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तेज हुआ आंदोलन, जिले के किसान भी कर रहे अनशन

Tue, 22 Dec 2020 11:15 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2020 11:15 PM IST
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Movement intensified, farmers of the district are also fasting
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसान आंदोलन अब तेज होने लगा है। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश व बुंदेलखंड के किसान पिछले 22 दिन से धरना पर बैठे हैं, वहीं अब जिले के किसान भी रोज आकर धरने पर बैठने लगे हैं। इतना ही नहीं सोमवार से किसानों द्वारा शुरू किए गए अनशन में जिले के किसानों ने भी हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। बुधवार को जिले के चौहान पाल के गांव औरंगाबाद के किसानों ने अनशन पर बैठने की घोषणा कर दी। 11 किसान अनशन पर बैठेंगे। वहीं मंगलवार सुबह स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने उन 11 किसानों का अनशन जूस पिलवाकर खत्म कराया, जो सोमवार को अनशन पर बैठे थे। उनका अनशन खत्म होने के साथ ही मंगलवार को और 11 किसान अनशन पर बैठ गए। बताया गया कि अनशन पर प्रतिदिन 11 किसान बैठते हैं।
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किसान नेताओं ने कहा कि रास्ता किसानों ने नहीं प्रशासन ने रोका है, हम दिल्ली जाना चाहते हैं पर सरकार पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। किसानों को दिल्ली जाने से रोका जा रहा है। शासन और प्रशासन किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का असफल प्रयास कर रहे हैं पर सरकार को ध्यान रखना चाहिए यह आंदोलन न तो बदनाम होने वाला है और न कमजोर होने वाला है। गूंगी बहरी सरकार का अहंकार तो टूटेगा पर थोड़ा समय लगेगा। सरकार किसानों की आवाज को अब दबा नहीं पाएगी, क्योंकि किसान अब जाग चुका है।
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स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि इन जनविरोधी कानूनों के खिलाफ पूरे देश के किसान और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले सैकड़ों संगठन एक जुट हैं। अब कॉरपोरेट कंपनियां किसानों का आर्थिक शोषण नहीं कर पाएंगी। किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि ये आंदोलन केवल किसानों का ही नहीं है बल्कि भारत के सभी गरीबों का आंदोलन है, शोषित पीड़ित और उपेक्षित भारतीय आर्थिक गुलामी से आजादी चाहते हैं। उन्होंने बताया कि किसानों की जीत होगी और किसान विरोधी सरकार का घमंड चकनाचूर होगा, ये ऐतिहासिक आंदोलन है और बिना किसी महत्वाकांक्षा के केवल किसानों के हितों के ये आंदोलन शुरू किया गया है।
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जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने आंदोलन को सही ठहराया
मध्य प्रदेश के किसान राजेंद्र सिंह (जो कि जल पुरुष के नाम से मशहूर हैं तथा सरकार द्वारा उन्हें पुरस्कार से नवाजा हुआ है) ने किसानों के समर्थन में मध्य प्रदेश सरकार को अपना पुरस्कार लौटा दिया तथा पलवल में किसानों के बीच धरने पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को समर्थन देने हुए उनके आंदोलन को सही ठहराया तथा कहा कि सरकार को किसानों की सुध लेनी चाहिए। वहीं छत्तीसगढ़ में राजशाही परिवार के सदस्य तथा किसान नेता पीवी राज गोपाल ने भी पलवल धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों को संबोधित किया। उन्होंने किसानों को हर संभव सहायता देने की बात कही।
आंदोलन में मध्य प्रदेश से पहुंचीं महिलाएं व बच्चे
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ग्वालियर के बैनर तले करीब 15 महिलाएं व उनके बच्चे मंगलवार को यहां किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए पलवल पहुंचे। ये महिलाएं व बच्चे समिति की अध्यक्ष नीना शर्मा के नेतृत्व में पलवल पहुंचे। नीना शर्मा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि उनका परिवार आज सड़क पर बैठा है। ऐसे में महिलाएं घरों के अंदर कैसे रह सकती हैं। अभी तक केवल किसान सड़क पर धरना दे रहे हैं, यदि सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानीं तो किसान परिवारों की महिलाएं व बच्चे भी सड़क पर आकर बैठ जाएंगे। वहीं समिति की वरिष्ठ सदस्य रीना का कहना था कि अब किसान आंदोलन पीछे हटने वाला नहीं है। किसानों का परिवार उनके साथ है तथा जरूरत पड़ी तो बच्चे व महिलाएं अपनी जान तक देने को तैयार हैं।
कार्यक्रमों को मजबूती से लागू किया जाएगा
किसान आंदोलन की समीक्षा करने तथा आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कार्यकारिणी की बैठक जिला प्रधान धर्मचन्द की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिला सचिव रूपराम तेवतिया द्वारा संचालित बैठक में सर्वसम्मति से संयुक्त किसान मोर्चा के घोषित कार्यक्रमों को मजबूती से लागू किया जाएगा। बैठक में किसान सभा राज्य कमेटी के नेता वीरेंदर मलिक विशेष रूप से शामिल रहे। किसान नेताओं ने बताया कि आज खेती किसानी व रोजगार बचाने की लड़ाई में सीधे पालेबंदी खिंच गई है। बैठक में फैसला किया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर किसान संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर 23 दिसंबर को किसान एक वक्त का खाना छोड़ कर उपवास गृहण करेंगे। 25-26 व 27 दिसंबर को जिले के टोल फ्री कराए जाएंगे तथा 27 दिसंबर को देश के किसान प्रधानमंत्री के मन की बात के दौरान थाली बजाकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी प्रकट करेंगे। बैठक में किसान नेता दरियाब सिंह, सोहनपाल चौहान, ताराचंद, कमलसिंह, जोगेंदर, सबरजीत, नन्दकिशोर शर्मा, रघुबीर सिंह, रमेशचंद, भगीरथ बैनीवाल, भीम सिंह, मानसिंह व यादराम शर्मा तथा डिगंबर तेवतिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

ये किसान बैठे अनशन पर
किसानों द्वारा आंदोलन के तहत शुरू किए गए अनशन में मंगलवार को राज रावत, गुरपाल सिंह, चन्द्रभान, प्रताप सिंह राजपूत, शंकरलाल, बिजेन्द्र सिंह, हरिश झोरड, बिशराम पटेल, आशीष, गयाराम धाकड़ और उदयराज बैठे। मंगलवार को जिन किसानों का अनशन तुड़वाया गया, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने पुष्प माला पहचानकर स्वागत करके जूस पिलाया तथा उसके बाद अनशन पर बैठने वाले किसानों का स्वागत कर बैठाया।
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