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चार घंटे रेल मार्ग जाम कर किसानों ने जताया विरोध

Mon, 18 Oct 2021 10:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 10:03 PM IST
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rail roko andolan farmer protest against law
पलवल में जुलूस निकालकर रेलमार्ग जाम करने जाते किसान। - फोटो : Palwal
पलवल। पिछले 11 माह से आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार को रेलमार्ग को जाम कर दिया। अटोहां फाटक पर किसान करीब चार घंटे तक रेल की पटरियों पर बैठे रहे। इसमें करीब सात गाड़ियां फंसी रहीं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पलवल में रूंधी रेलवे स्टेशन के समीप गोल्डन टेंपल एक्सप्रेस और तीन माल गाड़ियां खड़ी रहीं। पलवल स्टेशन के समीप उत्कल एक्सप्रेस, जन शताब्दी एक्सप्रेस और माल गाड़ियां खड़ी रहीं। इस दौरान किसानों ने लखीमपुर खीरी जनसंहार में षड़यंत्र रचने के दोषी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को मंत्री पद से बर्खास्त करने तथा गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की। किसानों को रोकने के लिए भारी संख्या में स्थानीय पुलिस से साथ आरपीएफ और रेलवे पुलिस दंगा रोधी सामान के साथ तैनात रही। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कृषि कानूनोें की वापसी की मांग की।
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किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में दिए गए धरने की अध्यक्षता दादा मठ्ठर सिंह चौहान ने की। संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। कई दिनों से चल रही रेल रोकने की तैयारी के अनुसार सुबह भारी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर धरना स्थल पहुंचे। धरने में किसानों ने बैठक करने के बाद अटोहां गांव के समीप बने 562 नंबर फाटक पर रेल मार्ग जाम करने का निर्णय लिया। धरने से किसान जुलूस के रूप में गांव अटोहां के बीच से होते हुए फाटक पर पहुंचे। फाटक पर पहुंचकर किसानों ने रास्ते में दरियां बिछाकर धरना शुरू कर दिया। काफी किसान रेल की पटरियों पर बैठ गए और पटरियों पर ही हुक्का की गुड़गुड़ाहट के साथ धरना शुरू हो गया। किसानों ने भजनों व चौपाई के माध्यम से सरकार पर जमकर कटाक्ष किया।
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धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरौत व मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड मामले में जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। कृषि के तीन कानूनों को निरस्त करवाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी कराने, चारों लेबर कोड को रद्द कराने मांगों को लेकर देश का अन्नदाता लगभग 11 महीने से सड़कों पर हैं। कृषि कानूनों को लागू करके भाजपा सरकार पूंजीपतियों के हित में कुछ भी कर गुजरने को तैयार है। सरकार देश की खाद्य सुरक्षा को तबाह करने पर तुली हुई है। मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि देश में तानाशाही का माहौल पैदा किया जा रहा है। हरियाणा सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए क्षतिपूर्ति कानून 2021 को लागू किया है। उदय सिंह सरपंच व धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि सरकार की नीयत व नीतियां स्पष्ट नहीं हैं। सरकारी कंपनियां यह कहकर बेची जा रहीं हैं कि सरकार का काम व्यापार करना नहीं है। कृषि कानूनों में जरूरी वस्तु अधिनियम को निरस्त करते हुए जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी पर सभी सीमाएं समाप्त कर दी। सरकार कह रही है कि वह देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ता