{"_id":"5aad6fc14f1c1ba8758b608f","slug":"151521315777-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सभी केद्र......जगतार सिंह तारा को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सभी केद्र......जगतार सिंह तारा को उम्रकैद
Updated Sun, 18 Mar 2018 01:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संशोधित : मैटर में बदलाव किया गया है।
-----------------
महत्वपूर्ण...सभी केंद्र
बेअंत सिंह हत्याकांड: जिंदा रहने तक जेल में रहेगा जगतार सिंह तारा
सबहेड
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस सिद्घू की अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
प्वाइंटर
तारा ने कहा- बेअंत सिंह के मरने का अफसोस नहीं लेकिन 16 अन्य के मरने का अफसोस जरूर है
- सजा सुनाए जाने के बाद जेल के बाहर समर्थकों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अगस्त 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट कर हत्या करने के मामले में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और बब्बर खालसा ग्रुप के सदस्य जगतार सिंह तारा को शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस सिद्धू की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के मुताबिक तारा जब तक जिंदा रहेगा, वह जेल में रहेगा। अदालत ने उस पर 35 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। तारा को सजा सुनाए जाने के बाद जेल के बाहर सुबह से मौजूद समर्थकों ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए।
सजा सुनाए जाने से पहले जगतार सिंह तारा ने अदालत के समक्ष कहा कि उसे इस घटना को लेकर कोई अफसोस नहीं है। हालांकि बम ब्लास्ट में बेअंत सिंह के अलावा मारे गए 16 अन्य लोगों और 15 लोगों के घायल होने का अफसोस उसे जरूर है। तारा ने कहा कि उसने जो कुछ किया, वह अपनी कौम के लिए किया।
इससे पहले सीबीआई के वकील एसके सक्सेना ने अदालत से दोषी के अपराध को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट श्रेणी का मानते हुए फांसी की सजा की मांग की। साथ ही कहा कि अगर फांसी की सजा न हो तो सशर्त आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाए। इसमें शर्त यह हो कि उसे कभी पैरोल न दी जाए। सुबह करीब 11 बजे अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे अदालत ने जगतार सिंह तारा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 35 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने के समय तारा की बहन सरबजीत कौर, भाभी बलजीत कौर व कमलजीत कौर के अलावा भतीजियां गगनदीप, पवनदीप, गुरप्रीत और अमनदीप मौजूद रहीं। तारा के पारिवारिक सदस्यों ने जेल से बाहर आकर अदालत के फैसले पर संतोष जताया। फैसले के बाद जेल के बाहर सुबह से मौजूद समर्थकों ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए।
विज्ञापन
बाक्स
इन धाराओं में पाया दोषी और सजा
- आईपीसी की 120बी आर/डब्ल्यू 302 और 4, 5 विस्फोटक अधिनियम के तहत उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माना
- आईपीसी की धारा 109 आर/डब्ल्यू 302 के तहत उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माना
- आईपीसी की धारा 109 आर/डब्ल्यू 307 के तहत 10 साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना
- विस्फोटक अधिनियम की धारा 4 (बी) (2) के तहत दस साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना
- विस्फोटक अधिनियम की धारा 6 आर/डब्ल्यू 4 के तहत दस साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना
बम ब्लास्ट से की थी हत्या
31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास बम ब्लास्ट कर पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी, वहीं 15 लोग गंभीर घायल हो गए थे। यह आत्मघाती हमला केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने किया था। मरने वाले कुल 18 लोगों में वह भी शामिल था। अदालत ने हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा को पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट जारी किए थे। हालांकि, किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी। वहीं, जगतार सिंह हवारा को भी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में ऊपरी अदालत ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
विज्ञापन
-----------------
महत्वपूर्ण...सभी केंद्र
बेअंत सिंह हत्याकांड: जिंदा रहने तक जेल में रहेगा जगतार सिंह तारा
सबहेड
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस सिद्घू की अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
प्वाइंटर
तारा ने कहा- बेअंत सिंह के मरने का अफसोस नहीं लेकिन 16 अन्य के मरने का अफसोस जरूर है
- सजा सुनाए जाने के बाद जेल के बाहर समर्थकों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अगस्त 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट कर हत्या करने के मामले में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और बब्बर खालसा ग्रुप के सदस्य जगतार सिंह तारा को शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस सिद्धू की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के मुताबिक तारा जब तक जिंदा रहेगा, वह जेल में रहेगा। अदालत ने उस पर 35 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। तारा को सजा सुनाए जाने के बाद जेल के बाहर सुबह से मौजूद समर्थकों ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए।
सजा सुनाए जाने से पहले जगतार सिंह तारा ने अदालत के समक्ष कहा कि उसे इस घटना को लेकर कोई अफसोस नहीं है। हालांकि बम ब्लास्ट में बेअंत सिंह के अलावा मारे गए 16 अन्य लोगों और 15 लोगों के घायल होने का अफसोस उसे जरूर है। तारा ने कहा कि उसने जो कुछ किया, वह अपनी कौम के लिए किया।
विज्ञापन
इससे पहले सीबीआई के वकील एसके सक्सेना ने अदालत से दोषी के अपराध को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट श्रेणी का मानते हुए फांसी की सजा की मांग की। साथ ही कहा कि अगर फांसी की सजा न हो तो सशर्त आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाए। इसमें शर्त यह हो कि उसे कभी पैरोल न दी जाए। सुबह करीब 11 बजे अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे अदालत ने जगतार सिंह तारा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 35 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने के समय तारा की बहन सरबजीत कौर, भाभी बलजीत कौर व कमलजीत कौर के अलावा भतीजियां गगनदीप, पवनदीप, गुरप्रीत और अमनदीप मौजूद रहीं। तारा के पारिवारिक सदस्यों ने जेल से बाहर आकर अदालत के फैसले पर संतोष जताया। फैसले के बाद जेल के बाहर सुबह से मौजूद समर्थकों ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए।
विज्ञापन
बाक्स
इन धाराओं में पाया दोषी और सजा
- आईपीसी की 120बी आर/डब्ल्यू 302 और 4, 5 विस्फोटक अधिनियम के तहत उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माना
- आईपीसी की धारा 109 आर/डब्ल्यू 302 के तहत उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माना
- आईपीसी की धारा 109 आर/डब्ल्यू 307 के तहत 10 साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना
- विस्फोटक अधिनियम की धारा 4 (बी) (2) के तहत दस साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना
- विस्फोटक अधिनियम की धारा 6 आर/डब्ल्यू 4 के तहत दस साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना
बम ब्लास्ट से की थी हत्या
31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास बम ब्लास्ट कर पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी, वहीं 15 लोग गंभीर घायल हो गए थे। यह आत्मघाती हमला केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने किया था। मरने वाले कुल 18 लोगों में वह भी शामिल था। अदालत ने हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा को पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट जारी किए थे। हालांकि, किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी। वहीं, जगतार सिंह हवारा को भी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में ऊपरी अदालत ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।