{"_id":"59482bdd4f1c1b22098b45a3","slug":"51497902045-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैप्टन सरकार ने विधानसभा में पेश किया व्हाइट पेपर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैप्टन सरकार ने विधानसभा में पेश किया व्हाइट पेपर
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैप्टन सरकार ने विधानसभा में पेश किया व्हाइट पेपर
पिछली सरकार पर फंड के खुले दुरुपयोग का लगाया आरोप
सरकार ने कैग की तरह ही विभागों पर उठाए सवाल
प्रति व्यक्ति आय में पड़ोसी हरियाणा से पिछड़ा पंजाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पूर्व घोषणा पर अमल करते हुए पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने बजट पेश करने से एक दिन पहले विधानसभा में पूर्व सरकार की कारगुजारियों पर व्हाइट पेपर पेश कर दिया। राज्य के प्रबंधन और वित्त-दो भागों में तैयार किए इस व्हाइट पेपर में कैप्टन सरकार ने अकाली-भाजपा सरकार के दस साल के कार्यकाल में प्रदेश को हुए नुकसान की झलक पेश की है। खास बात यह भी है कि इस व्हाइट पेपर में अनियमितताओं के लिए पिछली सरकार के किसी भी बड़े नेता पर उंगली नहीं उठाई गई है।
व्हाइट पेपर में पूर्व सरकार के कार्यकाल के वित्तीय आंकड़े पेश करते हुए लगभग कैग की ही बीते वर्ष जारी रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है, जबकि व्हाइट पेपर के राज्य प्रबंधन के भाग में, उन सार्वजनिक महत्व के विभागों- ग्रामीण विकास, आवास निर्माण एवं शहरी विकास, स्थानीय सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य, राज्य प्रबंध सुधार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, ट्रांसपोर्ट और गृह मामलों के विभागों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें ढांचागत प्रक्रिया व प्रणाली के मामले में कमजोर करने के साथ ही संस्थागत वातावरण को दूषित किया गया है। व्हाइट पेपर के इस भाग में उक्त सभी विभागों का क्रमवार उल्लेख करते हुए उनकी खामियां गिनाई गई हैं। ग्रामीण विकास विभाग का जिक्र करते हुए बताया गया है कि सूबे के सभी गांवों के लिए 2332.99 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट तय हुए और इसके लिए 1964 करोड़ व 440 करोड़ रुपये अलग-अलग मद से जारी हुए। लेकिन खराब योजनाबंदी और मूल्यांकन की कमी के कारण प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए। केंद्र की मनरेगा योजना पर भी सवाल उठाते हुए व्हाइट पेपर में कहा गया है कि वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में फंड जारी करने में हुई देरी के कारण इस योजना का समय पर लोगों को लाभ नहीं मिल सका।
आवास निर्माण एवं शहरी विकास विभाग का जिक्र करते हुए व्हाइट पेपर में कहा गया है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में राज्य में अवैध कालोनियां, मैरिज पैलेस, अवैध इमारतें, उद्योगों का प्रसार हुआ। इसे सुधारने के बजाय विभाग ने इसे छिपाने पर ज्यादा जोर लगाया। विभाग के ही एक सर्वे में यह सामने आया है कि सूबे में 5340 अवैध कॉलोनियां, 1180 अवैध मैरिज पैलेस हैं। सरकार ने दिसंबर 2015 में पंजाब शहरी विकास मिशन के लिए 6300 करोड़ रुपये का फंड तय किया और अप्रैल, 2016 में यह मिशन शुरू किया गया, लेकिन इसके तहत वाटर सप्लाई 90 फीसदी, सीवरेज 65 फीसदी, एसटीपी 38 फीसदी, सड़कें एवं पार्क 66 फीसदी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 46 फीसदी और स्ट्रीट लाइट्स का काम 50 फीसदी ही पूरा हो सका।