राशन दे रही है फिर भी वैश्विक भूख सूचकांक से स्पष्ट हो रहा है कि भारत विकास में नहीं बल्कि भुखमरी में अव्वल बन रहा है। सरदार उपकार सिंह ने कहा कि सिंधू बॉर्डर पर हुई घटना सरकार की साजिश है। सरकार जाति वाद का जहर खोल रही है। जबकि मरने व मारने वाले दोनों की दलित हैं। सरकार आंदोलन को बदनाम करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। धरने को किसान नेता डॉ. रघुवीर सिंह, सोहनपाल चौहान, राजेंद्र घर्रोट, समुंद्र चौहान, ताराचंद, बीधू सिंह, नंदराम शर्मा, सतीश भुर्जा, राजेंद्र बैंसला, रमेशचंद, राजेश रावत, महेंद्र सिंह गहलब, नरेंद्र सहरावत, बीरसिंह, अच्छेलाल, रोशनलाल, चेतराम मैंबर, श्रीचंद महाशय सहित अन्य ने संबोधित किया।
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बारिश से हुई फसल की गिरदावरी की मांग
किसान नेताओं ने कहा कि रविवार और सोमवार को हुई बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसान पर दोहरी मार पड़ रही है। सरकार ने अभी तक धान की खरीद शुरू नहीं है कि जिससे मंडियों में किसान की फसल भीगकर खराब हो गई। सरकार से मांग है कि किसानों के हुए नुकसान की गिरदावरी की जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, अन्यथा किसान आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
दंगा रोधी सामान के साथ तैनात रहा पुलिस बल
किसानों के रेलमार्ग जाम को लेकर सोमवार धरना स्थल पर आंसू गैस, पानी की बौछार और अन्य दंगा रोधी सामान के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। इसके अलावा अटोहां फाटक पर जीआरपी व आरपीएफ के जवान तैनात रहे। मौके पर स्थानीय पुलिस से डीएसपी अनिल कुमार, डीएसपी रतनदीप बाली, डीएसपी सतेंद्र, डीएसपी शिव अर्चन शर्मा मौजूद रहे, जबकि रेलवे पुलिस की तरफ से असिसटेंट कमांडेंट योगेंद्र पाल व डीएसपी साकिर हुसैन के साथ इंस्पेक्टर मौजूद रहे।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी रहे मौजूद
रेलमार्ग जाम करने को लेकर जिला उपायुक्त कृष्ण कुमार ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए। अटोहां फाटक के लिए तहसीलदार रोहताश पंवार, असावटी रेलवे स्टेशन के लिए लोक निर्माण विभाग के एसडीओ अशोक कुमार, जनौली रेलवे फाटक गेट नंबर-568 के लिए नगर परिषद पलवल के कार्यकारी अभियंता महेंद्र सिंह, रेलवे स्टेशन पलवल व असावटा रेलवे फाटक गेट नंबर-563 के लिए लोक निर्माण विभाग पलवल के कार्यकारी अभियंता नरेंद्र सिंह यादव, रेलवे स्टेशन रूंधी के लिए पलवल के नायब तहसीलदार अशोक कुमार, दीघोट-औरंगाबाद रेलवे फाटक गेट नंबर-560 के लिए जिला शिक्षा अधिकारी अशोक बघेल, गुदराना रेलवे फाटक गेट नंबर-561 के लिए हसनपुर के नायब तहसीलदार मोहम्मद इब्राहिम, मर्रोली-बंचारी रेलवे फाटक व रेलवे स्टेशन बंचारी के लिए होडल के नायब तहसीलदार गौरव रोजरा, रेलवे स्टेशन शोलाका के लिए हसनपुर के खंड शिक्षा अधिकारी मामराज रावत, रेलवे स्टेशन होडल के लिए होडल के खंड शिक्षा अधिकारी यशपाल गर्ग, करमन रेलवे फाटक के लिए लोक निर्माण विभाग होडल के एसडीओ संजय यादव तथा लघु सचिवालय पलवल के लिए जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी पलवल शमशेर नेहरा को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। किसान आंदोलन के दौरान संबंधित एसडीएम अपने-अपने उपमंडल के ओवरऑल इंचार्ज के तौर पर मौजूद रहे।

हुक्का की गुड़गुड़ाहड़ के साथ रेल की पटरियों पर धरना देते किसान।

हुक्का की गुड़गुड़ाहड़ के साथ रेल की पटरियों पर धरना देते किसान।- फोटो : Palwal

रेलमार्ग को जाम कर सभा करते किसान।

रेलमार्ग को जाम कर सभा करते किसान।- फोटो : Palwal

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