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दूषित जलापूर्ति के खिलाफ एकजुट हुए पंजाब-राजस्थान के किसान
Updated Mon, 23 Apr 2018 10:08 PM IST
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किसानों ने गंग नहर से भरे पानी के नमूने
दूषित जलापूर्ति के खिलाफ एकजुट हुए पंजाब-राजस्थान के किसान
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अलावा पंजाब व राजस्थान सरकार के द्वार तक दस्तक देने के बावजूद सरहिंद नहर, गंगकनाल, फिरोजपुर फीडर व इंदिरागांधी कैनाल से रसायनयुक्त गंदे पानी की आपूर्ति में जब एक दशक के बावजूद भी कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद पंजाब व राजस्थान के किसानों ने सांझा मोर्चा गठित किया। मोर्चा ने सोमवार को गांव गुमजाल-साधूवाली अंर्तराज्जीय सीमा के पास गंग कैनाल से गंदे पानी के नमूने भी जांच करवाने के लिए भरे।
किसान संघर्ष समिति के नेता अमर सिंह विश्नोई व सुभाष सहगल ने बताया कि गत माह राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था। इस पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह मामला हल करवाने का विश्वास दिलाया था। सिंधिया ने दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूरतगढ आगमन पर उनकी उपस्थिति में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से सीधा सवाल पूछा था कि आखिर कब तक लोगों को गंदे पानी की आपूर्ति करते रहोगे। जिस पर बादल खामोशी ही रहे।
सहगल ने बताया कि हनुमानगढ़ जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष शोभा डूडी व उपाध्यक्ष शबनम गोदारा ने एनजीटी में गंदे पानी की आपूर्ति के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार व पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जमकर लताड़ लगाई। लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। सिंधिया के आगमन पर शबनम गोदारा ने किसानों का 10 किमी लंबा रोष मार्च भी इसी मुद्दे को लेकर निकाला था।
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विश्नोई ने बताया कि पानी का नमूना लेकर जब वह श्रीगंगानगर स्थित सरकारी रसायनशाला में गए तो बताया गया कि पानी में जो लौह तत्व आदि मिश्रित हैं, उनकी पहचान करना यहां संभव नहीं है। अब स्थिति यह है कि दिल्ली स्थित केंद्रीय रसायनशाला में यदि नमूना जांच के लिए भेजा जाता है तो उसके लिए किसानों को करीब 50 हजार रुपये शुल्क अदा करना होगा। उन्होंने कहा कि गंदे पानी की आपूर्ति के कारण जिला फाजिल्का के अलावा जिला श्रीगंगानगर व जिला हनुमानगढ़ में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कैप्टनसरकार को प्राथमिकता के आधार पर इस समस्या पर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा जो औद्योगिक इकाईयां केमिकल की गंदगी नहरी पानी में छोड़ रही हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही लुधियाना के बुड्ढा नाला के माध्यम से सरहिंद नहर में डाली जा रही सीवरेज की गंदगी पर रोक लगाई जाए। किसान संघर्ष समिति ने पंजाब के किसानों को साथ लेकर यह मामला पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय में उठाने का निर्णय लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वार पर भी दस्तक दी जाएगी।
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दूषित जलापूर्ति के खिलाफ एकजुट हुए पंजाब-राजस्थान के किसान
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के अलावा पंजाब व राजस्थान सरकार के द्वार तक दस्तक देने के बावजूद सरहिंद नहर, गंगकनाल, फिरोजपुर फीडर व इंदिरागांधी कैनाल से रसायनयुक्त गंदे पानी की आपूर्ति में जब एक दशक के बावजूद भी कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद पंजाब व राजस्थान के किसानों ने सांझा मोर्चा गठित किया। मोर्चा ने सोमवार को गांव गुमजाल-साधूवाली अंर्तराज्जीय सीमा के पास गंग कैनाल से गंदे पानी के नमूने भी जांच करवाने के लिए भरे।
किसान संघर्ष समिति के नेता अमर सिंह विश्नोई व सुभाष सहगल ने बताया कि गत माह राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था। इस पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह मामला हल करवाने का विश्वास दिलाया था। सिंधिया ने दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूरतगढ आगमन पर उनकी उपस्थिति में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से सीधा सवाल पूछा था कि आखिर कब तक लोगों को गंदे पानी की आपूर्ति करते रहोगे। जिस पर बादल खामोशी ही रहे।
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सहगल ने बताया कि हनुमानगढ़ जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष शोभा डूडी व उपाध्यक्ष शबनम गोदारा ने एनजीटी में गंदे पानी की आपूर्ति के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार व पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जमकर लताड़ लगाई। लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। सिंधिया के आगमन पर शबनम गोदारा ने किसानों का 10 किमी लंबा रोष मार्च भी इसी मुद्दे को लेकर निकाला था।
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विश्नोई ने बताया कि पानी का नमूना लेकर जब वह श्रीगंगानगर स्थित सरकारी रसायनशाला में गए तो बताया गया कि पानी में जो लौह तत्व आदि मिश्रित हैं, उनकी पहचान करना यहां संभव नहीं है। अब स्थिति यह है कि दिल्ली स्थित केंद्रीय रसायनशाला में यदि नमूना जांच के लिए भेजा जाता है तो उसके लिए किसानों को करीब 50 हजार रुपये शुल्क अदा करना होगा। उन्होंने कहा कि गंदे पानी की आपूर्ति के कारण जिला फाजिल्का के अलावा जिला श्रीगंगानगर व जिला हनुमानगढ़ में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कैप्टनसरकार को प्राथमिकता के आधार पर इस समस्या पर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा जो औद्योगिक इकाईयां केमिकल की गंदगी नहरी पानी में छोड़ रही हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही लुधियाना के बुड्ढा नाला के माध्यम से सरहिंद नहर में डाली जा रही सीवरेज की गंदगी पर रोक लगाई जाए। किसान संघर्ष समिति ने पंजाब के किसानों को साथ लेकर यह मामला पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय में उठाने का निर्णय लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वार पर भी दस्तक दी जाएगी।