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0परिजनों ने स्कूल प्रबंधकों पर लगाया गरीब विद्यार्थियों से जबरन फीसें वसूलने का आरोप ।
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:29 PM IST
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स्कूल प्रबंधकों पर गरीब विद्यार्थियों से जबरन फीस वसूलने का आरोप
एग्जाम के दिनों में फीस का मतलब ही नहीं, शरारती तत्व स्कूल सिस्टम को खराब करने की ताक में
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला।
आर्य समाज के नेतृत्व में शहर में चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में शामिल गांधी आर्य हाई स्कूल जो सरकार से सहायता प्राप्त है, उसके प्रबंधकों के खिलाफ शहर के कुछ गरीब व दलित परिवारों ने शनिवार को रात एक मंदिर में बैठक की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बच्चों से फंड और दान के तौर पर वसूली की जा रही है। जबकि स्कूल प्रबंधकों ने इस आरोप को गलत और साजिशपूर्ण बताया है। गौर हो इंसाफ पाने के लिए स्कूल विद्यार्थियों के परिजनों ने सात मेंबरी संघर्ष कमेटी का गठन भी किया है। जिसमें चरणजीत कौर, परमजीत कौर, नीलम रानी, मीना, अनीता, शमां और शबीया खान शामिल हैं। संघर्ष कमेटी ने चेतावनी दी है कि वे डिप्टी कमिश्नर के सामने स्कूल प्रबंधकों की गतिविधियों का सबूत देंगे।
शिव मठ मंदिर में शनिवार शाम एकत्रित परिजनों की सभा को संबोधित करते इंकलाबी केंद्र पंजाब के जिला अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पाल, अमरजीत कौर और नारायण दत्त ने कहा कि शिक्षा अधिकार नियमानुसार पहली से आठवीं तक के बच्चों से कोई भी शिक्षण संस्थान किसी तरह का फंड या दान नहीं ले सकता। रोष जताते हुए परिजनों ने बताया कि दान के नाम पर दाखिला फीस जमा न कराने वाले बच्चों को स्कूल प्रबंधक परेशान करते हैं। कभी-कभी जलील करके स्कूल से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों को वर्दी व किताबें तो क्या देनी थी उन्हें मिड-डे मील तक नहीं दिया जा रहा। परिजनों ने कहा कि इस स्कूल के आस पास स्थित बस्तियों में रहने वाले अधिकांश परिवार दलित व गरीब हैं। जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए दूर-दराज स्कूलों में नहीं भेज सकते। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर और जिला शिक्षा अधिकारी को भी शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन राजनीतिक पहुंच होने के कारण स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
किसी किस्म की फीस वसूली नहीं हो रही : प्रिंसिपल
गांधी आर्य हाई स्कूल के प्रिंसिपल राम कुमार सोबती का कहना है कि यह दिन परीक्षा के दिन हैं। किसी किस्म की फीस वसूली नहीं हो रही। उनके स्कूल में मान्यता प्राप्त आठ अध्यापक हैं, जबकि बच्चों की संख्या 1300 है। जिनमें अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से संबंधित हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए गैर -मान्यता प्राप्त 40 अध्यापकों को रखा गया है। स्कूल के पास सरकार की ओर से कोई फंड वगैरह रिलीज नहीं हो रहे, ऐसे हालात में अन-एडेड 40 अध्यापकों को सेलरीज का प्रबंध करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लगाए जा रहे आरोप गलत हैं, कुछ शरारती लोग उनके स्कूल की छवि को खराब करना चाहते हैं।
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फोटो कैप्शन: 18 बीएनएल-55पी-स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ हुई बैठक में शामिल विद्यार्थियों के परिजनों को संबोधित करते हुए इंकलाबी नेता नारायण दत्त।
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एग्जाम के दिनों में फीस का मतलब ही नहीं, शरारती तत्व स्कूल सिस्टम को खराब करने की ताक में
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला।
आर्य समाज के नेतृत्व में शहर में चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में शामिल गांधी आर्य हाई स्कूल जो सरकार से सहायता प्राप्त है, उसके प्रबंधकों के खिलाफ शहर के कुछ गरीब व दलित परिवारों ने शनिवार को रात एक मंदिर में बैठक की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बच्चों से फंड और दान के तौर पर वसूली की जा रही है। जबकि स्कूल प्रबंधकों ने इस आरोप को गलत और साजिशपूर्ण बताया है। गौर हो इंसाफ पाने के लिए स्कूल विद्यार्थियों के परिजनों ने सात मेंबरी संघर्ष कमेटी का गठन भी किया है। जिसमें चरणजीत कौर, परमजीत कौर, नीलम रानी, मीना, अनीता, शमां और शबीया खान शामिल हैं। संघर्ष कमेटी ने चेतावनी दी है कि वे डिप्टी कमिश्नर के सामने स्कूल प्रबंधकों की गतिविधियों का सबूत देंगे।
शिव मठ मंदिर में शनिवार शाम एकत्रित परिजनों की सभा को संबोधित करते इंकलाबी केंद्र पंजाब के जिला अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पाल, अमरजीत कौर और नारायण दत्त ने कहा कि शिक्षा अधिकार नियमानुसार पहली से आठवीं तक के बच्चों से कोई भी शिक्षण संस्थान किसी तरह का फंड या दान नहीं ले सकता। रोष जताते हुए परिजनों ने बताया कि दान के नाम पर दाखिला फीस जमा न कराने वाले बच्चों को स्कूल प्रबंधक परेशान करते हैं। कभी-कभी जलील करके स्कूल से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों को वर्दी व किताबें तो क्या देनी थी उन्हें मिड-डे मील तक नहीं दिया जा रहा। परिजनों ने कहा कि इस स्कूल के आस पास स्थित बस्तियों में रहने वाले अधिकांश परिवार दलित व गरीब हैं। जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए दूर-दराज स्कूलों में नहीं भेज सकते। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर और जिला शिक्षा अधिकारी को भी शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन राजनीतिक पहुंच होने के कारण स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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किसी किस्म की फीस वसूली नहीं हो रही : प्रिंसिपल
गांधी आर्य हाई स्कूल के प्रिंसिपल राम कुमार सोबती का कहना है कि यह दिन परीक्षा के दिन हैं। किसी किस्म की फीस वसूली नहीं हो रही। उनके स्कूल में मान्यता प्राप्त आठ अध्यापक हैं, जबकि बच्चों की संख्या 1300 है। जिनमें अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से संबंधित हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए गैर -मान्यता प्राप्त 40 अध्यापकों को रखा गया है। स्कूल के पास सरकार की ओर से कोई फंड वगैरह रिलीज नहीं हो रहे, ऐसे हालात में अन-एडेड 40 अध्यापकों को सेलरीज का प्रबंध करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लगाए जा रहे आरोप गलत हैं, कुछ शरारती लोग उनके स्कूल की छवि को खराब करना चाहते हैं।
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फोटो कैप्शन: 18 बीएनएल-55पी-स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ हुई बैठक में शामिल विद्यार्थियों के परिजनों को संबोधित करते हुए इंकलाबी नेता नारायण दत्त।