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Punjab: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कबूतरबाजी की 33 अवैध रेस रुकवाईं, PETA ने की कार्रवाई
Mon, 09 Jun 2025 12:38 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 09 Jun 2025 12:38 AM IST
सार
पीईटीए के कानूनी सलाहकार निदेशक मीत अशर ने कहा कि कबूतर भी इंसानों की तरह दर्द और डर महसूस करते हैं। उन्हें बंदी बनाना और खेलों के लिए इस्तेमाल करना अमानवीय है।
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कबूतरबाजी पर रोक
- फोटो : फाइल
विस्तार
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कबूतरबाजी पर अब खैर नहीं। पंजाब पुलिस ने पीईटीए के साथ राज्य में कबूतरबाजी पर शिकंजा कसा है। इधर, पीपुल्स फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पीईटीए) इंडिया ने पिछले दो महीने में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के 20 जिलों में आयोजित 33 अवैध कबूतरबाजी प्रतियोगिताओं को रुकवाया है। इन रेसों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सहयोग से रोका गया, जिसमें हाल ही में फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और संगरूर में हुई तीन रेस शामिल हैं।
पीईटीए इंडिया ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट किया कि दिसंबर 2020 में पंजाब के मुख्य सचिव को भेजे गए एक पत्र में, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) ने सभी प्रकार की पशु रेसों को प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (पीसीए) एक्ट, 1960 के अंतर्गत अवैध घोषित किया था। इस तरह की प्रतियोगिताएं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना मानी जाएंगी।
पीईटीए के कानूनी सलाहकार निदेशक मीत अशर ने कहा कि कबूतर भी इंसानों की तरह दर्द और डर महसूस करते हैं। उन्हें बंदी बनाना और खेलों के लिए इस्तेमाल करना अमानवीय है। मीत अशर लंबे समय से पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा पुलिस को कबूतरबाजी पर शिकंजा कसने के लिए पैरवी करते आए हैं।
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पीईटीए इंडिया ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट किया कि दिसंबर 2020 में पंजाब के मुख्य सचिव को भेजे गए एक पत्र में, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) ने सभी प्रकार की पशु रेसों को प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (पीसीए) एक्ट, 1960 के अंतर्गत अवैध घोषित किया था। इस तरह की प्रतियोगिताएं सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना मानी जाएंगी।
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पीईटीए के कानूनी सलाहकार निदेशक मीत अशर ने कहा कि कबूतर भी इंसानों की तरह दर्द और डर महसूस करते हैं। उन्हें बंदी बनाना और खेलों के लिए इस्तेमाल करना अमानवीय है। मीत अशर लंबे समय से पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा पुलिस को कबूतरबाजी पर शिकंजा कसने के लिए पैरवी करते आए हैं।
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