विज्ञापन
व्हाइट पेपर में इस वित्तीय अनुशासनहीनता करार दिया गया है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के बारे में कहा गया है कि उद्योगों को सब्सिडी नीति पर ठीक से अमल नहीं हुआ और इस समय 106.54 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी करने के लिए 1514 मामले लंबित हैं। व्हाइट पेपर में पिछली सरकार की खनन नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के बारे में व्हाइट पेपर में कहा गया है कि आटा-दाल स्कीम में खर्च की आपूर्ति करने के लिए राज्य खरीद एजेंसियों द्वारा अपने स्तर पर गेहूं-चावल की खरीद के लिए उपलब्ध कराए गए सीसीएल फंड को बदलकर रकम जुटाई गई। इसके चलते 31 मार्च, 2017 को 1747 करोड़ रुपये की देनदारी हो चुकी है।
इसी तरह, व्हाइट पेपर के राज्य वित्त के हिस्से में अनेक वित्तीय खामियों का उल्लेख किया गया है। बीते दो सालों में 2773 करोड़ का बकाया कर्मचारियों को अदा नहीं किया गया। इसी तरह 2342 करोड़ पीएसपीसीएल को अदा नहीं किए गए। जब नई सरकार ने काम संभाला तो खजाने में बकाया बिलों समेत राज्य सरकार की तुरंत देनदारी 13039 करोड़ रुपये की सामने आई। पिछली सरकार पीआईडीबी, आरडीबी, पूडा और दूसरी एजेंसियों को अपने स्तर पर कर्ज लेने पर मजबूर कर दिया गया। इस कर्ज का 4435 करोड़ का एक हिस्सा राज्य के खजाने में भी आया है, जिसे गैर रस्मी कर्ज कहा गया है। व्हाइट पेपर में यह भी कहा गया है कि प्रति व्यक्ति आमदनी में पंजाब पड़ोसी राज्य हरियाणा व महाराष्ट्र से पिछड़ गए। इसके अलावा वर्ष 2006-07 में राज्य का राजस्व घाटा 1749 करोड़ था जो 2007-08 में 3823 करोड़ हो गया और 2015-16 में 8550 करोड़ हो गया। वित्तीय घाटा 4384 करोड़ दर्ज किया गया, जो 2015-16 में 11762 करोड़ यानी 168 फीसदी हो गया है।
विज्ञापन
पिछली सरकार पर फंड के खुले दुरुपयोग का लगाया आरोप
सरकार ने कैग की तरह ही विभागों पर उठाए सवाल
प्रति व्यक्ति आय में पड़ोसी हरियाणा से पिछड़ा पंजाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पूर्व घोषणा पर अमल करते हुए पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने बजट पेश करने से एक दिन पहले विधानसभा में पूर्व सरकार की कारगुजारियों पर व्हाइट पेपर पेश कर दिया। राज्य के प्रबंधन और वित्त-दो भागों में तैयार किए इस व्हाइट पेपर में कैप्टन सरकार ने अकाली-भाजपा सरकार के दस साल के कार्यकाल में प्रदेश को हुए नुकसान की झलक पेश की है। खास बात यह भी है कि इस व्हाइट पेपर में अनियमितताओं के लिए पिछली सरकार के किसी भी बड़े नेता पर उंगली नहीं उठाई गई है।
व्हाइट पेपर में पूर्व सरकार के कार्यकाल के वित्तीय आंकड़े पेश करते हुए लगभग कैग की ही बीते वर्ष जारी रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है, जबकि व्हाइट पेपर के राज्य प्रबंधन के भाग में, उन सार्वजनिक महत्व के विभागों- ग्रामीण विकास, आवास निर्माण एवं शहरी विकास, स्थानीय सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य, राज्य प्रबंध सुधार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, ट्रांसपोर्ट और गृह मामलों के विभागों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें ढांचागत प्रक्रिया व प्रणाली के मामले में कमजोर करने के साथ ही संस्थागत वातावरण को दूषित