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Palwal News: एमटीपी केंद्रों पर अब हर सप्ताह में होगी जांच, कई गांवों में 700 से कम लिंगानुपात
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संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। जिले में लिंगानुपात के स्तर को सुधारने के लिए पीएनडीटी टीम ने अपनी तैयारियां दुरूस्त कर ली हैं। विभाग द्वारा अब एमटीपी सेंटरों पर सख्ती बरती जा रही है। जहां पहले एमटीपी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की तीन महीने में जांच होती थी। वहीं, अब यह जांच प्रत्येक सप्ताह करवाई जाएगी। जिसके लिए टीम ने सभी केंद्र संचालकों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
साथ ही मेडिकल स्टोर पर अवैध तरीके से गर्भनिरोधक दवाएं और किट बेचने वालों के खिलाफ भी लगातार जांच जारी है। वहीं, जिले के जिन गांवों में 700 से कम लिंगानुपात है। वहां पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से एसएमओ अपनी टीम के साथ गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। उन परिवारों की काउंसलिंग भी करवाई जाएगी। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम भी समन्वय करेंगी।
गर्भपात करवाने वालों की होगी जांच
एमटीपी केंद्रों में 12 सप्ताह से अधिक समय बाद गर्भपात करवाने वाली महिलाओं की जांच होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि महिला के इससे पहले कितने बच्चे थे। इसके साथ ही अस्पतालों को मिलने वाली एमटीपी किटों का रिकॉर्ड भी लगातार जांचा जाएगा। जिसमें होलसेलर के बिल से केंद्र के बिल का मिलान करवाया जा रहा है। इसके साथ ही महिला के सभी दस्तावेज भी जांचे जा रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रों को एमटीपी किटों की सप्लाई में भी कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन केंद्रों में बीते लंबे समय से कोई गर्भपात नहीं हुआ है तो उन केंद्रों बंद करने के बारे में परामर्श दिया जाएगा।
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फुटकर विक्रेता नहीं बेच सकते एमटीपी किटें
एसएमओ मनीष गर्ग ने बताया कि पीएनडीटी टीम के साथ- साथ वे भी अपनी जांच में जुटे हुए हैं। जिस भी मेडिकल स्टोर के बारे पर संदिग्ध गतिविधियां होने का अंदेशा मिलता है तो वे वहां पर दबिश देकर जांच करते हैं। जिले में करीब तीन हजार मेडिकल स्टोर संचालित हैं। उन्होंने बताया कि एमटीपी किट दुकानदार नहीं बेच सकता है। यह किट सिर्फ थोक विक्रेताओं की ओर से अस्पताल को ही बेची जा सकती है। संबंधित अस्पताल भी पंजीकृत होना चाहिए।
पीएनडीटी नोडल अधिकारी यूएसजी सेंटर्स का करें रूटीन इंस्पेक्शन
पलवल। जिला सलाहकार समिति की ओर से पीसी पीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक) की मासिक बैठक सिविल सर्जन कार्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित की गई। अध्यक्ष डॉ. जटान ने डॉ. राहुल कुमार को निर्देशित करते हुए कहा कि वे सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिक, नागरिक अस्पताल, यूएसजी सेंटर पर रूटीन इंस्पेक्शन करना सुनिश्चित करें। अगर कहीं पर भी यूएसजी सेंटर के कार्य में कोई भी कमी पाई जाती है या कोई भी यूएसजी सेंटर बिना आरसीएच/एमसीटीएस नंबर के गर्भवती महिला का यूएसजी करता पाया जाता तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल मे लाएं।
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निर्देशों के आधार पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बाद एमटीपी केंद्रों पर अधिक नजर रखी जा रही है। मई महीने में सभी एमटीपी केंद्रों की जांच पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। -मनीष गर्ग, एसएमओ
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हथीन। जिले में लिंगानुपात के स्तर को सुधारने के लिए पीएनडीटी टीम ने अपनी तैयारियां दुरूस्त कर ली हैं। विभाग द्वारा अब एमटीपी सेंटरों पर सख्ती बरती जा रही है। जहां पहले एमटीपी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की तीन महीने में जांच होती थी। वहीं, अब यह जांच प्रत्येक सप्ताह करवाई जाएगी। जिसके लिए टीम ने सभी केंद्र संचालकों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
साथ ही मेडिकल स्टोर पर अवैध तरीके से गर्भनिरोधक दवाएं और किट बेचने वालों के खिलाफ भी लगातार जांच जारी है। वहीं, जिले के जिन गांवों में 700 से कम लिंगानुपात है। वहां पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से एसएमओ अपनी टीम के साथ गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। उन परिवारों की काउंसलिंग भी करवाई जाएगी। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम भी समन्वय करेंगी।
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गर्भपात करवाने वालों की होगी जांच
एमटीपी केंद्रों में 12 सप्ताह से अधिक समय बाद गर्भपात करवाने वाली महिलाओं की जांच होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि महिला के इससे पहले कितने बच्चे थे। इसके साथ ही अस्पतालों को मिलने वाली एमटीपी किटों का रिकॉर्ड भी लगातार जांचा जाएगा। जिसमें होलसेलर के बिल से केंद्र के बिल का मिलान करवाया जा रहा है। इसके साथ ही महिला के सभी दस्तावेज भी जांचे जा रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रों को एमटीपी किटों की सप्लाई में भी कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन केंद्रों में बीते लंबे समय से कोई गर्भपात नहीं हुआ है तो उन केंद्रों बंद करने के बारे में परामर्श दिया जाएगा।
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फुटकर विक्रेता नहीं बेच सकते एमटीपी किटें
एसएमओ मनीष गर्ग ने बताया कि पीएनडीटी टीम के साथ- साथ वे भी अपनी जांच में जुटे हुए हैं। जिस भी मेडिकल स्टोर के बारे पर संदिग्ध गतिविधियां होने का अंदेशा मिलता है तो वे वहां पर दबिश देकर जांच करते हैं। जिले में करीब तीन हजार मेडिकल स्टोर संचालित हैं। उन्होंने बताया कि एमटीपी किट दुकानदार नहीं बेच सकता है। यह किट सिर्फ थोक विक्रेताओं की ओर से अस्पताल को ही बेची जा सकती है। संबंधित अस्पताल भी पंजीकृत होना चाहिए।
पीएनडीटी नोडल अधिकारी यूएसजी सेंटर्स का करें रूटीन इंस्पेक्शन
पलवल। जिला सलाहकार समिति की ओर से पीसी पीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक) की मासिक बैठक सिविल सर्जन कार्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित की गई। अध्यक्ष डॉ. जटान ने डॉ. राहुल कुमार को निर्देशित करते हुए कहा कि वे सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिक, नागरिक अस्पताल, यूएसजी सेंटर पर रूटीन इंस्पेक्शन करना सुनिश्चित करें। अगर कहीं पर भी यूएसजी सेंटर के कार्य में कोई भी कमी पाई जाती है या कोई भी यूएसजी सेंटर बिना आरसीएच/एमसीटीएस नंबर के गर्भवती महिला का यूएसजी करता पाया जाता तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल मे लाएं।
निर्देशों के आधार पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बाद एमटीपी केंद्रों पर अधिक नजर रखी जा रही है। मई महीने में सभी एमटीपी केंद्रों की जांच पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। -मनीष गर्ग, एसएमओ