फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   police stations turning into junkyard

दुर्घटना ग्रस्त वाहनों से कबाड़ घर में तब्दील हो रहे पुलिस थाने

Sat, 19 Feb 2022 01:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Feb 2022 01:21 AM IST
विज्ञापन
police stations turning into junkyard
पलवल। दुर्घटनाग्रस्त व अन्य मामलों में पकड़े गए वाहन पुलिस थानों को कबाड़ घर में तब्दील कर रहे हैं। जिले के 11 थानों में हजारों वाहन पिछले चार से नीलामी का इंतजार कर रहे हैं। थानों में दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की संख्या सबसे अधिक है, क्योंकि सड़कों पर बढ़ती वाहनों की संख्या के साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ गई है। दुर्घटनाओं में वाहन इतने क्षतिग्रस्त हो जाते हैं कि मालिक उन्हें देखने भी नहीं आते। वाहन क्लेम लेकर अपनी भरपाई कर लेते हैं। जिन वाहनों में किसी की मौत हो जाती है, लोग उन्हें अशुभ मानते है और ऐसे वाहनों की संख्या भी अधिक है। पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में पकड़े गए वाहनों की भी सुपुर्दगी नहीं हो पाती। ऐसे वाहनों में बाइक, ऑटो, कार, डंपर व ट्रकों की संख्या अधिक है।
विज्ञापन

पुलिस की सूचना के बाद भी नहीं ले जाते
जिले में यूं तो थानों की संख्या 12 है, लेकिन महिला थाना ही एकमात्र ऐसा है जहां पर इस तरह के वाहन नहीं है। जबकि यातायात थाना, गदपुरी थाना, शहर थाना, कैंप थाना, सदर थाना, मुंडकटी थाना, चांदहट थाना, हसनपुर थाना, होडल थाना, हथीन थाना व उटावड़ थाने में ऐसे वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। चूंकि पुलिस की तरफ से एक निश्चित समय और पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद इन वाहनों को नीलाम किया जाता है, लेकिन उस नीलामी के लिए भी तीन से चार साल तक का समय लग जाता है। जिला के तमाम थानों में दुर्घटनाग्रस्त हुए वाहनों की संख्या सर्वाधिक है।
विज्ञापन

राजमार्ग से लगते थानों में संख्या अधिक
जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग-19 स्थित थानों में ऐसे वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि अन्य थानों में भी ऐसे वाहनों की संख्या कम नहीं है। यहां पर आबकारी अधिनियम व लावारिस हालत में मिले हुए वाहन अधिक है। कबाड़ बन रहे ये वाहन पुलिस के लिए भी बड़ी मुसीबत है, क्योंकि इनमें से अधिकांश का सामान गायब हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीमा कंपनी से क्लेम लेने के बाद नहीं लेते वाहन
लावारिस मिलने वाले वाहनों के बारे में पुलिस उनकी तहकीकात करके असल मालिक तक पहुंचने का प्रयास करती है तो इनमें अधिकांश वाहन ऐसे होते हैं जो कि चोरी हो चुके हैं। चूंकि तीन माह तक चोरी वाहन के ट्रेस नहीं होने की स्थिति में पुलिस को अनट्रेस रिपोर्ट देनी होती है, जिसके बाद बीमा कंपनी मालिक को उसकी कीमत अदा कर देता है। ऐसे में लावारिस वाहनों को उनके असल मालिक देखने तो आ जाते हैं पर स्थिति देखकर लेकर ही नहीं जाते हैं।
दुर्घटनाग्रस्त वाहन हैं सर्वाधिक
थानों में जब्त किए गए अधिकांश वाहनों में सड़क दुर्घटनाओं में शामिल होते हैं। सामान्य दुर्घटनाओं में तो वाहन मालिक उन वाहनों की जमानत करा लेते हैं, लेकिन जब किसी वाहन से बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उनमें जमानत प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है। कई वाहनों के पूर्ण दस्तावेज नहीं होने पर भी मालिक उन्हें छुड़ा नहीं पाते हैं। वहीं, जिन वाहनों से बड़ी दुर्घटनाएं हुई या जिनमें परिवार के कई लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे वाहनों को भी पीड़ितों के परिवार लेकर ही नहीं जाते हैं। उन वाहनों को भी पुलिस को दुर्घटनास्थल से उठाकर थाना में लाना पड़ता है। ऐसे वाहनों में कार, ऑटो व बाइक अधिक होती है।

दुर्घटनाग्रस्त सहित विभिन्न मामलों में जब्त किए जाने वालों को नीलाम करने के लिए एक लंबी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसकी वजह से कुछ समय लग जाता है। जिला पलवल में वर्ष 2018 में इन वाहनों को नीलाम किया है और अब भी प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही इनकी नीलामी की जाएगी। दुर्घटनाग्रस्त हुए वाहनों को मालिक लेने तक भी नहीं आते हैं, जिससे परेशानी होती है।
- राजेश दुग्गल, जिला पुलिस अधीक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed