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मनरेगा घोटाला : 35 गांवों में 69 विकास कार्यों में बरती गई थी अनियमितताएं
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पलवल। मनरेगा के कार्यों में अनियमितताएं बरतने पर करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमे दर्ज होते ही पंचायत विभाग में अफरातफरी का माहौल है। अलग-अलग पुलिस थानों में छह बीडीपीओ, आठ एबीपीओ और 35 ग्राम सचिवों पर छह मुकदमे दर्ज होने पर अन्य कर्मचारी भयभीत हैं। मुकदमों में अभी ठेकेदार, सरपंचों, जेई, एसडीओ और अकाउंटेंट के नाम भी शामिल हो सकते हैं। आरोपी कर्मचारियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार भी लटक गई है। पुलिस कर्मचारियों को जांच में शामिल करने के लिए नोटिस की प्रक्रिया में लगी हुई है। मुकदमों में 35 गांवों में किए 69 विकास कार्यों में अनियमितताएं बरतने का आरोप लगा है।
दरअसल, वर्ष 2020-2021 में कोरोना काल के दौरान गांवों में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में अनियमितताएं बरती गईं। सीईओ जिला परिषद द्वारा मामले का खुलासा किया गया तो आठ कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। इनके अलावा आठ कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। मनरेगा लोकपाल की जांच में ज्यादातर गांवों में घोटाले की पुष्टि हुई। लोकपाल ने 13 कर्मचारियों पर जुर्माना लगाते हुए 3.61 लाख रुपये रिकवरी के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री दरबार में मामला पहुंचने पर स्टेट विजिलेंस को जांच सौंपी गई और पूरे मामले की निगरानी पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली द्वारा की गई। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पलवल आगमन पर भी मामले की शिकायत की गई, जिसके बाद दो मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन किसी अधिकारी व कर्मचारी को नामजद नहीं किया गया।
फरीदाबाद रेंज कमिश्नर संजय जून ने बताया कि इस बारे में विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई करनी है। गिरफ्तारी होने के साथ ही कर्मचारी को बर्खास्त माना जाएगा। जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी रिपोर्ट संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजे, ताकि विभागीय कार्रवाई की जा सके।
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एडीसी के निर्देश पर जिला परिषद की सीईओ दर्ज कराए थे केस
जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष और एडीसी उत्तम सिंह के निर्देश पर जिला परिषद की सीईओ मनीषा शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों में 35 गांवों में हुए 69 कार्यों में अनियमितताएं बरतना दिखाया गया है। चांदहट थाना क्षेत्र के गांव राजूपुर खादर में तीन, घोड़ी में दो, बड़ौली में दो, चांदहट में पांच व अलावलपुर में चार कार्यों में अनियमितताएं बरती गईं। इसी प्रकार गदपुरी थाना क्षेत्र के गांव हरफली में चार व पृथला में तीन कार्य, सदर थाना क्षेत्र के दुर्गापुर में एक, असावटा में दो, बढ़ा में चार, किशोरपुर में एक, टहरकी में एक, जलालपुर में एक व जोधपुर एक, हसनपुर थाना क्षेत्र के गांव रामगढ़ में तीन, काशीपुर में एक, गुलावद में तीन, लुलवाड़ी में एक व जटौली में एक कार्य में अनियमितताएं बरती गईं। इनके अलावा हथीन थाना क्षेत्र में बुराका, जलालपुर, मढनाका, महलूका, पावसर व रनियाला में 15 तथा होडल थाना क्षेत्र के गांव बंचारी में एक, भुलवाना में दो, डाडका में तीन, करमन में एक, लाडियाका में दो व पालड़ी में एक कार्य में अनियमितताएं बरती गईं।
होडल थाने में दर्ज मामलों में केवल ग्राम सचिवों के नाम
होडल थाने में दर्ज मुकदमों में केवल आठ ग्राम सचिवों को नामजद किया गया है। ग्राम सचिवों के अलावा किसी अधिकारी व कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अकेले ग्राम सचिव मनरेगा के तहत हुए कार्यों के नाम पर धनराशि कैसे निकाल सकते हैं।
