{"_id":"5c817e22bdec22144c191971","slug":"21551990306-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एलांयस फ्रांसेस में होगा फ्यूजन म्यूजिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एलांयस फ्रांसेस में होगा फ्यूजन म्यूजिक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो सहित
वुमन डे पर खास
बादल का एक जाम उठाकर.. घूंट चांदनी पी है हमने
रूबी सिंह
चंडीगढ़।
अम्बर की एक पाक सुराही
बादल का एक जाम उठाकर
घूंट चांदनी पी है हमने
हमने आज यह दुनिया बेची
और एक दिन खरीद के लाए
बात कुफ्र की की है हमने
सपनों का एक थान बुना था
गज एक कपड़ा फाड़ लिया
और उम्र की चोली सी है हमने
कैसे इसका कर्ज चुकाएं
मांग के अपनी मौत के हाथों
यह जो जिंदगी ली है हमने
मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम की यह खूबसूरत पंक्तियां नारी के जीवन बखूबी बयां करती हैं। उनकी इस चर्चित रचना ने मानों महिलाओं के संघर्ष और उनकी ताकत को जीवन की सुराही में भर दिया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर की उन तमाम महिलाओं को हमारा सलाम जिन्होंने जिंदगी की इस जद्दोजहद में संघर्ष किया और खुद को एक मिसाल के तौर पर स्थापित किया। इतना ही नही अपने जैसी दूसरी महिलाओं के संघर्ष में उनका साथ दे रही हैं और उन्हें संबल प्रदान कर रही हैं।
नीरू ने अकेलेपन को नहीं बनने दी अपनी कमजोरी, आज महिलाओं को देती हैं फिट रहने के टिप्स
नीरू सैनी पेशे से तो विज्ञान की शिक्षिका हैं लेकिन बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वह महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि महिलाएं अक्सर घर के काम और परिवार के चक्कर में अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखतीं। घर की महिला स्वस्थ रहेगी तो पूरा परिवार निरोग रहेगा। इसके लिए उन्होंने पिंकथॉन कैंपेन भी शुरू किया है। हालांकि इन सब को शुरू करने से पहले उन्होंने अपनी जिंदगी के लंबा संघर्ष किया विजय पाई। मौली जागरां स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की साइंस टीचर नीरू सैनी 2002 में पति के निधन के बाद बिल्कुल अकेले पड़ गईं। दो बेटियां हैं, जो पढ़ाई और नौकरी की वजह से बाहर रहती हैं। ऐसे में वह धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार हो गईं। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को इस बीमारी से निकालने का संकल्प लिया। उन्होंने साइक्लिंग और रनिंग शुरू की और खुद को डिप्रेशन से बाहर निकाला। आज वह शहर की लड़कियों से लेकर महिलाओं तक को अकेलेपन और अन्य दूसरी बीमारियों से बाहर निकालने का काम कर रही हैं। उन्हें प्रेरित कर रही हैं। साथ ही वह महिलाओं के लिए जागरुकता कैंप एवं पिंकथॉन का भी आयोजन करती रहती हैं। नीरू 49 साल की हैं।
रोजी लड़कियों को मार्शल आर्ट सिखाती हैं ताकि कर सकें सेल्फ डिफेंस
देश में महिलाओं एवं लड़कियों के प्रति बढ़ रहे अपराध से लड़ने के लिए खुद लड़कियों को आगे आना होगा। इसी मकसद से 30 वर्षीय त्रिलोक कुमारी उर्फ रोजी बीते 15 वर्षों से लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रही हैं। वह न केवल लड़कियों को सेल्फ डिफेंस के गुर सिखाती हैं बल्कि खुद भी कई बार सड़क पर मनचलों को दुरुस्त कर चुकी हैं। रोजी मार्शल आर्ट की ट्रेनर हैं और बद्दी, पंचकूला से लेकर चंडीगढ़ में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे रही हैं। उन्होंने बताया कि देश की हर लड़की को मार्शल आर्ट आना चाहिए ताकि वे अपनी सुरक्षा खुद कर सकें। वे अपना गुरु मार्शल आर्ट मास्टर बिक्रम सिंह राणा को मानती हैं। उनके पिता तिलक राज ने उनको पांच साल की उम्र में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दिलानी शुरू कर दी थीं। आज वह अपनी सात साल की बेटी को भी मार्शल आर्ट सीखा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वुमन डे पर खास
