{"_id":"5c292906bdec2256d22f7f45","slug":"41546201350-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एस्टेट आफिस से जानकारी मांगना सही: कैलाश चंद जैन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एस्टेट आफिस से जानकारी मांगना सही: कैलाश चंद जैन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
(कैलाश चंद जैन की फोटो ट्रैक में सेव है)
एस्टेट ऑफिस से जानकारी मांगना उचित: कैलाश चंद जैन
कहा, दुकानदार वेंडर एक्ट के अधीन नहीं आते और बरामदा दुकानदार की मलकीयत है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय गृहमंत्री सलाहकार समिति के सदस्य एवं व्यापारी नेता कैलाश चंद जैन ने दुकानदारों की ओर से बरामदों में सामान रखे जाने के बदले 10 हजार रुपये का जुर्माना करने के खिलाफ व्यापारियों की ओर से दी गई रिप्रेजेंटेशन पर नगर निगम कमिश्नर द्वारा स्टेट ऑफिस से जानकारी मांगे जाने को उचित बताया है। उन्होंने कहा कि बरामदे की मलकीयत की जानकारी मांगना तो ठीक है, लेकिन बरामदे में क्या कार्य किया जाए यह पूछना गैरजरूरी है। हम पहले ही कह रहे हैं कि अलॉटमेंट के अनुसार बरामदे केवल पब्लिक के चलने फिरने के लिए हैं।
कैलाश जैन का कहना है कि मुद्दा बरामदे में रखे समान को उठाने और उस पर जुर्माने की राशि 500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर देने का नहीं है, बल्कि असली मुद्दा तो दुकानदारों को वेंडर एक्ट के अधीन लाने या नहीं लाने का है।
जैन के अनुसार दुकानदार किसी भी सूरत में वेंडर एक्ट के अधीन नहीं आता। बरामदा दुकानदार की मलकीयत है। दुकानदार ने उसकी कीमत अदा की है और प्रॉपर्टी टैक्स व लीज मनी दी है। अगर उस बरामदे में दुकानदार कोई सामान रखता है तो वह गैरकानूनी वेंडर नहीं हो सकता और न ही दुकानदार वेंडर की कैटेगरी में आता है। स्ट्रीट वेंडर एक्ट की पेनल्टी क्लाज में बरामदे में सामान रखने वाले दुकानदारों को गैरकानूनी वेंडर की कैटेगरी में लाए जाने का फैसला सरासर गलत है। इस क्लॉज को तुरंत संशोधित कर वापस लिया जाना चाहिए तथा दुकानदारों पर लगाई जाने वाली पेनल्टी क्लॉज को स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट में से तुरंत वापस किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
एस्टेट ऑफिस से जानकारी मांगना उचित: कैलाश चंद जैन
कहा, दुकानदार वेंडर एक्ट के अधीन नहीं आते और बरामदा दुकानदार की मलकीयत है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय गृहमंत्री सलाहकार समिति के सदस्य एवं व्यापारी नेता कैलाश चंद जैन ने दुकानदारों की ओर से बरामदों में सामान रखे जाने के बदले 10 हजार रुपये का जुर्माना करने के खिलाफ व्यापारियों की ओर से दी गई रिप्रेजेंटेशन पर नगर निगम कमिश्नर द्वारा स्टेट ऑफिस से जानकारी मांगे जाने को उचित बताया है। उन्होंने कहा कि बरामदे की मलकीयत की जानकारी मांगना तो ठीक है, लेकिन बरामदे में क्या कार्य किया जाए यह पूछना गैरजरूरी है। हम पहले ही कह रहे हैं कि अलॉटमेंट के अनुसार बरामदे केवल पब्लिक के चलने फिरने के लिए हैं।
कैलाश जैन का कहना है कि मुद्दा बरामदे में रखे समान को उठाने और उस पर जुर्माने की राशि 500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर देने का नहीं है, बल्कि असली मुद्दा तो दुकानदारों को वेंडर एक्ट के अधीन लाने या नहीं लाने का है।
विज्ञापन
जैन के अनुसार दुकानदार किसी भी सूरत में वेंडर एक्ट के अधीन नहीं आता। बरामदा दुकानदार की मलकीयत है। दुकानदार ने उसकी कीमत अदा की है और प्रॉपर्टी टैक्स व लीज मनी दी है। अगर उस बरामदे में दुकानदार कोई सामान रखता है तो वह गैरकानूनी वेंडर नहीं हो सकता और न ही दुकानदार वेंडर की कैटेगरी में आता है। स्ट्रीट वेंडर एक्ट की पेनल्टी क्लाज में बरामदे में सामान रखने वाले दुकानदारों को गैरकानूनी वेंडर की कैटेगरी में लाए जाने का फैसला सरासर गलत है। इस क्लॉज को तुरंत संशोधित कर वापस लिया जाना चाहिए तथा दुकानदारों पर लगाई जाने वाली पेनल्टी क्लॉज को स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट में से तुरंत वापस किया जाए।
विज्ञापन