{"_id":"5d8926628ebc3e0142327297","slug":"40-thousand-rupees-fine-on-air-india-panchkula-news-pkl351613450","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"‘ब्राह्मण को मांस खिला एयर इंडिया ने धार्मिक भावना की आहत, यह भगवान की नजर में भी पाप’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘ब्राह्मण को मांस खिला एयर इंडिया ने धार्मिक भावना की आहत, यह भगवान की नजर में भी पाप’
Tue, 24 Sep 2019 02:44 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2019 02:44 PM IST
विज्ञापन
air india
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक ब्राह्मण दंपती, जिसने पहले ही बताया हो कि वह शुद्ध शाकाहारी हैं, उन्हें मांसाहारी भोजन परोसकर एयर इंडिया ने धार्मिक भावनाएं आहत की हैं। यह करना भगवान की नजर में भी पाप है। एयर इंडिया द्वारा की गई इस गलती को मुआवजे से नहीं भरा जा सकता। यह टिप्पणी राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन) ने एक शिकायतकर्ता की याचिका पर फैसले सुनाते हुए की है।
मोहाली के सेक्टर-121 स्थित एटीएस कासा एस्पाना में रहने वाले चंद्रमोहन पाठक ने एयर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि 17 जून 2016 को नई दिल्ली से शिकागो और 14 नवंबर 2016 को शिकागो से नई दिल्ली के लिए उन्होंने अपने और पत्नी के लिए एयर इंडिया से टिकट बुक कराई। बुकिंग के समय उन्होंने खासतौर पर लिखा कि वह शुद्ध शाकाहारी हैं और उन्हें फ्लाइट में सिर्फ वेज खाना ही परोसा जाए।
दिल्ली से शिकागो जाने के समय सब कुछ ठीक रहा, लेकिन वापसी में उन्हें केबिन क्रू ने बिना बताए नॉन-वेजिटेेरियन खाना परोस दिया। खाते वक्त उन्होंने महसूस किया कि कुछ गड़बड़ है, इस बीच उन्हें खाने में मांस का टुकड़ा मिला। इसकी शिकायत उन्होंने तुरंत केबिन क्रू से की, क्योंकि खाने पर कोई वेज या नॉनवेज का स्टिकर नहीं लगा था। क्रू ने भी उन्हें बताया नहीं कि यह खाना नॉनवेज है। इसके बाद उन्होंने शिकायत लिखने के लिए कंप्लेंट बुक मांगी, लेकिन वह भी नही दी गई। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद शिकायतकर्ता ने फोरम में केस कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोहाली के सेक्टर-121 स्थित एटीएस कासा एस्पाना में रहने वाले चंद्रमोहन पाठक ने एयर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि 17 जून 2016 को नई दिल्ली से शिकागो और 14 नवंबर 2016 को शिकागो से नई दिल्ली के लिए उन्होंने अपने और पत्नी के लिए एयर इंडिया से टिकट बुक कराई। बुकिंग के समय उन्होंने खासतौर पर लिखा कि वह शुद्ध शाकाहारी हैं और उन्हें फ्लाइट में सिर्फ वेज खाना ही परोसा जाए।
विज्ञापन
दिल्ली से शिकागो जाने के समय सब कुछ ठीक रहा, लेकिन वापसी में उन्हें केबिन क्रू ने बिना बताए नॉन-वेजिटेेरियन खाना परोस दिया। खाते वक्त उन्होंने महसूस किया कि कुछ गड़बड़ है, इस बीच उन्हें खाने में मांस का टुकड़ा मिला। इसकी शिकायत उन्होंने तुरंत केबिन क्रू से की, क्योंकि खाने पर कोई वेज या नॉनवेज का स्टिकर नहीं लगा था। क्रू ने भी उन्हें बताया नहीं कि यह खाना नॉनवेज है। इसके बाद उन्होंने शिकायत लिखने के लिए कंप्लेंट बुक मांगी, लेकिन वह भी नही दी गई। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद शिकायतकर्ता ने फोरम में केस कर दिया।
विज्ञापन
जुर्माने की राशि को स्टेट कमीशन ने चार गुना बढ़ाया
आयोग के अनुसार, शाकाहारी पति-पत्नी को बिना बताए नॉन-वेजिटेेरियन खाना परोसना न केवल सेवा में कोताही है, बल्कि हिंदू धर्म से और शुद्ध शाकाहारी होने के चलते यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का भी प्रयास है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अपनी शिकायत लिखने के लिए कंप्लेंट बुक मांगी, लेकिन वह भी केबिन क्रू ने नहीं दी।
इन दलीलों के साथ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यूटी ने उपभोक्ता फोरम के आदेशों में बदलाव करते हुए एयर इंडिया पर लगाए गए जुर्माने को चार गुना बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया। उपभोक्ता फोरम ने 10 हजार रुपये का जुर्माना एयर इंडिया पर किया था। इसी तरह आयोग ने फोरम द्वारा तय 7 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेशों को भी बरकरार रखा है।
आदेश की प्रति मिलने पर 30 दिनों के अंदर इन आदेशों का पालन करना होगा, नहीं तो मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।
इन दलीलों के साथ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यूटी ने उपभोक्ता फोरम के आदेशों में बदलाव करते हुए एयर इंडिया पर लगाए गए जुर्माने को चार गुना बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया। उपभोक्ता फोरम ने 10 हजार रुपये का जुर्माना एयर इंडिया पर किया था। इसी तरह आयोग ने फोरम द्वारा तय 7 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेशों को भी बरकरार रखा है।
आदेश की प्रति मिलने पर 30 दिनों के अंदर इन आदेशों का पालन करना होगा, नहीं तो मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।