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सुंदर कांड प्रसंग का हुआ आयोजन
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सुंदरकांड का प्रसंग भक्त और भगवान का मिलन
सेक्टर-34 में स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से हुआ कार्यक्रम, मैथिली भारती ने दिए प्रवचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग पंजाब की ओर से सेक्टर-34 में नववर्ष के उपलक्ष्य में सुमधुर संगीत से ओत प्रोत सुंदर कांड प्रसंग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी मैथिली भारती ने दिव्य प्रवचन दिए। मैथिली भारती ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि सुंदरकांड प्रसंग में भक्त और भगवान का मिलन होता है, इसलिए इसे सुंदर कहा गया है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि सुंदरकांड की यात्रा एक जीवात्मा की यात्रा है। जब एक जीवात्मा भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ती है तो उसके मार्ग में बहुत से अवरोधक आते हैं। जैसे हनुमान जी के मार्ग में आए। सबसे पहले मैनाक पर्वत, उसके बाद सुरसा नामक राक्षस और अंत में सिंहिका। साध्वी मैथिली भारती ने कहा कि मैनाक पर्वत आलस्य का प्रतिक है। सुरसा तृष्णा का और सिंहिका ईर्ष्या का। जैसे हनुमान जी इन सभी को पार करते हुए समुद्र के दूसरे तट तक पहुंच जाते हैं ऐसे ही एक भक्त को भी भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए आलस्य, तृष्णा, ईर्ष्या, रोग, द्वेष को समाप्त करना होगा तभी वह भक्ति पर आगे बढ़ सकता है। सुंदरकांड प्रसंग को विराम हनुमान चालीसा व प्रभु की पावन आरती से दिया गया। इस अवसर पर सेहत विभाग पंजाब की ओर से सूरज कुमार प्रधान, हेल्थ मेडिकल डायरेक्टर इंप्लाइज यूनियन, संदीप कुमार महासचिव, अजय प्रीत सिंह वित्त सचिव, अमित कुमार एमडी पीचएससी डॉक्टर जसपाल कौर डीएचएस, डॉक्टर जसपाल सिंह बरसी डायरेक्टर ईएसआई, डॉक्टर अवनीत कौर डायरेक्टर एनएचएम एवं डॉक्टर अविनाश कुमार डायरेक्टर डीआरएमई उपस्थित थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टर नरेश कांसल डायरेक्टर डीएफडब्लू को उनका कार्यकाल पूरा होने पर सम्मानित किया गया।
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सुंदरकांड का प्रसंग भक्त और भगवान का मिलन
सेक्टर-34 में स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से हुआ कार्यक्रम, मैथिली भारती ने दिए प्रवचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग पंजाब की ओर से सेक्टर-34 में नववर्ष के उपलक्ष्य में सुमधुर संगीत से ओत प्रोत सुंदर कांड प्रसंग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी मैथिली भारती ने दिव्य प्रवचन दिए। मैथिली भारती ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि सुंदरकांड प्रसंग में भक्त और भगवान का मिलन होता है, इसलिए इसे सुंदर कहा गया है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि सुंदरकांड की यात्रा एक जीवात्मा की यात्रा है। जब एक जीवात्मा भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ती है तो उसके मार्ग में बहुत से अवरोधक आते हैं। जैसे हनुमान जी के मार्ग में आए। सबसे पहले मैनाक पर्वत, उसके बाद सुरसा नामक राक्षस और अंत में सिंहिका। साध्वी मैथिली भारती ने कहा कि मैनाक पर्वत आलस्य का प्रतिक है। सुरसा तृष्णा का और सिंहिका ईर्ष्या का। जैसे हनुमान जी इन सभी को पार करते हुए समुद्र के दूसरे तट तक पहुंच जाते हैं ऐसे ही एक भक्त को भी भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए आलस्य, तृष्णा, ईर्ष्या, रोग, द्वेष को समाप्त करना होगा तभी वह भक्ति पर आगे बढ़ सकता है। सुंदरकांड प्रसंग को विराम हनुमान चालीसा व प्रभु की पावन आरती से दिया गया। इस अवसर पर सेहत विभाग पंजाब की ओर से सूरज कुमार प्रधान, हेल्थ मेडिकल डायरेक्टर इंप्लाइज यूनियन, संदीप कुमार महासचिव, अजय प्रीत सिंह वित्त सचिव, अमित कुमार एमडी पीचएससी डॉक्टर जसपाल कौर डीएचएस, डॉक्टर जसपाल सिंह बरसी डायरेक्टर ईएसआई, डॉक्टर अवनीत कौर डायरेक्टर एनएचएम एवं डॉक्टर अविनाश कुमार डायरेक्टर डीआरएमई उपस्थित थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टर नरेश कांसल डायरेक्टर डीएफडब्लू को उनका कार्यकाल पूरा होने पर सम्मानित किया गया।