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नन्ही जान को पीजीआई ने दिया खाने का वरदान
Updated Mon, 19 Jun 2017 01:51 AM IST
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नन्ही जान को पीजीआई ने दिया खाने का वरदान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
19 नन्ही जानों को पीजीआई ने खाने का वरदान दिया है। इन शिशुओं की जन्म के वक्त खाने की पाइप अधूरी थी। वैसे खाने की पाइप श्वास नली से जुड़कर नीचे पेट से जुड़ी होती है, लेकिन कई नवजातों में ऐसा नहीं होता। ऐसे बच्चे कुछ भी नहीं खा पाते। हर वक्त उनके मुंह से लार निकलती रहती है। हर 2500-3000 में से एक बच्चा इससे पीड़ित होता है। चिकित्सा भाषा में इसे ट्रैकिआ-ओऐसाफैजल फिस्टुला कहते हैं। पीजीआई के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट ने एक हफ्ते में ऐसे 19 बच्चों को ठीक करने में सफलता प्राप्त की है।
पहली बार नीकू में 19 मरीज
पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर राम समुझ ने बताया कि इससे पहले 11 केसों को ठीक किया गया था। यह पहली बार है, जब नीकू में एक साथ 19 पेशेंट हों। सर्जरी के बाद सभी पूरी तरह से ठीक हैं। इन केसों को गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में भेजने की तैयारी हो रही है। आज से 19 साल पहले उन्होंने एक पेशेंट को ठीक किया था। अब वह पूरी तरह से ठीक है। इस समय वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
सर्जरी से ठीक किया जाता है
प्रोफेसर राम समुझ ने बताया कि इन पेशेंट की सर्जरी की जाती है। इसमें नवजात को तुरंत शल्य चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। इसमें फूड पाइप को जोड़ दिया जाता है, जिससे नवजात को आहार मिलने लगता है। यदि सर्जरी में देरी होती है तो इससे बच्चे को दूसरी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। कई केसों में देखा गया है कि सर्जरी में देरी होने से बच्चों के लंग्स खराब हो जाते हैं।
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हर साल 250 से ज्यादा केस आते हैं
पीजीआई के विशेषज्ञों ने बताया कि हर साल 250 से ज्यादा ऐसे केस आते हैं। इनमें हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के केस शामिल होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों में पीडियाट्रिक सर्जरी की कमी है। इसलिए पीजीआई के सेंटर में केस रेफर किए जाते हैं।
19 नवजातों की फूड पाइप जुड़ी नहीं थी, एक हफ्ते में पीजीआई ने सभी को ठीक किया
इससे पहले 11 नवजातों की सर्जरी की थी, गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में भेजने की तैयारी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
19 नन्ही जानों को पीजीआई ने खाने का वरदान दिया है। इन शिशुओं की जन्म के वक्त खाने की पाइप अधूरी थी। वैसे खाने की पाइप श्वास नली से जुड़कर नीचे पेट से जुड़ी होती है, लेकिन कई नवजातों में ऐसा नहीं होता। ऐसे बच्चे कुछ भी नहीं खा पाते। हर वक्त उनके मुंह से लार निकलती रहती है। हर 2500-3000 में से एक बच्चा इससे पीड़ित होता है। चिकित्सा भाषा में इसे ट्रैकिआ-ओऐसाफैजल फिस्टुला कहते हैं। पीजीआई के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट ने एक हफ्ते में ऐसे 19 बच्चों को ठीक करने में सफलता प्राप्त की है।
पहली बार नीकू में 19 मरीज
पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर राम समुझ ने बताया कि इससे पहले 11 केसों को ठीक किया गया था। यह पहली बार है, जब नीकू में एक साथ 19 पेशेंट हों। सर्जरी के बाद सभी पूरी तरह से ठीक हैं। इन केसों को गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में भेजने की तैयारी हो रही है। आज से 19 साल पहले उन्होंने एक पेशेंट को ठीक किया था। अब वह पूरी तरह से ठीक है। इस समय वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
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सर्जरी से ठीक किया जाता है
प्रोफेसर राम समुझ ने बताया कि इन पेशेंट की सर्जरी की जाती है। इसमें नवजात को तुरंत शल्य चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। इसमें फूड पाइप को जोड़ दिया जाता है, जिससे नवजात को आहार मिलने लगता है। यदि सर्जरी में देरी होती है तो इससे बच्चे को दूसरी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। कई केसों में देखा गया है कि सर्जरी में देरी होने से बच्चों के लंग्स खराब हो जाते हैं।
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हर साल 250 से ज्यादा केस आते हैं
पीजीआई के विशेषज्ञों ने बताया कि हर साल 250 से ज्यादा ऐसे केस आते हैं। इनमें हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के केस शामिल होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों में पीडियाट्रिक सर्जरी की कमी है। इसलिए पीजीआई के सेंटर में केस रेफर किए जाते हैं।
19 नवजातों की फूड पाइप जुड़ी नहीं थी, एक हफ्ते में पीजीआई ने सभी को ठीक किया
इससे पहले 11 नवजातों की सर्जरी की थी, गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में भेजने की तैयारी