सीईओ जिला परिषद की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। रिकार्ड लेने और अधिकारियों के बयान दर्ज करने के लिए सेक्शन-91 के तहत नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जा रही है। जांच में शामिल न होने पर गिरफ्तारी की जाएगी।
- यशपाल खटाना, डीएसपी
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दरअसल, वर्ष 2020-2021 में कोरोना काल के दौरान गांवों में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में अनियमितताएं बरती गईं। सीईओ जिला परिषद द्वारा मामले का खुलासा किया गया तो आठ कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। इनके अलावा आठ कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। मनरेगा लोकपाल की जांच में ज्यादातर गांवों में घोटाले की पुष्टि हुई। लोकपाल ने 13 कर्मचारियों पर जुर्माना लगाते हुए 3.61 लाख रुपये रिकवरी के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री दरबार में मामला पहुंचने पर स्टेट विजिलेंस को जांच सौंपी गई और पूरे मामले की निगरानी पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली द्वारा की गई। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पलवल आगमन पर भी मामले की शिकायत की गई, जिसके बाद दो मुकदमे दर्ज किए गए, लेकिन किसी अधिकारी व कर्मचारी को नामजद नहीं किया गया।
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फरीदाबाद रेंज कमिश्नर संजय जून ने बताया कि इस बारे में विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई करनी है। गिरफ्तारी होने के साथ ही कर्मचारी को बर्खास्त माना जाएगा। जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी रिपोर्ट संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजे, ताकि विभागीय कार्रवाई की जा सके।
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एडीसी के निर्देश पर जिला परिषद की सीईओ दर्ज कराए थे केस
जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष और एडीसी उत्तम सिंह के निर्देश पर जिला परिषद की सीईओ मनीषा शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों में 35 गांवों में हुए 69 कार्यों में अनियमितताएं बरतना दिखाया गया है। चांदहट थाना क्षेत्र के गांव राजूपुर खादर में तीन, घोड़ी में दो, बड़ौली में दो, चांदहट में पांच व अलावलपुर में चार कार्यों में अनियमितताएं बरती गईं। इसी प्रकार गदपुरी थाना क्षेत्र के गांव हरफली में चार व पृथला में तीन कार्य, सदर थाना क्षेत्र के दुर्गापुर में एक, असावटा में दो, बढ़ा में चार, किशोरपुर में एक, टहरकी में एक, जलालपुर में एक व जोधपुर एक, हसनपुर थाना क्षेत्र के गांव रामगढ़ में तीन, काशीपुर में एक, गुलावद में तीन, लुलवाड़ी में एक व जटौली में एक कार्य में अनियमितताएं बरती गईं। इनके अलावा हथीन थाना क्षेत्र में बुराका, जलालपुर, मढनाका, महलूका, पावसर व रनियाला में 15 तथा होडल थाना क्षेत्र के गांव बंचारी में एक, भुलवाना में दो, डाडका में तीन, करमन में एक, लाडियाका में दो व पालड़ी में एक कार्य में अनियमितताएं बरती गईं।
होडल थाने में दर्ज मामलों में केवल ग्राम सचिवों के नाम
होडल थाने में दर्ज मुकदमों में केवल आठ ग्राम सचिवों को नामजद किया गया है। ग्राम सचिवों के अलावा किसी अधिकारी व कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अकेले ग्राम सचिव मनरेगा के तहत हुए कार्यों के नाम पर धनराशि कैसे निकाल सकते हैं।
सीईओ जिला परिषद की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। रिकार्ड लेने और अधिकारियों के बयान दर्ज करने के लिए सेक्शन-91 के तहत नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जा रही है। जांच में शामिल न होने पर गिरफ्तारी की जाएगी।
- यशपाल खटाना, डीएसपी