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केबल व्यापार ने लगाया पांच सौ करोड़ का चूना
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:16 AM IST
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केबल व्यापार ने लगाया पांच सौ करोड़ का चूना
रंधावा केसवाल पर सिद्धू ने दिया जवाब
खास बातें -
पंजाब में आठ हजार से ज्यादा केबल ऑपरेटर
6500 प्रत्यक्ष और 1500 अप्रत्यक्ष रूप से फास्टवे केअधीन
केंद्रीय सर्विस विभाग के पास सिर्फ 1500 ऑपरेटरों का खाता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
कांग्रेस विधायक सुखजिंदर रंधावा के सवाल केजवाब में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने कहा कि पिछले दस साल के दौरान केबल कारोबार से राज्य को पांच सौ करोड़ का चूना लगा है। सदन के बाद सिद्धू ने प्रेस गैलरी में भी इस बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि टीवी कंपनी से डिस्ट्रीब्यूशन एजेंट, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर, केबल ऑपरेटर और फिर उपभोक्ता आता है। इसमें फास्टवे कंपनी अग्रणी है। आंकड़ों में सिर्फ 1.25 लाख केबल कनेक्शन हैं, पर असलियत में सूबे में 80 लाख टीवी चल रहे हैं। पंजाब में आठ हजार केबल ऑपरेटर हैं, जिनमें 6500 प्रत्यक्ष और 1500 अप्रत्यक्ष रूप से फास्टवे केअधीन हैं, पर केंद्रीय सर्विस विभाग के पास सिर्फ 1500 लोगों का खाता है। आरटीआई के मुताबिक ज्यादातर ऑपरेटर मनोरंजन कर नहीं देते हैं, जिससे सरकार को करीब 184 करोड़ का चूना लगा है। फास्टवे और इसकी दूसरी बारह कंपनियां विदेश से सेट टॉप बॉक्स मंगवाती हैं। उन पर सेंट्रल वैट वापस ले लेती हैं, पर सेट टॉप बॉक्स की बिक्री पर कभी सेल्स टैक्स नहीं भरते। जिसकी राशि करीब 220 करोड़ बनती है। फास्टवे ने रिलायंस केे साथ मिलकर सड़कें खोद कर ऑप्टिकल फाइबर डालीं। 1100 किलोमीटर तारें बिछाने पर सरकार को कुछ नहीं दिया, जोकि करीब 180 करोड़ बनता है। शहरों और गांवों में बिजली के पोल के जरिए तारें डाली गई हैं। जुर्माना और ब्याज डाल कर यह राशि सौ करोड़ बनती है।
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रंधावा केसवाल पर सिद्धू ने दिया जवाब
खास बातें -
पंजाब में आठ हजार से ज्यादा केबल ऑपरेटर
6500 प्रत्यक्ष और 1500 अप्रत्यक्ष रूप से फास्टवे केअधीन
केंद्रीय सर्विस विभाग के पास सिर्फ 1500 ऑपरेटरों का खाता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
कांग्रेस विधायक सुखजिंदर रंधावा के सवाल केजवाब में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने कहा कि पिछले दस साल के दौरान केबल कारोबार से राज्य को पांच सौ करोड़ का चूना लगा है। सदन के बाद सिद्धू ने प्रेस गैलरी में भी इस बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि टीवी कंपनी से डिस्ट्रीब्यूशन एजेंट, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर, केबल ऑपरेटर और फिर उपभोक्ता आता है। इसमें फास्टवे कंपनी अग्रणी है। आंकड़ों में सिर्फ 1.25 लाख केबल कनेक्शन हैं, पर असलियत में सूबे में 80 लाख टीवी चल रहे हैं। पंजाब में आठ हजार केबल ऑपरेटर हैं, जिनमें 6500 प्रत्यक्ष और 1500 अप्रत्यक्ष रूप से फास्टवे केअधीन हैं, पर केंद्रीय सर्विस विभाग के पास सिर्फ 1500 लोगों का खाता है। आरटीआई के मुताबिक ज्यादातर ऑपरेटर मनोरंजन कर नहीं देते हैं, जिससे सरकार को करीब 184 करोड़ का चूना लगा है। फास्टवे और इसकी दूसरी बारह कंपनियां विदेश से सेट टॉप बॉक्स मंगवाती हैं। उन पर सेंट्रल वैट वापस ले लेती हैं, पर सेट टॉप बॉक्स की बिक्री पर कभी सेल्स टैक्स नहीं भरते। जिसकी राशि करीब 220 करोड़ बनती है। फास्टवे ने रिलायंस केे साथ मिलकर सड़कें खोद कर ऑप्टिकल फाइबर डालीं। 1100 किलोमीटर तारें बिछाने पर सरकार को कुछ नहीं दिया, जोकि करीब 180 करोड़ बनता है। शहरों और गांवों में बिजली के पोल के जरिए तारें डाली गई हैं। जुर्माना और ब्याज डाल कर यह राशि सौ करोड़ बनती है।
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