{"_id":"64e3a2bd29a580d19a063a16","slug":"people-gathered-in-the-last-journey-of-martyr-manmohan-palwal-news-c-24-1-snoi1004-1801-2023-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: शहीद मनमोहन की अंतिम यात्रा में उमड़े लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: शहीद मनमोहन की अंतिम यात्रा में उमड़े लोग
विज्ञापन
कैप्शन: 9- बहीन गांव में शहीद मनमोहन शर्मा को पुष्प अर्पित करते केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर
कैप्शन: 10- शहीद मनमोहन शर्मा को अग्नि देते हुए एक साल का बेटा अर्पित
कैप्शन: 11- शहीद मनमोहन शर्मा के अंतिम दर्शन करने को उमड़ी भीड़
पलवल से हजारों की संख्या में लोगों का काफिला बहीन गांव तक शहीद मनमोहन के पार्थिव शरीर को लेकर गया
शहीद के एक वर्ष के बेटे द्वारा अग्नि देते ही नम हो गईं सभी की आंखें
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। लद्दाख हादसे में शहीद हुए बहीन के लाल मनमोहन की अंतिम यात्रा में सोमवार को लोगों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। लोगों में अपने लाडले के अंतिम दर्शन करने की होड़ लगी हुई थी। लोगों के भारी जन समूह के बीच पुलिस-प्रशासन को व्यवस्था संभालना कठिन हो रहा था। अंतिम यात्रा पलवल के कुंडली मानेसर एक्सप्रेस वे के निकट से शुरू हुई। अंतिम यात्रा में सेना के वाहन के साथ सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन चल रहे थे।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने शहीद मनमोहन अमर रहे, भारत माता जिंदाबाद के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। देश भक्ति से ओतप्रोत युवाओं का भारी जन समूह बाइकों पर सवार था। अंतिम यात्रा में स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, करनाल के भाजपा सांसद संजय भाटिया, प्रदेश कांग्रेस के प्रधान उदयभान, पूर्व विधायक रामजीलाल डागर, पूर्व विधायक केहर सिंह रावत, प्रदेश कांग्रेस के डेलीगेट मोहम्मद ईसराईल चौधरी, जिले के एसपी लोकेंद्र सिंह, डीएसपी सुरेश भड़ाना, स्थानीय एसडीएम लक्ष्मीनारायण, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के प्रधान मोहम्मद जकरिया, लवकुश रावत, राहुल रावत, नरेंद्र रावत भी साथ रहे। सभी ने पुष्प अर्पित किए। शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के कारण दिल्ली-आगरा राजमार्ग जाम हो गया।
शहीद के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में हजारों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी। भारतीय सेना की आई टुकड़ी ने भी मनमोहन को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के समय शहीद के पिता बाबूराम मनमोहन के एक वर्षीय पुत्र अर्पित को गोद में लाए तथा अर्पित के हाथों से अंतिम संस्कार कराया गया। अपने पिता को अग्नि देने वाले एक वर्ष का बच्चा लोगों की इतनी भीड़ देख घबराया हुआ सा दिख रहा था। शहीद के पिता बाबूराम के चेहरे पर बेटे के जाने का गम तो था, लेकिन भारत माता के लिए शहीद होने पर गर्व भी था।
विज्ञापन
विज्ञापन
कैप्शन: 10- शहीद मनमोहन शर्मा को अग्नि देते हुए एक साल का बेटा अर्पित
कैप्शन: 11- शहीद मनमोहन शर्मा के अंतिम दर्शन करने को उमड़ी भीड़
पलवल से हजारों की संख्या में लोगों का काफिला बहीन गांव तक शहीद मनमोहन के पार्थिव शरीर को लेकर गया
शहीद के एक वर्ष के बेटे द्वारा अग्नि देते ही नम हो गईं सभी की आंखें
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। लद्दाख हादसे में शहीद हुए बहीन के लाल मनमोहन की अंतिम यात्रा में सोमवार को लोगों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। लोगों में अपने लाडले के अंतिम दर्शन करने की होड़ लगी हुई थी। लोगों के भारी जन समूह के बीच पुलिस-प्रशासन को व्यवस्था संभालना कठिन हो रहा था। अंतिम यात्रा पलवल के कुंडली मानेसर एक्सप्रेस वे के निकट से शुरू हुई। अंतिम यात्रा में सेना के वाहन के साथ सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन चल रहे थे।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने शहीद मनमोहन अमर रहे, भारत माता जिंदाबाद के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। देश भक्ति से ओतप्रोत युवाओं का भारी जन समूह बाइकों पर सवार था। अंतिम यात्रा में स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, करनाल के भाजपा सांसद संजय भाटिया, प्रदेश कांग्रेस के प्रधान उदयभान, पूर्व विधायक रामजीलाल डागर, पूर्व विधायक केहर सिंह रावत, प्रदेश कांग्रेस के डेलीगेट मोहम्मद ईसराईल चौधरी, जिले के एसपी लोकेंद्र सिंह, डीएसपी सुरेश भड़ाना, स्थानीय एसडीएम लक्ष्मीनारायण, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के प्रधान मोहम्मद जकरिया, लवकुश रावत, राहुल रावत, नरेंद्र रावत भी साथ रहे। सभी ने पुष्प अर्पित किए। शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के कारण दिल्ली-आगरा राजमार्ग जाम हो गया।
विज्ञापन
शहीद के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में हजारों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी। भारतीय सेना की आई टुकड़ी ने भी मनमोहन को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के समय शहीद के पिता बाबूराम मनमोहन के एक वर्षीय पुत्र अर्पित को गोद में लाए तथा अर्पित के हाथों से अंतिम संस्कार कराया गया। अपने पिता को अग्नि देने वाले एक वर्ष का बच्चा लोगों की इतनी भीड़ देख घबराया हुआ सा दिख रहा था। शहीद के पिता बाबूराम के चेहरे पर बेटे के जाने का गम तो था, लेकिन भारत माता के लिए शहीद होने पर गर्व भी था।
विज्ञापन