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आधे से अधिक एटीएम पर ताला, 30 फीसदी मशीनें खराब

Mon, 05 Dec 2016 05:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 05 Dec 2016 05:02 PM IST
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 More than half of the lock on ATMs, 30 percent poor Machines
एटीमए बंद - फोटो : अमर उजाला

नोटबंदी की मार शहर के लोगों को अब परेशान करने लगी है। लोगों को कैश की दरकार है, लेकिन नकदी पाना जैसे चांद तारे तोड़ने के बराबर बन चुका है। आधे से अधिक एटीएम पर ताला लगा हुआ है और 30 फीसदी की मशीनें खराब हैं।

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हालांकि सरकारी तंत्र लोगों को कैशलैस खरीद की राह पर चलने का संदेश दे रहे हैं, लेकिन यहां छोटे दुकानदार और रेहड़ी वाले तो दूर बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों पर भी कैशलैस बिक्री की व्यवस्था नहीं है। अभी तक शहर के पांच फीसदी दुकानदार भी प्लास्टिक मनी से खरीद कराने की सुविधा नहीं दे पा रहे हैं। बैंकों में कतारों में लगने के बाबजूद लोगों को पैसे नहीं मिल पाते, तो एटीएम का तो और भी बुरा हाल है। 
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जिले में राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट व सहकारी बैंकों की 135 के करीब शाखाएं हैं। अकेले पलवल में ही करीब 100 एटीएम लगे हुए हैं। लेकिन आधे से अधिक एटीएम पर तो नोटबंदी के बाद से ताला लगा हुआ है। 30 फीसदी एटीएम मशीनों पर खराब होने के नोटिस चस्पा हैं। केवल तीन-चार एटीएम ऐसे हैं, जिनमें से लोगों को कभी-कभी कैश मिल जाता है। वह भी मात्र एक-दो घंटों में समाप्त हो जाता है। रविवार को महर्षि दयानंद चौक स्थित आंध्रा बैंक व एसबीआई के एटीएम पर कैश निकला। 
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आठ नवंबर को पीएम मोदी द्वारा नोटबंदी के फरमान के बाद लोगों को यह तो लगा था कि परेशानी बढ़ेगी, लेकिन यह अनुमान नहीं था कि हालात इस कदर खराब भी हो सकते हैं।


पलवल तेजी से प्रगति करता जिला है व एनसीआर में शुमार है। पलवल शहर व होडल में तो फिर भी एक-आघ एटीएम में कैश मिल जाता है, लेकिन हसनपुर, हथीन व गांवों में लगे एटीएम तो एक दिन भी कैश नहीं उगल पाए हैं। शहर के सामाजिक संगठनों से जुड़े राजीव कत्याल, नरेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश, कमल गुप्ता, आमिर खान, सुरेंद्र अरोड़ा व अनिल गुसांई का कहना है जब शहरों में ऐसा हाल है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में कैसे हाल होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लोगों का कहना है कि सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे कि लोगों की परेशानी कम हो सके। 

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