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Palwal News: पहले नवरात्र को मां शैलपुत्री के जयकारों से गूंजे मंदिर

Thu, 03 Oct 2024 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल Updated Thu, 03 Oct 2024 11:59 PM IST
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Temples echoed with the praises of Maa Shailputri on the first Navratri.
- श्रद्धालुओं ने व्रत रख व विशेष पूजा-अर्चना कर मांगी परिवार की सुख-समृद्धि
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। पहले शारदीय नवरात्र के अवसर पर बृहस्पतिवार को मंदिरों में मां शैलपुत्री की विशेष पूजा की गई। सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। मंदिरों में मां दुर्गा के जयकारे गूंजने लगे। भक्तों ने घरों में देवी मईया की स्थापना कर विधि-विधान से आराधना की। शहर में सबसे अधिक भीड़ कमेटी चौक स्थित देवी मंदिर में नजर आई। मंदिर में कीर्तन चलता रहा और महिलाओं ने भजनों पर नृत्य भी किया। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने मंदिर में पुजारी से मां शैलपुत्री की कथा सुनी। मंदिरों के बाहर फूलों और पूजन सामग्री की दुकानें सजी हुई थीं।
नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही शहर के मंदिर जंगेश्वर मंदिर, कामेश्वर मंदिर, पचोवन पंचवटी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, भूरागिरी, खोंटा मंदिर, श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर के अलावा गांवों में स्थित मंदिरों में श्रद्धालुओं का पहुंचाना शुरू हो गया था। लोगों ने मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए पूजा-अर्चना की। नवरात्र पर कोई घटना न घटे इसके लिए मंदिरों में पुलिस द्वारा सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है। मंदिरों में आईं श्रद्धालु किरण, नव्या, काजल, नव्या, ज्योति, पूजा, नीलम, शक्ति, आरती ने बताया कि नवरात्र में पूरे नौ दिन तक माता की पूजा की जाती है। घर में भी हमारे यहां पूजा होती है। उसके बाद मंदिर में भी देवी मां की पूजा कर परिवार में सुख, समृद्धि की कामना करते हैं।
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भगवती दुर्गा का पहला स्वरूप शैलपुत्री का है। हिमालय पर जन्म लेने से उन्हें शैलपुत्री कहा गया। इनका वाहन वृषभ है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। इन्हें पार्वती का स्वरूप भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी और इनके दर्शन मात्र से वैवाहिक कष्ट दूर होते हैं। नवरात्रों में देवी की पूजा का खास महत्व है। दुर्गा का अर्थ है परमात्मा की वह शक्ति, जो स्थिर और गतिमान है, लेकिन संतुलित भी है। किसी भी तरह की साधना के लिए शक्ति का होना जरूरी है। यह शक्ति हमें देवी मां की पूजा करने से मिलती है।
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- संजय भारद्वाज, महंत, देवी माता मंदिर कमेटी चौक
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