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नई बिजली व्यवस्था से 40 हजार कर्मियों पर असर : विधायक
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह विधायक एवं हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता चौधरी आफताब अहमद ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले पर बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे हरियाणा के इतिहास का काला दिन बताते हुए कहा कि यह बिजली व्यवस्था में खतरनाक प्रयोग की शुरुआत है। इस फैसले से 40 हजार कच्चे-पक्के कर्मचारियों के भविष्य पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वह आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। कांग्रेस इस फैसले का विरोध करेगी।
विधायक के अनुसार, हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने कंपनी को 25 साल का लाइसेंस दिया है। कंपनी वित्त वर्ष 2027-28 से चरणबद्ध तरीके से गुरुग्राम सिटी, उपनगरीय गुरुग्राम, मानेसर, सोहना और नूंह में बिजली आपूर्ति शुरू करने की योजना बना रही है। विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार और आयोग की मिलीभगत से प्रदेश के सबसे अधिक मुनाफे वाले क्षेत्रों को निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। इससे सरकारी बिजली विभाग को नुकसान होगा, जबकि निजी कंपनियां मुनाफा कमाएंगी। उन्होंने आशंका जताई कि निजीकरण के बाद आम जनता, किसानों, दुकानदारों और गरीबों को महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है।
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नूंह। नूंह विधायक एवं हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता चौधरी आफताब अहमद ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले पर बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे हरियाणा के इतिहास का काला दिन बताते हुए कहा कि यह बिजली व्यवस्था में खतरनाक प्रयोग की शुरुआत है। इस फैसले से 40 हजार कच्चे-पक्के कर्मचारियों के भविष्य पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वह आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। कांग्रेस इस फैसले का विरोध करेगी।
विधायक के अनुसार, हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने कंपनी को 25 साल का लाइसेंस दिया है। कंपनी वित्त वर्ष 2027-28 से चरणबद्ध तरीके से गुरुग्राम सिटी, उपनगरीय गुरुग्राम, मानेसर, सोहना और नूंह में बिजली आपूर्ति शुरू करने की योजना बना रही है। विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार और आयोग की मिलीभगत से प्रदेश के सबसे अधिक मुनाफे वाले क्षेत्रों को निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। इससे सरकारी बिजली विभाग को नुकसान होगा, जबकि निजी कंपनियां मुनाफा कमाएंगी। उन्होंने आशंका जताई कि निजीकरण के बाद आम जनता, किसानों, दुकानदारों और गरीबों को महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है।
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