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कहानियों के रंगमंच ने जीता दिल
Updated Mon, 24 Jul 2017 02:02 AM IST
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कहानियों के रंगमंच ने जीत लिया दिल
- तीन कहानियों का किया गया मंचन, ‘पथेरे’ ने किया सबको प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
चंडीगढ़ के मिनी ऑडिटोरियम में रविवार को कहानियों के रंगमंच ने सबका दिल जीत लिया। हरियाणा कला परिषद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे। एनएसडी के पूर्व डायरेक्टर डॉ. डीआर अंकुर, हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष सुदेश शर्मा मौजूद रहे। इस मौके पर तीन कहानियों का मंचन किया गया, जिनमें पथेरे, बित्तेभर की बैरन साध और अस्थि विसर्जन शामिल हैं। इन कहानियों का रंगमंच हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान हरियाणा कला परिषद मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर द्वारा प्रदेश में कला और संस्कृति के विस्तार को किए जा रहे प्रयास का एक अंग है। इस मौके पर राज्यपाल ने कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित भी किया।
इन कहानियों का मंचन
इंस्पेक्टर की व्यथा है ‘बित्तेभर की बैरन साध’
डा. बलवंत गार्गी की लिखी इस कहानी में कलाकारों ने बालपन की मानसिकता पटल पर पड़ी गहरी छाप को ढूंढते इंस्पेक्टर की व्यथा को दिखाया। इसमें बचपन की मित्रता को जवानी के पहरे की कैद से छुड़ाने के लिए की जा रही कोशिश को बड़ी मार्मिकता के साथ पेश किया गया।
आतंक के साये पर है ‘अस्थि विर्सजन’
सुरेश बरनवाल द्वारा लिखित अस्थि विसर्जन में आतंक के साये से उभरते मानव जीवन को दर्शाया गया। कलाकारों ने दिखाया कि हिंदू और सिखों के आपसी दंगों के कारण दोनों के मन पर जो प्रभाव पड़ता है, वह मानव जीवन को एक नई राह दिखाने का प्रयास करता है।
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प्रेम प्रसंग में अवसाद की कहानी ‘पथेरे’
सुशील हसरत नरेलवी की कहानी पथेरे में कलाकारों ने प्रेम प्रसंग के बीच में आए अवसाद को दिखाया। कमरू और उर्वजा जो एक ईंट भट्टे पर काम करते हैं, एक दूसरे से प्रेम कर बैठते हैं। अंतरजातीय होने के कारण उनका प्रेम किसी को रास नहीं आता। कमरू की मां उर्वजा के पिता को ईंट भट्ठा छोड़कर चले जाने को कह देती है। उर्वजा के जाने के बाद कमरू बदहाल हो जाता है। कहानी के अंत में जब गुत्थी सुलझती है तो पता चलता है कि कुछ समय पहले कमरू की मां भी इसी कड़ी से गुजर चुकी है, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा था।
इन कलाकारों ने किया काम
सन्नी, गुरजिंदर, मनीषा, उत्तम सिंह, अभिनव कुमार, राहुल शर्मा, पंकज कुमार, अरमानदीप सिंह, एकम बरनाला, आराधना, नवजीत कौर, अभिषेक, भरत कपूर, गौरव कुमार, गीता गांधी, गुरप्रीत, करन गुलाटी, तनुज, मनप्रीत, जीनत, विक्रांत वड़ैच, गौरव, पवन कुमार, शिवम जस्सल, अनुराजदीप सिंह, गगन, जसपाल सिंह, गुरशेवक सिंह सौरभ शर्मा।
स्कूलों में होगा कहानियों का मंचन
हरियाणा कला परिषद की ओर से 24 जुलाई को हरियाणा कला परिषद द्वारा स्कूल स्तर पर तैयार की गईं कहानियों का मंचन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा और कला और संस्कृति मंत्री कविता जैन कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी। इस दौरान 24 जुलाई को रोहतक, हिसार और पिंजौर के स्टूडेंट्स द्वारा तैयार कहानियों का मंचन होगा।
