा तो वह उसे डिग्री भी लाकर दे देगा। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नरेंदर कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया था कि जीरकपुर निवासी नवीन कुमार भी उसके साथ इस काम में मिला हुआ है।
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सौ के करीब सर्टिफिकेट हुए थे बरामद
पुलिस ने नवीन और नरेंदर के पास से बंठिडा से ग्रेजुएशन और मास्टर्स के कई फर्जी सर्टिफिकेट बरामद किए थे। इनमें 22 सर्टिफिकेट सीएमजे विश्विद्यालय मेघायल के जो कि पूरी तरह से भरे हुए थे। 10 सर्टिफिकेट बिना साइन किए हुए, 5 सर्टिफिकेट के साथ, 8 आई कार्ड गलोबल विवि ऑफ नगालैंड के, 32 सार्टिफिकेट मोनाढ़ विवि यूपी, 9 सर्टिफिकेट सिंघानिया विवि, 7 सर्टिफिकेट काउंसिल पैरामेडिकल मोहाली, एक सर्टिफिकेट मणिपाल एकेडमी हायर एजुकेशन कर्नाटका, एक सर्टिफिकेट राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय उदयपुर, 2 सर्टिफिकेट के साथ 57 आई कार्ड विनायक मिशन विवि के बरामद हुए थे। इसके अलावा आरोपियों के पास से कई फर्जी सर्टिफिकेट की फोटो कापियां मिली थीं।
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- 50-50 हजार रुपये देकर बनाते थे ग्रेजुएशन की मार्कशीट
- अभियोजन पक्ष अदालत में नहीं साबित कर सकी सर्टिफिकेट नकली थे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
50-50 हजार रुपये में ग्रेजुएशन की फर्जी डिग्री बनाकर बेचने के आरोपियों को जिला अदालत ने सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में हल्लोमाजरा निवासी नरेंद्र शर्मा और जीरकपुर निवासी नवीन कुमार शामिल हैं। अभियोजन पक्ष अदालत में दोनों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर सका, जिसका लाभ आरोपियों को मिला। आरोपियों के पास से पुलिस को अलग-अलग यूनिवर्सिटी के 100 के करीब फर्जी सर्टिफिकेट बरामद हुए थे। इसके अलावा कई विश्वविद्यालयों के आई कार्ड बरामद हुए थे। इसका खुलासा ऑपरेशन सेल ने किया था। दोनों के खिलाफ सेक्टर-31 थाना पुलिस ने 2014 में आईपीसी की धारा 420, 467, 471, 468 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था।
बचाव पक्ष के वकील दिनेश गोयल के अनुसार, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका था कि सर्टिफिकेट नकली थे। अभियोजन पक्ष ऐसा कोई गवाह पेश नहीं कर सका, जो सर्टिफिकेट को नकली साबित कर सके। वहीं, यूनिवर्सिटी की ओर से पेश हुए कर्मियों ने अदालत को बताया था कि सभी दस्तावेज असली हैं।
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यह है मामला
जुलाई 2014 में ऑपरेशन सेल ने गांव रायपुर खुर्द निवासी बलजीत सिंह की शिकायत पर हल्लोमाजरा में रहने वाले नरेंदर शर्मा को गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 12वीं तक पढ़ाई की है और वह एक निजी कंपनी में मार्केटिंग का काम करता है। इस दौरान वह काम के सिलसिले में एक दिन हल्लोमाजरा में नरेंदर की दुकान पर गया। वहां नरेंदर ने उसे बताया कि वह जॉब प्लेसमेंट के साथ ही डिस्टेंस एजुकेशन का काम करता है। इस पर बलजीत ने उसे ग्रेजुएशन करने की बात कही। इस पर नरेंदर ने कहा कि वह उसे मोनाढ़ विश्वविद्यालय यूपी से ग्रेजुएशन करवा देगा। इसके लिए उसे हर साल 20-20 हजार रुपये के हिसाब से तीन साल के 60 हजार रुपये देने होंगे। हालांकि, बाद में बात 50 हजार रुपये में तय हुई। शिकायतकर्ता ने उसे 50 हजार रुपये दे दिए। उसे बताया गया कि 20 दिन बाद उसका रोल नंबर आ जाएगा। इस दौरान आरोपी ने उससे न तो कोई फार्म भरवाया और न ही उसे कोई रसीद दी। एक महीने बाद नरेंदर ने उसे तीन साल की मार्कशीट ही दे दी। इसके लिए न तो उसने पेपर दिए न ही उससे फार्म भरवाया गया। शक होने पर उसने इसकी शिकायत पुलिस को दी। यहां तक कि आरोपी ने उसे कहा कि वह अगर उसे 10 हजार रुपये और दे देगा तो वह उसे डिग्री भी लाकर दे देगा। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नरेंदर कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया था कि जीरकपुर निवासी नवीन कुमार भी उसके साथ इस काम में मिला हुआ है।
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सौ के करीब सर्टिफिकेट हुए थे बरामद
पुलिस ने नवीन और नरेंदर के पास से बंठिडा से ग्रेजुएशन और मास्टर्स के कई फर्जी सर्टिफिकेट बरामद किए थे। इनमें 22 सर्टिफिकेट सीएमजे विश्विद्यालय मेघायल के जो कि पूरी तरह से भरे हुए थे। 10 सर्टिफिकेट बिना साइन किए हुए, 5 सर्टिफिकेट के साथ, 8 आई कार्ड गलोबल विवि ऑफ नगालैंड के, 32 सार्टिफिकेट मोनाढ़ विवि यूपी, 9 सर्टिफिकेट सिंघानिया विवि, 7 सर्टिफिकेट काउंसिल पैरामेडिकल मोहाली, एक सर्टिफिकेट मणिपाल एकेडमी हायर एजुकेशन कर्नाटका, एक सर्टिफिकेट राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड विश्वविद्यालय उदयपुर, 2 सर्टिफिकेट के साथ 57 आई कार्ड विनायक मिशन विवि के बरामद हुए थे। इसके अलावा आरोपियों के पास से कई फर्जी सर्टिफिकेट की फोटो कापियां मिली थीं।