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Palwal News: 9.26 करोड़ के टेंडर जारी, मंजूरी लंबित, गंदगी चरम पर

Wed, 30 Jul 2025 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल Updated Wed, 30 Jul 2025 11:36 PM IST
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Tender worth Rs 9.26 crore issued, approval pending, filth at its peak
संवाद न्यूज एजेंसी
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पलवल/हथीन। पलवल और हथीन शहर इन दिनों सफाई व्यवस्था के नाम पर भारी अव्यवस्था से गुजर रहे हैं। दो अलग-अलग नगर निकायों द्वारा कुल 9 करोड़ 26 लाख 35 हजार 535 रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। पलवल में जहां 2.40 करोड़ रुपये का टेंडर नई कंपनी को तीन महीने के लिए दिया गया है, वहीं हथीन में 6.86 करोड़ रुपये का सात साल का डोर-टू-डोर सफाई टेंडर चंडीगढ़ मुख्यालय की मंजूरी के इंतजार में अटका हुआ है।
पलवल शहर में सफाई व्यवस्था जून महीने से ही चरमराई हुई है। पुराने सफाई टेंडर की मियाद खत्म होने के बाद नगर परिषद ने तीन महीने के लिए भारतीय एचआर सोल्यूशन नामक कंपनी को सफाई का ठेका दिया है, लेकिन चार दिन बीतने के बावजूद भी सफाई कार्य में कोई ठोस बदलाव नहीं दिख रहा। बस स्टैंड मार्केट, झाबर नगर, ट्रैक्टर मार्केट, अनाज मंडी, रसूलपुर मोड़, किठवाड़ी चौक और ओल्ड सोहना रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कचरे के ढेर लगे हैं।
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नवीन टेंडर के बावजूद गलियों और घरों से नियमित कूड़ा नहीं उठ रहा, जिससे लोगों को बदबू का सामना करना पड़ रहा है। गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। बारिश के मौसम में गीले कचरे से उठती दुर्गंध और जलजनित रोगों की आशंका लोगों को डरा रही है। नगर परिषद की स्थायी सफाई निविदा प्रक्रिया को पूरा होने में अभी तीन महीने और लग सकते हैं, ऐसे में फिलहाल की व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।
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इधर, हथीन में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। नगर पालिका ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए सात साल का टेंडर निकाला है, जिसकी अनुमानित लागत 6 करोड़ 86 लाख 35 हजार 535 रुपये है। यह फाइल अब तक राज्य मुख्यालय चंडीगढ़ से स्वीकृत नहीं हुई है, जिस कारण कोई नई एजेंसी काम शुरू नहीं कर पाई है।


नगर पालिका सचिव देवेंद्र कुमार ने बताया कि नियमों के अनुसार मुख्यालय से मंजूरी के बिना कोई काम नहीं कराया जा सकता। पुरानी एजेंसी का कार्यकाल भी 30 जून को समाप्त हो गया है। पालिका ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कूड़ा उठवाने का प्रयास किया, लेकिन लघु अवधि के लिए निकाले गए टेंडर में कोई दिलचस्पी नहीं दिखी।




दोनों ही नगर निकायों की ढीली कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया की जटिलता के चलते आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत पर हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो शहरों की स्थिति बद से बदतर हो जाएगी।
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