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गेहूं में पीलापन आने से घट सकती है पैदावार : डॉ. मलिक
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- किसान गोष्ठी में कहा- कारण जानकर अच्छी पैदावार के लिए करें समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। किसान कल्याण मंच की ओर से बुधवार को गांव पेलक में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक मौजूद रहे। इस दौरान डॉ. मलिक ने कहा कि गेंहू फसल में पीलापन आने से उसकी पैदावार घट सकती है। पीलेपन की समस्या व भीषण सर्दी और शीत लहर के लगातार प्रकोप से फसलों को बचाना जरूरी है। इस समय विशेष रूप से गेहूं में कई क्षेत्रों में पौधे व पत्तियां पीली पड़ने व कम फुटाव व बढ़ाव की समस्या दिखाई दे रही है। सरसों में भी तना गलन तथा चेपा कीट दिखाई पड़ने लगा है। इसलिए किसान को गेहूं में पीला पड़ने की समस्या का उचित कारण जानकर अच्छी पैदावार के लिए उसका समाधान करना आवश्यक है।
डॉ. मलिक ने कहा कि कुछ किसान गेहूं बिजाई के समय यूरिया खाद नहीं डालते। इससे गेहूं की फसल में पीलापन आना स्वाभाविक है। नाइट्रोजन, गंधक, जिंक पोषक तत्वों की कमी, फसल में पानी खड़ा होना, शीतलहर व कोहरा, दीमक व पीला रतुआ के कारण गेहूं की फसल में पीलापन आ सकता है। किसान यदि बिजाई के समय जिंक नहीं डाल पाए तो इससे भी फसल पर पीलापन आ सकता है। चिकनी व भारी दोमट भूमि में सिंचाई का पानी देर तक खड़ा रहने से पीलापन आ गया हो तो फालतू पानी की निकासी कर दें और तीन प्रतिशत यूरिया घोल का छिड़काव फसल पर कर दें। कम गली सड़ी कच्ची गोबर की खाद डालने से भी पीलापन आ जाता है। इसलिए वहां घुलनशील उर्वरक एनपीके का 18 के अनुपात में छिड़काव कर दें। इस अवसर पर दयाराम, पूर्व सरपंच तीर्थराम, यादराम, सीताराम, प्रेमचंद, धर्मवीर, तेजपाल, मिश्री, बबली, प्रहलाद, मनोज, लीले, रामदेव, हरि, राजू मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। किसान कल्याण मंच की ओर से बुधवार को गांव पेलक में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक मौजूद रहे। इस दौरान डॉ. मलिक ने कहा कि गेंहू फसल में पीलापन आने से उसकी पैदावार घट सकती है। पीलेपन की समस्या व भीषण सर्दी और शीत लहर के लगातार प्रकोप से फसलों को बचाना जरूरी है। इस समय विशेष रूप से गेहूं में कई क्षेत्रों में पौधे व पत्तियां पीली पड़ने व कम फुटाव व बढ़ाव की समस्या दिखाई दे रही है। सरसों में भी तना गलन तथा चेपा कीट दिखाई पड़ने लगा है। इसलिए किसान को गेहूं में पीला पड़ने की समस्या का उचित कारण जानकर अच्छी पैदावार के लिए उसका समाधान करना आवश्यक है।
डॉ. मलिक ने कहा कि कुछ किसान गेहूं बिजाई के समय यूरिया खाद नहीं डालते। इससे गेहूं की फसल में पीलापन आना स्वाभाविक है। नाइट्रोजन, गंधक, जिंक पोषक तत्वों की कमी, फसल में पानी खड़ा होना, शीतलहर व कोहरा, दीमक व पीला रतुआ के कारण गेहूं की फसल में पीलापन आ सकता है। किसान यदि बिजाई के समय जिंक नहीं डाल पाए तो इससे भी फसल पर पीलापन आ सकता है। चिकनी व भारी दोमट भूमि में सिंचाई का पानी देर तक खड़ा रहने से पीलापन आ गया हो तो फालतू पानी की निकासी कर दें और तीन प्रतिशत यूरिया घोल का छिड़काव फसल पर कर दें। कम गली सड़ी कच्ची गोबर की खाद डालने से भी पीलापन आ जाता है। इसलिए वहां घुलनशील उर्वरक एनपीके का 18 के अनुपात में छिड़काव कर दें। इस अवसर पर दयाराम, पूर्व सरपंच तीर्थराम, यादराम, सीताराम, प्रेमचंद, धर्मवीर, तेजपाल, मिश्री, बबली, प्रहलाद, मनोज, लीले, रामदेव, हरि, राजू मौजूद रहे।
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