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Palwal News: खरीफ सीजन में मौसम मेहरबान, बारिश से खेती को नई उम्मीद
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बारिश न होने के कारण जहां मौसम बहुत गर्म था, किसानों के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें थीं
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। क्षेत्र में पिछले 48 घंटे से हो रही रिमझिम बारिश खरीफ सीजन के लिए राहत भरी सौगात बनकर आई। कई दिनों से उमस और तेज गर्मी झेल रहे किसानों को इस बारिश ने राहत दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्षा केवल धान ही नहीं, बल्कि मक्का, बाजरा, चारा फसलों और अन्य खरीफ फसलों के लिए भी बेहद लाभदायक साबित होगी।
बारिश न होने के कारण जहां मौसम बहुत गर्म था, वहीं किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। धान की रोपाई का काम अंतिम दौर में है, लेकिन पूरे सीजन के दौरान बारिश नहीं हुई। इससे किसान चिंतित थे, क्योंकि ट्यूबवेल का पानी धान व अन्य फसलों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता और बारिश का पानी बेहद जरूरी है।
कृषि विभाग के अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। यही कारण है कि किसान इसे आसमान से बरसी खाद भी कहते हैं। इससे फसलों की बढ़वार तेज होती है। पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और खेतों में मौजूद पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग हो पाता है। खंड में इस समय धान की रोपाई अंतिम चरण में है। अब तक करीब आठ हजार एकड़ क्षेत्र में रोपाई पूरी हो चुकी है। सीधी बिजाई के लिए करीब 3 हजार एकड़ का पंजीकरण किया गया है। ऐसे समय में हुई रिमझिम बारिश धान की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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सिंचाई के लिए बार-बार ट्यूबवेल नहीं चलाने पड़ेंगे
मलाई गांव के प्रगतिशील किसान मोहम्मद जकरिया ने कहा कि यदि आने वाले दिनों में भी समय-समय पर ऐसी बारिश होती रही तो किसानों को सिंचाई के लिए बार-बार ट्यूबवेल नहीं चलाने पड़ेंगे। इससे बिजली और डीजल की बचत होगी तथा भूजल स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वर्षा का पानी जमीन में समाकर भूजल का बढ़ाने में मदद करता है। इससे भविष्य में जल संकट की संभावना कम होती है। रिमझिम बारिश मक्का, बाजरा, ज्वार तथा हरे चारे की फसलों के लिए भी लाभकारी है। इससे खेतों में नमी बनी रहती है, अंकुरण और शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है तथा फसलों पर गर्मी का तनाव कम पड़ता है।
निर्धारित मात्रा में करें उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग
कृषि विभाग के अधिकारी मुकेश कुमार ने किसानों को सलाह दी कि बारिश के बाद खेतों का नियमित निरीक्षण करें और कृषि विभाग की सिफारिश के अनुसार ही निर्धारित मात्रा में कीटनाशकों एवं अन्य कृषि रसायनों का प्रयोग करें। अनावश्यक या अधिक मात्रा में दवाइयों का उपयोग न करें, ताकि फसल को पूरा लाभ मिल सके और उत्पादन बेहतर हो।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। क्षेत्र में पिछले 48 घंटे से हो रही रिमझिम बारिश खरीफ सीजन के लिए राहत भरी सौगात बनकर आई। कई दिनों से उमस और तेज गर्मी झेल रहे किसानों को इस बारिश ने राहत दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्षा केवल धान ही नहीं, बल्कि मक्का, बाजरा, चारा फसलों और अन्य खरीफ फसलों के लिए भी बेहद लाभदायक साबित होगी।
बारिश न होने के कारण जहां मौसम बहुत गर्म था, वहीं किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी। धान की रोपाई का काम अंतिम दौर में है, लेकिन पूरे सीजन के दौरान बारिश नहीं हुई। इससे किसान चिंतित थे, क्योंकि ट्यूबवेल का पानी धान व अन्य फसलों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता और बारिश का पानी बेहद जरूरी है।
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कृषि विभाग के अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। यही कारण है कि किसान इसे आसमान से बरसी खाद भी कहते हैं। इससे फसलों की बढ़वार तेज होती है। पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और खेतों में मौजूद पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग हो पाता है। खंड में इस समय धान की रोपाई अंतिम चरण में है। अब तक करीब आठ हजार एकड़ क्षेत्र में रोपाई पूरी हो चुकी है। सीधी बिजाई के लिए करीब 3 हजार एकड़ का पंजीकरण किया गया है। ऐसे समय में हुई रिमझिम बारिश धान की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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सिंचाई के लिए बार-बार ट्यूबवेल नहीं चलाने पड़ेंगे
मलाई गांव के प्रगतिशील किसान मोहम्मद जकरिया ने कहा कि यदि आने वाले दिनों में भी समय-समय पर ऐसी बारिश होती रही तो किसानों को सिंचाई के लिए बार-बार ट्यूबवेल नहीं चलाने पड़ेंगे। इससे बिजली और डीजल की बचत होगी तथा भूजल स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वर्षा का पानी जमीन में समाकर भूजल का बढ़ाने में मदद करता है। इससे भविष्य में जल संकट की संभावना कम होती है। रिमझिम बारिश मक्का, बाजरा, ज्वार तथा हरे चारे की फसलों के लिए भी लाभकारी है। इससे खेतों में नमी बनी रहती है, अंकुरण और शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है तथा फसलों पर गर्मी का तनाव कम पड़ता है।
निर्धारित मात्रा में करें उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग
कृषि विभाग के अधिकारी मुकेश कुमार ने किसानों को सलाह दी कि बारिश के बाद खेतों का नियमित निरीक्षण करें और कृषि विभाग की सिफारिश के अनुसार ही निर्धारित मात्रा में कीटनाशकों एवं अन्य कृषि रसायनों का प्रयोग करें। अनावश्यक या अधिक मात्रा में दवाइयों का उपयोग न करें, ताकि फसल को पूरा लाभ मिल सके और उत्पादन बेहतर हो।