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गुरुद्वारों में लंगर की रसद को जीएसटी से छूट देने की मांग
Updated Sun, 02 Jul 2017 01:22 AM IST
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गुरुद्वारों में लंगर की रसद को जीएसटी से छूट देने की मांग
सांसद हरसिमरत बादल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से की मांग
गोल्डन टेंपल, केसगढ़ साहिब और दमदमा साहिब गुरुद्वारों के लंगर पर लागू हो गया है जीएसटी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मांग की कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से लंगर सेवा के लिए खरीदी जाने वाली रसद को जीएसटी एक्ट से छूट दी जाए।
हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब सरकार ने इससे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को श्री दरबार साहिब अमृतसर, श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर और तलवंडी साबो बठिंडा में लंगर सेवा के लिए खरीदी जाने वाली रसद को वैट से छूट दी थी। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) देसी घी, चीनी और दालों की खरीद पर करीब 75 लाख रुपये खर्च करती है। अब यह सारी खरीदारी करने पर उसे 10 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा क्योंकि यह सारी वस्तुएं 5 से 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में आती हैं।
उन्होंने वित्त मंत्री से अपील की कि समाज में धर्म, जाति, रंग और नस्ल के भेदभाव को खत्म करने और बराबरी को प्रोत्साहित करने के लिए श्री गुरु नानक देव जी ने 1481 में लंगर की प्रथा शुरू की थी। उन्होंने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई चलाई जाती है, जहां सारा साल लाखों लोगों को मुफ्त लंगर कराया जाता है। इस लंगर का खर्च लोगों से मिले दान से ही चलता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की सिफारिश पर नए जीएसटी एक्ट के सेक्शन 11 और आईजीएसटी एक्ट के सेक्शन 6 योग्य संस्थाओं और कारोबारी अदारों को यह छूट दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के प्रधान किपाल सिंह बडूंगर इस संबंध में पहले ही उनसे मिल चुके हैं।
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सांसद हरसिमरत बादल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से की मांग
गोल्डन टेंपल, केसगढ़ साहिब और दमदमा साहिब गुरुद्वारों के लंगर पर लागू हो गया है जीएसटी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मांग की कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से लंगर सेवा के लिए खरीदी जाने वाली रसद को जीएसटी एक्ट से छूट दी जाए।
हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब सरकार ने इससे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को श्री दरबार साहिब अमृतसर, श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर और तलवंडी साबो बठिंडा में लंगर सेवा के लिए खरीदी जाने वाली रसद को वैट से छूट दी थी। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) देसी घी, चीनी और दालों की खरीद पर करीब 75 लाख रुपये खर्च करती है। अब यह सारी खरीदारी करने पर उसे 10 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा क्योंकि यह सारी वस्तुएं 5 से 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में आती हैं।
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उन्होंने वित्त मंत्री से अपील की कि समाज में धर्म, जाति, रंग और नस्ल के भेदभाव को खत्म करने और बराबरी को प्रोत्साहित करने के लिए श्री गुरु नानक देव जी ने 1481 में लंगर की प्रथा शुरू की थी। उन्होंने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई चलाई जाती है, जहां सारा साल लाखों लोगों को मुफ्त लंगर कराया जाता है। इस लंगर का खर्च लोगों से मिले दान से ही चलता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की सिफारिश पर नए जीएसटी एक्ट के सेक्शन 11 और आईजीएसटी एक्ट के सेक्शन 6 योग्य संस्थाओं और कारोबारी अदारों को यह छूट दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के प्रधान किपाल सिंह बडूंगर इस संबंध में पहले ही उनसे मिल चुके हैं।
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