बादल का एक जाम उठाकर.. घूंट चांदनी पी है हमने
रूबी सिंह
चंडीगढ़।
अम्बर की एक पाक सुराही
बादल का एक जाम उठाकर
घूंट चांदनी पी है हमने
हमने आज यह दुनिया बेची
और एक दिन खरीद के लाए
बात कुफ्र की की है हमने
सपनों का एक थान बुना था
गज एक कपड़ा फाड़ लिया
और उम्र की चोली सी है हमने
कैसे इसका कर्ज चुकाएं
मांग के अपनी मौत के हाथों
यह जो जिंदगी ली है हमने
मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम की यह खूबसूरत पंक्तियां नारी के जीवन बखूबी बयां करती हैं। उनकी इस चर्चित रचना ने मानों महिलाओं के संघर्ष और उनकी ताकत को जीवन की सुराही में भर दिया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर की उन तमाम महिलाओं को हमारा सलाम जिन्होंने जिंदगी की इस जद्दोजहद में संघर्ष किया और खुद को एक मिसाल के तौर पर स्थापित किया। इतना ही नही अपने जैसी दूसरी महिलाओं के संघर्ष में उनका साथ दे रही हैं और उन्हें संबल प्रदान कर रही हैं।
नीरू ने अकेलेपन को नहीं बनने दी अपनी कमजोरी, आज महिलाओं को देती हैं फिट रहने के टिप्स
नीरू सैनी पेशे से तो विज्ञान की शिक्षिका हैं लेकिन बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वह महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि महिलाएं अक्सर घर के काम और परिवार के चक्कर में अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखतीं। घर की महिला स्वस्थ रहेगी तो पूरा परिवार निरोग रहेगा। इसके लिए उन्होंने पिंकथॉन कैंपेन भी शुरू किया है। हालांकि इन सब को शुरू करने से पहले उन्होंने अपनी जिंदगी के लंबा संघर्ष किया विजय पाई। मौली जागरां स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की साइंस टीचर नीरू सैनी 2002 में पति के निधन के बाद बिल्कुल अकेले पड़ गईं। दो बेटियां हैं, जो पढ़ाई और नौकरी की वजह से बाहर रहती हैं। ऐसे में वह धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार हो गईं। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को इस बीमारी से निकालने का संकल्प लिया। उन्होंने साइक्लिंग और रनिंग शुरू की और खुद को डिप्रेशन से बाहर निकाला। आज वह शहर की लड़कियों से लेकर महिलाओं तक को अकेलेपन और अन्य दूसरी बीमारियों से बाहर निकालने का काम कर रही हैं। उन्हें प्रेरित कर रही हैं। साथ ही वह महिलाओं के लिए जागरुकता कैंप एवं पिंकथॉन का भी आयोजन करती रहती हैं। नीरू 49 साल की हैं।
विज्ञापन
रोजी लड़कियों को मार्शल आर्ट सिखाती हैं ताकि कर सकें सेल्फ डिफेंस
देश में महिलाओं एवं लड़कियों के प्रति बढ़ रहे अपराध से लड़ने के लिए खुद लड़कियों को आगे आना होगा। इसी मकसद से 30 वर्षीय त्रिलोक कुमारी उर्फ रोजी बीते 15 वर्षों से लड़कियों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रही हैं। वह न केवल लड़कियों को सेल्फ डिफेंस के गुर सिखाती हैं बल्कि खुद भी कई बार सड़क पर मनचलों को दुरुस्त कर चुकी हैं। रोजी मार्शल आर्ट की ट्रेनर हैं और बद्दी, पंचकूला से लेकर चंडीगढ़ में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे रही हैं। उन्होंने बताया कि देश की हर लड़की को मार्शल आर्ट आना चाहिए ताकि वे अपनी सुरक्षा खुद कर सकें। वे अपना गुरु मार्शल आर्ट मास्टर बिक्रम सिंह राणा को मानती हैं। उनके पिता तिलक राज ने उनको पांच साल की उम्र में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दिलानी शुरू कर दी थीं। आज वह अपनी सात साल की बेटी को भी मार्शल आर्ट सीखा रही हैं।
विज्ञापन