किया गया है। व्हाइट पेपर के इस भाग में उक्त सभी विभागों का क्रमवार उल्लेख करते हुए उनकी खामियां गिनाई गई हैं। ग्रामीण विकास विभाग का जिक्र करते हुए बताया गया है कि सूबे के सभी गांवों के लिए 2332.99 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट तय हुए और इसके लिए 1964 करोड़ व 440 करोड़ रुपये अलग-अलग मद से जारी हुए। लेकिन खराब योजनाबंदी और मूल्यांकन की कमी के कारण प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए। केंद्र की मनरेगा योजना पर भी सवाल उठाते हुए व्हाइट पेपर में कहा गया है कि वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में फंड जारी करने में हुई देरी के कारण इस योजना का समय पर लोगों को लाभ नहीं मिल सका।
विज्ञापन
आवास निर्माण एवं शहरी विकास विभाग का जिक्र करते हुए व्हाइट पेपर में कहा गया है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में राज्य में अवैध कालोनियां, मैरिज पैलेस, अवैध इमारतें, उद्योगों का प्रसार हुआ। इसे सुधारने के बजाय विभाग ने इसे छिपाने पर ज्यादा जोर लगाया। विभाग के ही एक सर्वे में यह सामने आया है कि सूबे में 5340 अवैध कॉलोनियां, 1180 अवैध मैरिज पैलेस हैं। सरकार ने दिसंबर 2015 में पंजाब शहरी विकास मिशन के लिए 6300 करोड़ रुपये का फंड तय किया और अप्रैल, 2016 में यह मिशन शुरू किया गया, लेकिन इसके तहत वाटर सप्लाई 90 फीसदी, सीवरेज 65 फीसदी, एसटीपी 38 फीसदी, सड़कें एवं पार्क 66 फीसदी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 46 फीसदी और स्ट्रीट लाइट्स का काम 50 फीसदी ही पूरा हो सका।
विज्ञापन
व्हाइट पेपर में इस वित्तीय अनुशासनहीनता करार दिया गया है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के बारे में कहा गया है कि उद्योगों को सब्सिडी नीति पर ठीक से अमल नहीं हुआ और इस समय 106.54 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी करने के लिए 1514 मामले लंबित हैं। व्हाइट पेपर में पिछली सरकार की खनन नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के बारे में व्हाइट पेपर में कहा गया है कि आटा-दाल स्कीम में खर्च की आपूर्ति करने के लिए राज्य खरीद एजेंसियों द्वारा अपने स्तर पर गेहूं-चावल की खरीद के लिए उपलब्ध कराए गए सीसीएल फंड को बदलकर रकम जुटाई गई। इसके चलते 31 मार्च, 2017 को 1747 करोड़ रुपये की देनदारी हो चुकी है।
इसी तरह, व्हाइट पेपर के राज्य वित्त के हिस्से में अनेक वित्तीय खामियों का उल्लेख किया गया है। बीते दो सालों में 2773 करोड़ का बकाया कर्मचारियों को अदा नहीं किया गया। इसी तरह 2342 करोड़ पीएसपीसीएल को अदा नहीं किए गए। जब नई सरकार ने काम संभाला तो खजाने में बकाया बिलों समेत राज्य सरकार की तुरंत देनदारी 13039 करोड़ रुपये की सामने आई। पिछली सरकार पीआईडीबी, आरडीबी, पूडा और दूसरी एजेंसियों को अपने स्तर पर कर्ज लेने पर मजबूर कर दिया गया। इस कर्ज का 4435 करोड़ का एक हिस्सा राज्य के खजाने में भी आया है, जिसे गैर रस्मी कर्ज कहा गया है। व्हाइट पेपर में यह भी कहा गया है कि प्रति व्यक्ति आमदनी में पंजाब पड़ोसी राज्य हरियाणा व महाराष्ट्र से पिछड़ गए। इसके अलावा वर्ष 2006-07 में राज्य का राजस्व घाटा 1749 करोड़ था जो 2007-08 में 3823 करोड़ हो गया और 2015-16 में 8550 करोड़ हो गया। वित्तीय घाटा 4384 करोड़ दर्ज किया गया, जो 2015-16 में 11762 करोड़ यानी 168 फीसदी हो गया है।