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गढ़शंकर में नगर परिषद का बजट प्रस्ताव निरस्त

Thu, 29 Mar 2018 10:20 PM IST
Updated Thu, 29 Mar 2018 10:20 PM IST
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गढ़शंकर में नगर परिषद का बजट प्रस्ताव निरस्त
गढ़शंकर में नगर परिषद का बजट प्रस्ताव निरस्त
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नगर काउंसिल अध्यक्ष शूका बोले-बजट का विरोध सिर्फ घटिया राजनीतिक ड्रामा
बजट विरोधी पार्षद बोले- बजट लोक हित में नहीं है
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर। नगर काउंसिल गढ़शंकर के ईओ विकास उप्पल-बजट मीटिंग में तेरह पार्षद शामिल हुए और उनमें से सात पार्षद बजट के खिलाफ और चार पक्ष में थे। जिसके कारण बजट रद्द हो गया। जबकि इस बजट में न तो कोई नया टैक्स लगाया गया था और न ही कुछ न और नया था। फिर भी कोई बजट को लोग विरोधी कहना गलत है। जिसके बाद खर्च की मीटिंग करने का कोई अर्थ ही नहीं था और अब जब बजट पास नहीं हुआ तो विकास कार्यों व खर्चों के लिए पैसे का कोई प्रवाधान नहीं तो अव विकास का काम व अन्य काम भी प्रभावित होगे। लेकिन अब जल्दी डिप्टी डायरेक्टर से आज्ञा लेकर दोबारा मीटिंग बुलाई जाएगी। अगर फिर भी बजट पास नहीं हुआ तो बजट को ईओ बजट के तौर पर पास कर दिया जाएगा।
गढ़शंकर नगर काउंसिल कि अध्यक्ष रजिंद्र सिंह शूूका ने कहा कि पिछले वार्षिक बजट में जो बातें थी, वही इस बार थी। और न ही किसी नए टैक्स का प्रोविजन थी। फिर भी बजट को रिजेक्ट करना समझ से दूर है। इससे शहर के विकास के काम प्रभावित होगे। इसे अगर मैं एक शब्द में कहूं तो यह एक घटिया राजनीति का नमूना है।
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बजट लोग हित में नहीं था
पार्षद सोम नाथ बंगड़ ने कहा कि बजट लोग हित में नहीं था तो हमें कैसे स्वीकार हो सकता था। इस बजट में शहर के बाहर की अबादी के लिए विकास कार्यों के लिए कुछ नहीं था। नए कर्मचारियों के बारे में कोई जिक्र न होना और जो सफाई सेवक प्रति सफाई सेवक 2400 रुपये में काम करते हैं, उनके लिए पैसा रखने का बजट में कोई प्रावधान नहीं था। इससे कोई विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। नगर काउंसिल के अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष विकास कि लिए रखी राशि से कौन से विकास कार्य हुए हैं। शहर में सड़कों की हालत बदतर है तो विकास का पैसा कहां गया। डिप्टी डायरेक्टर तीन मीटिंग और बुलाकर पार्षदों की ओर से उठाए एतराजो को दूर करने के निर्देश देंगे।
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जिन्हें नियम नहीं पता, वह इस्तीफा दें
ठेकेदार कुलभूशन शौरी ने कहा कि जिन पार्षदों को नियमों का ज्ञान नहीं उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। हाउस में जिस मुद्दे पर मीटिंग रद्द हुई हो उस पर छह महीने के बाद ही अब मीटिंग हो सकती है। जिससे शहर में चल रहे विकास कार्य ठप हो जाएगे और कौसिंल को अन्य खर्चो के लिए पैसे की परेशानी का साहमना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्षदों को राजनीती छोड़ शहर के विकास को प्राथमिकता देने के लिए कार्य करना चाहिए।
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