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- तीन कहानियों का किया गया मंचन, ‘पथेरे’ ने किया सबको प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
चंडीगढ़ के मिनी ऑडिटोरियम में रविवार को कहानियों के रंगमंच ने सबका दिल जीत लिया। हरियाणा कला परिषद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे। एनएसडी के पूर्व डायरेक्टर डॉ. डीआर अंकुर, हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष सुदेश शर्मा मौजूद रहे। इस मौके पर तीन कहानियों का मंचन किया गया, जिनमें पथेरे, बित्तेभर की बैरन साध और अस्थि विसर्जन शामिल हैं। इन कहानियों का रंगमंच हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान हरियाणा कला परिषद मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर द्वारा प्रदेश में कला और संस्कृति के विस्तार को किए जा रहे प्रयास का एक अंग है। इस मौके पर राज्यपाल ने कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित भी किया।
इन कहानियों का मंचन
इंस्पेक्टर की व्यथा है ‘बित्तेभर की बैरन साध’
डा. बलवंत गार्गी की लिखी इस कहानी में कलाकारों ने बालपन की मानसिकता पटल पर पड़ी गहरी छाप को ढूंढते इंस्पेक्टर की व्यथा को दिखाया। इसमें बचपन की मित्रता को जवानी के पहरे की कैद से छुड़ाने के लिए की जा रही कोशिश को बड़ी मार्मिकता के साथ पेश किया गया।
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आतंक के साये पर है ‘अस्थि विर्सजन’
सुरेश बरनवाल द्वारा लिखित अस्थि विसर्जन में आतंक के साये से उभरते मानव जीवन को दर्शाया गया। कलाकारों ने दिखाया कि हिंदू और सिखों के आपसी दंगों के कारण दोनों के मन पर जो प्रभाव पड़ता है, वह मानव जीवन को एक नई राह दिखाने का प्रयास करता है।
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प्रेम प्रसंग में अवसाद की कहानी ‘पथेरे’
सुशील हसरत नरेलवी की कहानी पथेरे में कलाकारों ने प्रेम प्रसंग के बीच में आए अवसाद को दिखाया। कमरू और उर्वजा जो एक ईंट भट्टे पर काम करते हैं, एक दूसरे से प्रेम कर बैठते हैं। अंतरजातीय होने के कारण उनका प्रेम किसी को रास नहीं आता। कमरू की मां उर्वजा के पिता को ईंट भट्ठा छोड़कर चले जाने को कह देती है। उर्वजा के जाने के बाद कमरू बदहाल हो जाता है। कहानी के अंत में जब गुत्थी सुलझती है तो पता चलता है कि कुछ समय पहले कमरू की मां भी इसी कड़ी से गुजर चुकी है, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा था।
इन कलाकारों ने किया काम
सन्नी, गुरजिंदर, मनीषा, उत्तम सिंह, अभिनव कुमार, राहुल शर्मा, पंकज कुमार, अरमानदीप सिंह, एकम बरनाला, आराधना, नवजीत कौर, अभिषेक, भरत कपूर, गौरव कुमार, गीता गांधी, गुरप्रीत, करन गुलाटी, तनुज, मनप्रीत, जीनत, विक्रांत वड़ैच, गौरव, पवन कुमार, शिवम जस्सल, अनुराजदीप सिंह, गगन, जसपाल सिंह, गुरशेवक सिंह सौरभ शर्मा।
स्कूलों में होगा कहानियों का मंचन
हरियाणा कला परिषद की ओर से 24 जुलाई को हरियाणा कला परिषद द्वारा स्कूल स्तर पर तैयार की गईं कहानियों का मंचन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा और कला और संस्कृति मंत्री कविता जैन कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी। इस दौरान 24 जुलाई को रोहतक, हिसार और पिंजौर के स्टूडेंट्स द्वारा तैयार कहानियों का मंचन होगा।